इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए?...


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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए इमोशनल अटैचमेंट जो है इंसान नाटक बहुत बड़ी ताकत होती है क्या बहुत बड़ी कमजोरी होती है जो बाहर ले जाता है उसके लिए ताकत होती है और दोपहर जाता है उसके लिए कमजोरी हो वर्षों में इस शरीर में भावनाओं का बहुत बड़ा योगदान है लेकिन भावनाएं इंसान को कत्थक पत्र से दिखा देती हैं भावना से ऊपर धक्का मार के कर्तव्य का मार्ग कर्तव्य भावनाओं से ऊपर होते हैं जो भावना में बह जाता है वह कस्टमर भूल जाता है माता के कई भावनाओं में बैठकर खतरनाक भूल गई भ्रष्ट हो गई उनके कारण पूरी अयोध्या नगरी अंधकार में दो इसलिए हमेशा भावनाओं से बचने के लिए अपने कर्तव्य और अपने ढंग के मार्गों को तुरंत शंकर प्ले लो अरे मैं क्या कर रहा हूं नहीं नहीं नहीं नहीं ऐसा करने से मैंने अट फर्स्ट हो जाऊंगा भ्रष्ट हो जाऊंगा तुरंत आप उससे बाहर निकलेंगे

emotional attachment se kaise bacha jaaye emotional attachment jo hai insaan natak bahut badi takat hoti hai kya bahut badi kamzori hoti hai jo bahar le jata hai uske liye takat hoti hai aur dopahar jata hai uske liye kamzori ho varshon me is sharir me bhavnao ka bahut bada yogdan hai lekin bhaavnaye insaan ko katthak patra se dikha deti hain bhavna se upar dhakka maar ke kartavya ka marg kartavya bhavnao se upar hote hain jo bhavna me wah jata hai vaah customer bhool jata hai mata ke kai bhavnao me baithkar khataranaak bhool gayi bhrasht ho gayi unke karan puri ayodhya nagari andhakar me do isliye hamesha bhavnao se bachne ke liye apne kartavya aur apne dhang ke margon ko turant shankar play lo are main kya kar raha hoon nahi nahi nahi nahi aisa karne se maine attack first ho jaunga bhrasht ho jaunga turant aap usse bahar nikalenge

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए इमोशनल अटैचमेंट जो है इंसान नाटक बहुत बड़ी ताकत होती है क्

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्यों होती है कि आदमी जब भाव में जो बह जाता है वास्तविकता को नहीं समझता तो ब्लड टेस्ट में सबको घाटा होता है परेशानियां होती हैं इसलिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि जो आप कोई इमोशनल अटैचमेंट कर रहा है वह किस स्तर का है जैसे आपकी बीवी है इमोशनल अटैचमेंट करती है भाई देखे वह तो आप भी जीवनसंगिनी है उसका विश्वास जीतना पड़ेगा आपको विश्वास जीतेगी दोनों का सहारा है माता पिता के साथ इमोशनल अपेक्षित करते हो आपके खून के रिश्ते हैं और खून के रिश्ते कभी मतलब कमजोर नहीं पड़ने चाहिए तो इमोशनल अटैचमेंट बाहर से कोई बात नहीं लेकिन अंदर से तो भाई उसके लिए आपको ऐड करना पड़ेगा उनके साथ भी थोड़ा सा समय देना पड़ेगा यही सच्चाई जीवन की सच्चाई भी है उसे पटना भी आपको चाहिए थोड़ा अपने कार्य में भी समझ लीजिए और इमोशनल अटैचमेंट के बनाए रखें यही जीवन का एक सिद्धांत है

kyon hoti hai ki aadmi jab bhav me jo wah jata hai vastavikta ko nahi samajhata toh blood test me sabko ghata hota hai pareshaniya hoti hain isliye sabse pehle yah janana zaroori hai ki jo aap koi emotional attachment kar raha hai vaah kis sthar ka hai jaise aapki biwi hai emotional attachment karti hai bhai dekhe vaah toh aap bhi jivanasangini hai uska vishwas jeetna padega aapko vishwas jitegi dono ka sahara hai mata pita ke saath emotional apekshit karte ho aapke khoon ke rishte hain aur khoon ke rishte kabhi matlab kamjor nahi padane chahiye toh emotional attachment bahar se koi baat nahi lekin andar se toh bhai uske liye aapko aid karna padega unke saath bhi thoda sa samay dena padega yahi sacchai jeevan ki sacchai bhi hai use patna bhi aapko chahiye thoda apne karya me bhi samajh lijiye aur emotional attachment ke banaye rakhen yahi jeevan ka ek siddhant hai

क्यों होती है कि आदमी जब भाव में जो बह जाता है वास्तविकता को नहीं समझता तो ब्लड टेस्ट में

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए देखिए संसार में जितना भी जो दुख है वह इमोशनल और अटैचमेंट के कारण हुआ करता है यदि व्यक्ति इमोशनल और अटैचमेंट ना करें तो यह संसार में उसे दुख हो ही नहीं सकता है इस संबंध में व्यक्ति जो है भावनात्मक जो रिश्ते हैं वह सीमित करें और सिर्फ जो अटैचमेंट है वह परमात्मा से लगाए तो जितने अटैचमेंट है वह अपने आप पता है आपके खत्म हो जाएंगे और नहीं भी तो धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे इसलिए इमोशनल जो अटैचमेंट है व्यक्ति को भगवान से लगाना चाहिए

emotional attachment se kaise bacha jaaye dekhiye sansar me jitna bhi jo dukh hai vaah emotional aur attachment ke karan hua karta hai yadi vyakti emotional aur attachment na kare toh yah sansar me use dukh ho hi nahi sakta hai is sambandh me vyakti jo hai bhavnatmak jo rishte hain vaah simit kare aur sirf jo attachment hai vaah paramatma se lagaye toh jitne attachment hai vaah apne aap pata hai aapke khatam ho jaenge aur nahi bhi toh dhire dhire samapt ho jaenge isliye emotional jo attachment hai vyakti ko bhagwan se lagana chahiye

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए देखिए संसार में जितना भी जो दुख है वह इमोशनल और अटैचमेंट

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Shipra Ranjan

Life Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप सवाल एक इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए तो देखे किसी से भी मोशन अटैचमेंट से पहुंचे तभी होता है जब आप उसके बारे में उसके साथ होने की कोशिश इंसान से किस्त होंगे ही नहीं हमेशा चीजों को कैसे लेना चाहिए कोई भी आ जाता है तो बहुत दुख होता है इसलिए

aap sawaal ek emotional attachment se kaise bacha jaaye toh dekhe kisi se bhi motion attachment se pahuche tabhi hota hai jab aap uske bare me uske saath hone ki koshish insaan se kist honge hi nahi hamesha chijon ko kaise lena chahiye koi bhi aa jata hai toh bahut dukh hota hai isliye

आप सवाल एक इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए तो देखे किसी से भी मोशन अटैचमेंट से पहुंचे तभी

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Arvind K. Bharti

Theoretical Psychologist

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इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए श्री की बात है कि जवाब किसी नए एपिसोड में दोगे तो सीधी सी बात है जवाब किसी ने अगर पैसे पढ़ते होगा तो आप इमोशनल अटैचमेंट से नहीं बच पाओगे पर हैं जहां आप किसी से व्यक्ति से बार-बार आपका परिचय हो रहा है जिस व्यक्ति से आप बार-बार रात का संवाद है तो आप इसके लिए तो खुद ही समझ सकते हो कि भाई यह मेरे पर्सनल अटैचमेंट से बच सकता हूं इसे आप जानते हैं जिससे आप रूबरू हैं तो सीधी सी बात है आप उसके मौके पर मिल सकते हैं पर किसी ने आप नहीं बच पाओगे क्योंकि जब तक आप को पता नहीं है कि वह कौन है क्या है जिसके बारे में आप को ज्ञान नहीं हो अब तक नहीं हो सकता धन्यवाद

emotional attachment se kaise bacha jaaye shri ki baat hai ki jawab kisi naye episode me doge toh seedhi si baat hai jawab kisi ne agar paise padhte hoga toh aap emotional attachment se nahi bach paoge par hain jaha aap kisi se vyakti se baar baar aapka parichay ho raha hai jis vyakti se aap baar baar raat ka samvaad hai toh aap iske liye toh khud hi samajh sakte ho ki bhai yah mere personal attachment se bach sakta hoon ise aap jante hain jisse aap rubaru hain toh seedhi si baat hai aap uske mauke par mil sakte hain par kisi ne aap nahi bach paoge kyonki jab tak aap ko pata nahi hai ki vaah kaun hai kya hai jiske bare me aap ko gyaan nahi ho ab tak nahi ho sakta dhanyavad

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए श्री की बात है कि जवाब किसी नए एपिसोड में दोगे तो सीधी सी

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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत अच्छी क्वेश्चन है इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए तो कहूंगी इमोशनल अटैचमेंट आपके लाइफ में रुकावट है तो बचना चाहिए अगर आपके जीवन में वह अच्छा है तो फिर उसे भागना भी नहीं चाहिए जिससे आपके लाइफ सुधर सकती है जिस अटैचमेंट से आज का आपका परिवार रूपी जीवन या यंग हो तो जीवन को सुधारने के लिए अटैचमेंट आपका गाइड बनता है तो मैं कहूंगी उससे बचना नहीं चाहिए अगर उन सब चीजों से आपको खाता होती है तो उससे बचने की एक ही फायदा है आप सब देखते हुए ना देखो सुनते हुए ना सुनो जैसे महात्मा गांधीजी ना सुनो ना बुरा देखो ना पूरा यह तीन चीज धारण की थी यानी पालन कीजिए और अपने अंदर में शक्ति भरिए तो ऑटोमेटिक अटैचमेंट खत्म हो जाएगी और इससे अगर आपकी जीवन में सुधार है या फिर इस अटैचमेंट के कारण किसी के जीवन के सुधार है घर की सुख शांति है मैं कहूं कि ऐसे अटैचमेंट से दूर होना अच्छी बात नहीं है यह आप पर निर्भर करता है कि कौन से अटैचमेंट की बात आप करें आप को शत-शत है मैंने हंस दे दी है गांधी जी की

bahut achi question hai emotional attachment se kaise bacha jaaye toh kahungi emotional attachment aapke life me rukavat hai toh bachna chahiye agar aapke jeevan me vaah accha hai toh phir use bhaagna bhi nahi chahiye jisse aapke life sudhar sakti hai jis attachment se aaj ka aapka parivar rupee jeevan ya young ho toh jeevan ko sudhaarne ke liye attachment aapka guide banta hai toh main kahungi usse bachna nahi chahiye agar un sab chijon se aapko khaata hoti hai toh usse bachne ki ek hi fayda hai aap sab dekhte hue na dekho sunte hue na suno jaise mahatma gandhiji na suno na bura dekho na pura yah teen cheez dharan ki thi yani palan kijiye aur apne andar me shakti bhariye toh Automatic attachment khatam ho jayegi aur isse agar aapki jeevan me sudhaar hai ya phir is attachment ke karan kisi ke jeevan ke sudhaar hai ghar ki sukh shanti hai main kahun ki aise attachment se dur hona achi baat nahi hai yah aap par nirbhar karta hai ki kaun se attachment ki baat aap kare aap ko shat shat hai maine hans de di hai gandhi ji ki

बहुत अच्छी क्वेश्चन है इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए तो कहूंगी इमोशनल अटैचमेंट आपके लाइ

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Anjana Baliga

Counselor

2:16
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

फोन से कैसे बचें अटैचमेंट का मतलब क्या है या संपर्क में काफी समय बिताया तो वह हमारे माता-पिता से लेकर भाई बंधु कोई भी हो सकता है आपकी गर्लफ्रेंड ब्वॉयफ्रेंड पति पत्नी इतना क्यों यह अच्छा है आप इसे हटा से इसी का नाम जीवन है परंतु हमें अगर इससे बचना है इसका मतलब आपकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हो रही है मान लो आप भाई बहन है आप अब बहन से अपेक्षा करते हैं कि वह आपके साथ अच्छे से बात अब बातें करें वह अपने सुख दुख के साथ शेयर करें भरोसा नहीं कर सकता करना चाहती तो जब आपके पिक सेंड पूर्ण नहीं होती तो आपको दुख होता है यार यह तो मेरे से कुछ भी साझा नहीं कर रही तब आपको दुख होगा तो या तो आप अपेक्षाएं ना करें उस व्यक्ति से जब आप की अपेक्षा की पूर्ति नहीं नींद और आउटकम सा नॉट मेड जो आप एक्सेस कर रहे हैं उस रिश्ते से वह नहीं पूर्ति हो रहा तब आपको लगेगा कि आपको इमोशनल अटैचमेंट नहीं रखना चाहिए या उस रिश्ते से आप छुटकारा पाना चाहते हो तो ही यह सब आपको लगेगा नहीं तो संसार में इमोशनल अटैचमेंट बहुत अच्छी बात है और इसी का नाम जीवन आपके रिश्ते बेहतर रहे हैं रिश्ते अच्छे रहे तू ही जीवन चलता है रिश्ते में खटास आ जाए दुख आ जाए तो मैं आपको लगता कि मैं इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचें अगर मान लो आपका कभी ब्रेकअप भी हो जाता है या आप ब्रेकअप करना भी चाहते हैं उस व्यक्ति से दूर रहना चाहते हैं तो अपने मन के हिस्से को उस से हटाकर अपनी भावनाओं को पूरी तरह रिक्त करके इसे बचा सकते हैं और भावना को आपको खाली करना पड़ेगा और भावनाओं का केंद्र जो है किसी और क्या कार्य में बैठक होगी किसी और कार्य में मन लगाइए कल अग्नि कीजिए अपनी क्रिएटिविटी को भारी है चाहे आप लिख कर के रूप में होना गाना हो गीत गाइए नृत्य कोई भी आपकी जो क्रिएटिविटी है आप मिट्टी से कुछ बनाना चाहते हैं तो किसी कलाकृति या ऐसी चीजों में अपना मन लगाइए जहां पर अधिक से अधिक समय बीता हो तो आपका यह डाटा कम हो जाएगा धन्यवाद

phone se kaise bache attachment ka matlab kya hai ya sampark me kaafi samay bitaya toh vaah hamare mata pita se lekar bhai bandhu koi bhi ho sakta hai aapki girlfriend bwayafrend pati patni itna kyon yah accha hai aap ise hata se isi ka naam jeevan hai parantu hamein agar isse bachna hai iska matlab aapki apekshayen puri nahi ho rahi hai maan lo aap bhai behen hai aap ab behen se apeksha karte hain ki vaah aapke saath acche se baat ab batein kare vaah apne sukh dukh ke saath share kare bharosa nahi kar sakta karna chahti toh jab aapke pic send purn nahi hoti toh aapko dukh hota hai yaar yah toh mere se kuch bhi sajha nahi kar rahi tab aapko dukh hoga toh ya toh aap apekshayen na kare us vyakti se jab aap ki apeksha ki purti nahi neend aur autakam sa not made jo aap access kar rahe hain us rishte se vaah nahi purti ho raha tab aapko lagega ki aapko emotional attachment nahi rakhna chahiye ya us rishte se aap chhutkara paana chahte ho toh hi yah sab aapko lagega nahi toh sansar me emotional attachment bahut achi baat hai aur isi ka naam jeevan aapke rishte behtar rahe hain rishte acche rahe tu hi jeevan chalta hai rishte me khatas aa jaaye dukh aa jaaye toh main aapko lagta ki main emotional attachment se kaise bache agar maan lo aapka kabhi breakup bhi ho jata hai ya aap breakup karna bhi chahte hain us vyakti se dur rehna chahte hain toh apne man ke hisse ko us se hatakar apni bhavnao ko puri tarah rikt karke ise bacha sakte hain aur bhavna ko aapko khaali karna padega aur bhavnao ka kendra jo hai kisi aur kya karya me baithak hogi kisi aur karya me man lagaaiye kal agni kijiye apni creativity ko bhari hai chahen aap likh kar ke roop me hona gaana ho geet gaiye nritya koi bhi aapki jo creativity hai aap mitti se kuch banana chahte hain toh kisi kalakriti ya aisi chijon me apna man lagaaiye jaha par adhik se adhik samay bita ho toh aapka yah data kam ho jaega dhanyavad

फोन से कैसे बचें अटैचमेंट का मतलब क्या है या संपर्क में काफी समय बिताया तो वह हमारे माता-प

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Porshia Chawla Ban

Psychologist

2:06
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए इमोशनल अटैचमेंट हो रहा है यानी कि कोई आपका एक हिस्सा है जो तर्क नहीं इस्तेमाल कर रहा है लॉजिक यूज नहीं कर रहा है दादा तो जवाब लॉजिकल ही हर चीज को देखेंगे राशनली हर चीज को देखेंगे रखेंगे तो इमोशनल अटैचमेंट उतना नहीं होगा और एक लाइफ में पीरियड रहता है फेस रहता है हर किसी के जिसमें वह इमोशनल अटैचमेंट को महसूस करते हैं और करना पसंद करते हैं उनको अच्छा लगता है इमोशनली अटैच होना कैसी नहीं है वह उस को बढ़ावा देते हैं इस में रम जाते हैं जैसे कि कोई शराब पी रहा है पी रहा है और इसलिए पी रहा है क्योंकि उसको पीना अच्छा लगता है मुझे पीने के बाद उसको है की फीलिंग आती है उसका जो स्टेट ऑफ कॉन्शसनेस है वह चेंज हो जाता है तो उस सुशील इनको चैट करता है उसको लुभावना लगता है मजा आता है ऐसे ही अफीम लेने वालों का है ड्रग्स लेने वालों का है ऐसे ही आपका इमोशनली अटैच हो जाते हैं उनको कोई तो भी इंसान चाहिए जिसमें डिपेंड हो सके बचने के लिए आप खुद में विश्वास रखें कि आप में क्या है आपस एबिलिटीज संभावनाएं आप क्या कर सकते हैं आपका लक्ष्य क्या है आपके जीवन का अर्थ क्या है इन चीजों पर ध्यान देते हैं अगर इन पर वह करते हैं तो हमारे सारे संबंध हो रिश्ते मधुर रहेंगे बिना इमोशनल अटैचमेंट के हम अच्छे रिलेशनशिप जिएंगे बिना इमोशनल अटैचमेंट के हम ज्यादा खुलकर उन रिश्तो को निभा पाएंगे और उन्हें खुश रह पाएंगे क्योंकि वहां पर फिर वह नहीं रहेगा कि हम कौन से क्या मिलने वाला है यह जो अपेक्षाएं हैं उनसे इमोशनल अटैचमेंट होती है धन्यवाद

emotional attachment se kaise bacha jaaye emotional attachment ho raha hai yani ki koi aapka ek hissa hai jo tark nahi istemal kar raha hai logic use nahi kar raha hai dada toh jawab logical hi har cheez ko dekhenge rashanali har cheez ko dekhenge rakhenge toh emotional attachment utana nahi hoga aur ek life mein period rehta hai face rehta hai har kisi ke jisme vaah emotional attachment ko mahsus karte hain aur karna pasand karte hain unko accha lagta hai emotionally attach hona kaisi nahi hai vaah us ko badhawa dete hain is mein rum jaate hain jaise ki koi sharab p raha hai p raha hai aur isliye p raha hai kyonki usko peena accha lagta hai mujhe peene ke baad usko hai ki feeling aati hai uska jo state of consciousness hai vaah change ho jata hai toh us sushil inko chat karta hai usko lubhavana lagta hai maza aata hai aise hi afeem lene walon ka hai drugs lene walon ka hai aise hi aapka emotionally attach ho jaate hain unko koi toh bhi insaan chahiye jisme depend ho sake bachne ke liye aap khud mein vishwas rakhen ki aap mein kya hai aapas ebilitij sambhavnayen aap kya kar sakte hain aapka lakshya kya hai aapke jeevan ka arth kya hai in chijon par dhyan dete hain agar in par vaah karte hain toh hamare saare sambandh ho rishte madhur rahenge bina emotional attachment ke hum acche Relationship jeeenge bina emotional attachment ke hum zyada khulkar un rishto ko nibha payenge aur unhe khush reh payenge kyonki wahan par phir vaah nahi rahega ki hum kaun se kya milne vala hai yah jo apekshayen hain unse emotional attachment hoti hai dhanyavad

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए इमोशनल अटैचमेंट हो रहा है यानी कि कोई आपका एक हिस्सा है जो

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इमोशनल हो ना हम सभी का सफाई कौन है और अगर हम इमोशन होते तो हमारी पावर कई गुना बढ़ जाती है इमोशनल हो ना कोई बुराई नहीं है लेकिन इमोशन कभी-कभी कमजोरी भी बन जाता है किसी इमोशनली अटैच होने का मतलब होता है उसको इस ग्रुप से कोई भी कर्म करते हैं बिना किसी चाहत के किसी की भलाई करते हैं तो उससे आपको कुछ पानी खींच अगर आपसे कुछ बोला करो या फिर आप किसी से प्यार करते हो उसके साथ आप उसके बदले में कुछ पाने की इच्छा मत रखो

emotional ho na hum sabhi ka safaai kaun hai aur agar hum emotion hote toh hamari power kai guna badh jaati hai emotional ho na koi burayi nahi hai lekin emotion kabhi kabhi kamzori bhi ban jata hai kisi emotionally attach hone ka matlab hota hai usko is group se koi bhi karm karte hain bina kisi chahat ke kisi ki bhalai karte hain toh usse aapko kuch paani khinch agar aapse kuch bola karo ya phir aap kisi se pyar karte ho uske saath aap uske badle mein kuch paane ki iccha mat rakho

इमोशनल हो ना हम सभी का सफाई कौन है और अगर हम इमोशन होते तो हमारी पावर कई गुना बढ़ जाती है

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अच्छा प्रश्न इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए उससे बचने के लिए काफी मुश्किल है लेकिन ट्राई कर सकते हैं जब आप किसी इंसान के पास बैठे हो बातचीत होती रहती है और एक दूसरे के टॉपिक में इतनी सारी बातचीत हुई मेरी तेरी तेरी आंखों से बातचीत होती रहती है तू अटैचमेंट होती जाएगी और कम से कम रखें

accha prashna emotional attachment se kaise bacha jaaye usse bachne ke liye kafi mushkil hai lekin try kar sakte hain jab aap kisi insaan ke paas baithe ho batchit hoti rehti hai aur ek dusre ke topic mein itni saree batchit hui meri teri teri aakhon se batchit hoti rehti hai tu attachment hoti jayegi aur kam se kam rakhen

अच्छा प्रश्न इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए उससे बचने के लिए काफी मुश्किल है लेकिन ट्राई

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

4:49
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए सबसे पहले तो यह समझना चाहिए कि इमोशनल इमोशंस क्या होती हुई एक्सीडेंट कैसे होता है अपनी मन की भावनाओं और इच्छाओं को इमोशंस ऐसे और अटैचमेंट जो होता है वह किसी भी व्यक्ति वस्तु या किसी से भी हो सकता है और उससे हमें बचना है तो हमें इमोशनल अटैचमेंट है जो है उसकी प्रक्रिया को अगर समझो तो किसी भी व्यक्ति के साथ अगर हम इमोशनली ज्योतिष तो पहले दोस्ती होती है फिर तो प्यार होता है और फिर बाद में ही मोशंस जब हमें उसके बिना नहीं चलता हमें उसकी जरूरत महसूस होती है तब समझ में आता है कि हम इमोशनली उनसे जुड़े हुए हैं किसी को पेड़ पौधों से मुसल सो जाते उनसे बातें करते हैं किसी को कोई गलत आदतें हो जाती है एडिक्शन उसको बोलते हैं कि किसी को शराब का सनी लियोन से जुड़ जाते हैं कि कोई गांजा भांग चरस वगैरह से झुक जाते कोई दो दोस्त दो फीमेल या दो मेल वह भी इमोशनली एक दूसरे से अटैच हो जाते हैं क्या एक पुरुष और एक स्त्री या एक लड़की और लड़का वह भी इमोशनली अटैच हो जाती इसलिए इमोशंस जो है वह हमारे मन की भावना है और वह उसको हमारे इमोशंस को हमारे ऊपर काबू नहीं करें उसके लिए प्रयास करने चाहिए पहले तो जज हमको अपने आप के ऊपर करना चाहिए कि हम इस लेवल तक किसी भी ठीक से ना जोड़ें कि हमारी इमोशंस उसके बिना वह हम हमारा काम आगे ना बढ़े हमको और खराब थी होने लगे चाहे कोई व्यक्ति वस्तुओं या कुछ भी हो क्योंकि हम किसी इमोशनल अटैचमेंट से अगर किसी से जूते तो सामने वाला भी इमोशनल इमोशनली हमें ले रहा है या नहीं ले रहा है वह उसके ऊपर डिपेंड है अक्सर मानेगी बातों में माननीय स्वभाव में देखा गया है कि इमोशनल अटैचमेंट उसी से होता है जो इमोशनल अटैचमेंट सामने वाले का भी हो क्योंकि भावनाएं यह वनवे नहीं होती है यह टू वे होती है जब तक हम इमोशनल इमोशंस दिखाएं कि नहीं किसी को और हमें जब तक उसका जवाब इमोशनल में नहीं मिलेगा तब तक हम वह उससे नहीं वही प्रक्रिया बार-बार दोहराते दौरा से हम इमोशनली अटैच हो जाते हैं और फिर हम उसी के ख्यालों में उसी की यादों में डूबे रहते हैं उसी के बारे में सोचते हैं जबकि परिस्थिति आ जाए और हमें अटैचमेंट ऐसा हो गया है ऐसा फील हो तब हमें रुक जाने का संदेश दिमाग को देना चाहिए कि यह मसला लेटेस्ट मैंट हमारी जिंदगी के लिए सही है या गलत है और हमें अब क्या करना चाहिए तो हमें अगर इमोशनल अटैचमेंट नहीं करना है नहीं चाहते हम तो हर एक जो चीज से हम इमोशनली अटैच हुए हैं उससे से डिस्टेंस जरूर बनाना चाहिए हमें उनसे उनसे कांटेक्ट में बहुत कम आना चाहिए और अपने इमोशंस पर हम काबू पा सकते हैं फिर भी अगर हम सोचे चंपल आनी व्यक्ति या वस्तु के बिना नहीं रह सकते हैं तो वह हमारी कमजोरी साबित होती है जब हमने अगर मन में पैक कर लिया कि हमें इमोशनल अटैचमेंट इस व्यक्ति वस्तु से नहीं करना है तो हमको अपने आपको पर जरूर काबू पाना चाहिए और वह हम कर सकते हैं वह धीमे-धीमे होता है कोई तकलीफ होती है लेकिन अंत में हम उसके ऊपर विजयपाल से बहुत-बहुत शुभकामनाएं धन्यवाद

emotional attachment se kaise bacha jaaye sabse pehle toh yah samajhna chahiye ki emotional emotional kya hoti hui accident kaise hota hai apni man ki bhavnao aur ikchao ko emotional aise aur attachment jo hota hai vaah kisi bhi vyakti vastu ya kisi se bhi ho sakta hai aur usse hamein bachana hai toh hamein emotional attachment hai jo hai uski prakriya ko agar samjho toh kisi bhi vyakti ke saath agar hum emotionally jyotish toh pehle dosti hoti hai phir toh pyar hota hai aur phir baad mein hi moshans jab hamein uske bina nahi chalta hamein uski zaroorat mahsus hoti hai tab samajh mein aata hai ki hum emotionally unse jude hue hain kisi ko ped paudho se musal so jaate unse batein karte hain kisi ko koi galat aadatein ho jaati hai addiction usko bolte hain ki kisi ko sharab ka sunny leone se jud jaate hain ki koi ganja bhang charas vagairah se jhuk jaate koi do dost do female ya do male vaah bhi emotionally ek dusre se attach ho jaate hain kya ek purush aur ek stree ya ek ladki aur ladka vaah bhi emotionally attach ho jaati isliye emotional jo hai vaah hamare man ki bhavna hai aur vaah usko hamare emotional ko hamare upar kabu nahi karen uske liye prayas karne chahiye pehle toh judge hamko apne aap ke upar karna chahiye ki hum is level tak kisi bhi theek se na joden ki hamari emotional uske bina vaah hum hamara kaam aage na badhe hamko aur kharaab thi hone lage chahen koi vyakti vastuon ya kuch bhi ho kyonki hum kisi emotional attachment se agar kisi se joote toh saamne vala bhi emotional emotionally hamein le raha hai ya nahi le raha hai vaah uske upar depend hai aksar manegi baaton mein maananeey swabhav mein dekha gaya hai ki emotional attachment usi se hota hai jo emotional attachment saamne waale ka bhi ho kyonki bhavnaayen yah vanave nahi hoti hai yah to ve hoti hai jab tak hum emotional emotional dikhaen ki nahi kisi ko aur hamein jab tak uska jawab emotional mein nahi milega tab tak hum vaah usse nahi wahi prakriya baar baar dohrate daura se hum emotionally attach ho jaate hain aur phir hum usi ke khyalon mein usi ki yaadon mein doobe rehte hain usi ke bare mein sochte hain jabki paristhiti aa jaaye aur hamein attachment aisa ho gaya hai aisa feel ho tab hamein ruk jaane ka sandesh dimag ko dena chahiye ki yah masala latest maint hamari zindagi ke liye sahi hai ya galat hai aur hamein ab kya karna chahiye toh hamein agar emotional attachment nahi karna hai nahi chahte hum toh har ek jo cheez se hum emotionally attach hue hain usse se distance zaroor banana chahiye hamein unse unse Contact mein bahut kam aana chahiye aur apne emotional par hum kabu paa sakte hain phir bhi agar hum soche champal aani vyakti ya vastu ke bina nahi reh sakte hain toh vaah hamari kamzori saabit hoti hai jab humne agar man mein pack kar liya ki hamein emotional attachment is vyakti vastu se nahi karna hai toh hamko apne aapko par zaroor kabu paana chahiye aur vaah hum kar sakte hain vaah dhime dhime hota hai koi takleef hoti hai lekin ant mein hum uske upar vijayapal se bahut bahut subhkamnaayain dhanyavad

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए सबसे पहले तो यह समझना चाहिए कि इमोशनल इमोशंस क्या होती हुई

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Dr Asha B Jain

Dip in Naturopathy, Yoga therapist Pranic healer, Counselor

1:17
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इमोशनल अटैचमेंट एक स्वाभाविक प्रक्रिया है हम जब पैदा होते हैं तब से लेकर हम बड़े होते हैं किसी न किसी से अटैच में जीवन बना ही रहता है पैदा होते हमें मां से अटैचमेंट होता है अपने पिता के होता है अपने भाई-बहनों से होता है इसके अलावा बाद में भी हमें अपने पति या पत्नी से होता है अपने खुद के बच्चों से भी अटैचमेंट होता है वह कई बार यह बहुत ज्यादा अटैचमेंट हमें दुख का कारण बनता है तो उसके इतना अटैचमेंट नहीं करो कि वह दुख का कारण बन जाए जीवन में क्या उसके बिना रह ना पाए उसके नहीं रहने पर हम जीने की तमन्ना ही खत्म हो जाए ऐसा ठीक नहीं है उसको इस तरह के अटैचमेंट से दूर रहने के लिए हमें बहुत ज्यादा बिजी रहने की आवश्यकता है यहां अपने कार्य में बहुत ज्यादा बिजी हो जाते हैं आप देखिएगा जितने भी लोग बहुत ज्यादा बिजी रहते हैं अपने कार्य में तो उनका अटैचमेंट एक मिनिमम होता है थोड़ा अटैचमेंट तो सभी का होता है और होना भी चाहिए तो कोई बुराई नहीं है उसमें तो इस तरीके से आप अपने आपको अगर बिजी रहते हैं तो चली अपने आप को अपने वर्क में भी बिजी रखी है अगर कोई काम नहीं है तो सोच लिया अपने आपको भी बिजी रखिए का कुत्ता ज्यादा फीलिंग नहीं होगी धन्यवाद

emotional attachment ek swabhavik prakriya hai hum jab paida hote hain tab se lekar hum bade hote hain kisi na kisi se attach mein jeevan bana hi rehta hai paida hote hamein maa se attachment hota hai apne pita ke hota hai apne bhai bahnon se hota hai iske alava baad mein bhi hamein apne pati ya patni se hota hai apne khud ke bacchon se bhi attachment hota hai vaah kai baar yah bahut zyada attachment hamein dukh ka karan banta hai toh uske itna attachment nahi karo ki vaah dukh ka karan ban jaaye jeevan mein kya uske bina reh na paye uske nahi rehne par hum jeene ki tamanna hi khatam ho jaaye aisa theek nahi hai usko is tarah ke attachment se dur rehne ke liye hamein bahut zyada busy rehne ki avashyakta hai yahan apne karya mein bahut zyada busy ho jaate hain aap dekhiega jitne bhi log bahut zyada busy rehte hain apne karya mein toh unka attachment ek minimum hota hai thoda attachment toh sabhi ka hota hai aur hona bhi chahiye toh koi burayi nahi hai usmein toh is tarike se aap apne aapko agar busy rehte hain toh chali apne aap ko apne work mein bhi busy rakhi hai agar koi kaam nahi hai toh soch liya apne aapko bhi busy rakhiye ka kutta zyada feeling nahi hogi dhanyavad

इमोशनल अटैचमेंट एक स्वाभाविक प्रक्रिया है हम जब पैदा होते हैं तब से लेकर हम बड़े होते हैं

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Liyakat Ali Gazi

Motivational Speaker, Life Coach & Soft Skills Trainer 📲 9956269300

0:43

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J.P. Y👌g i

Psychologist

4:03
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह वास्तव में बहुत ही रविदास भक्त परेशन है कि इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए दरअसल यह बहुत बड़ी छुट्टी भी हो जाती है कभी-कभी कि हम ज्यादा इमोशनली होते हैं तो लोग हमारा वही स्वरूप निर्धारित करके उसका फायदा उठाने लगते हैं क्योंकि उस पर सिद्धांत भेजो परख होती है वह सफलता सब को उजागर में रहता है कि यह व्यक्तित्व ऐसी रूप से बना हुआ और उसके साथ जो भी प्रक्रिया करें उसका परिणाम यही होगा तो यही मोस्टली होता है कि अगर लेकिन यह भी नहीं होता कि संवेदना इतनी मर जाएं क्या हम किसी को कुछ प्लीज इतना देखें कि हम उसके सहयोग को भी ना कर पाए तो यहां जरूरत होती है सब इतना होकर लेकिन इतना टेस्ट मैच नहीं होना चाहिए कि जिससे कि हमारा कोई गलत फायदा उठा ले और हम अपने कर्तव्य को भूल कर उसमें ही रत हो जाएं क्योंकि कुछ हमारे पर भी जिम्मेदारियां होती है हम उसको इग्नोर नहीं कर सकते हैं तो उसको हमेशा ध्यान में बरकरार रखना चाहिए और इमोशनल यही है कि हम निर्णायक पक्ष को समझ सके सिरप इसलिए काफी होता है जो इमोशनल अटैचमेंट है तो कभी-कभी ऐसे भी कहते हैं कि निष्ठुर हो गया है बिल्कुल किसी को चीज के अंदर से कुशलता है उसकी आंखों में आजादी बहुत सी ऐसी बातें कठोर अपने आती है तो व्यक्ति पक्ष में आदमी का एक अलग हो तो बाइक से दूर होता है तो अपने-अपने क्षेत्र चुनाव के ऊपर बात है कि उसको किस ढंग से अपने सिद्धांत को बरकरार दिखाने के लिए लगता है लेकिन कैसे बचा जाए यह बात आ रही है कि तू इसमें से बचने का एक ही तरीका है कि आप उसको ही सत्य की असत्य है कि नहीं और यह सब धर्म से और दायित्व से सही प्रक्रिया में है कि नहीं क्योंकि अपराधी भी इमोशनल को दिखाकर या धोखेबाज लोग भी ऐसे होते हैं जो इमोशनल को बढ़ा चढ़ाकर थक करते हैं तो यह भी इस इमोशनल का बहुत बड़ा नुकसान होता है तो लिस्ट इमोशनल के प्रति हमारी अंदर बहुत बड़ी सिद्धांत एक पैटर्न होती है जिसके आधार पर हम उसकी प्रयुक्ति कर सके अन्यथा तो एक आधार पर आकर नेशनल में ज्यादातर अनियंत्रित हो जाता है मनुष्य और वह इतने भावुक में उसको पता नहीं चलता है तो यही है कि इससे बचने के लिए यही कि आप आत्मिक रूप से ज्ञान में स्थित हों जो सत और धर्म होता है जैसे कि न्याय की संगत में जो न्यायमूर्ति का जो चिन्ह बना हुआ उसकी आंखों में काली पट्टी बांधी जाती क्योंकि वहां इसीलिए की इमोशनल ना देखें तथ्य के आधार पर ही साक्ष्य के आधार पर ही प्रमाण को घोषित करे तो इसी तरह मनुष्य के प्रति भी रुझान रखना चाहिए कि यह वास्तविक अगर है तो यह अपने कर्मों को भोग राजा दोषी युक्त है तो दंडनीय है तो प्रकृति बढ़ता है उसको बेहतर है उसके साथ अनुचित नहीं रख सकते अनुभूति पूरा तो उसका हम दुख भाग नहीं हटा सकते लेकिन इस अनुचित नहीं दी जाती है कि कुछ ना कुछ उसको वैचारिक सोच मिलती है ही चीज के लिए प्रसिद्ध करें अगर रुपए में ज्यादा है तो बचने के लिए यह है कि अपने आप को ही सही निर्णय इस अवस्था में रखना चाहिए और आप अपने आप को एक सिद्धांत के पहलू में उजागर रखना चाहिए क्योंकि सिद्धांत के बिना व्यक्ति कभी बैलेंस में चले ही नहीं सकता है तो जो भी है वह अपने गुरुओं के या किसी भी आध्यात्मिक शैली के ज्ञान से आप अपने आप को नियोजित कर सकते हैं कि हमें सिद्धांत रिक्त और पर कहां और किस तरह से उपचार कर सकते हैं तो यह अपनी सोच का एक नजरिया है अगर आप थाने गे तो आप अपने उसी सिद्धांत में मोशन को कंफर्म कर सकते हैं धन्यवाद मुझे पीयूजी एक्सबॉक्स एक्स की ओर से

yah vaastav me bahut hi ravidas bhakt pareshan hai ki emotional attachment se kaise bacha jaaye darasal yah bahut badi chhutti bhi ho jaati hai kabhi kabhi ki hum zyada emotionally hote hain toh log hamara wahi swaroop nirdharit karke uska fayda uthane lagte hain kyonki us par siddhant bhejo parakh hoti hai vaah safalta sab ko ujagar me rehta hai ki yah vyaktitva aisi roop se bana hua aur uske saath jo bhi prakriya kare uska parinam yahi hoga toh yahi Mostly hota hai ki agar lekin yah bhi nahi hota ki samvedana itni mar jayen kya hum kisi ko kuch please itna dekhen ki hum uske sahyog ko bhi na kar paye toh yahan zarurat hoti hai sab itna hokar lekin itna test match nahi hona chahiye ki jisse ki hamara koi galat fayda utha le aur hum apne kartavya ko bhool kar usme hi rat ho jayen kyonki kuch hamare par bhi zimmedariyan hoti hai hum usko ignore nahi kar sakte hain toh usko hamesha dhyan me barkaraar rakhna chahiye aur emotional yahi hai ki hum niranayak paksh ko samajh sake syrup isliye kaafi hota hai jo emotional attachment hai toh kabhi kabhi aise bhi kehte hain ki nishthur ho gaya hai bilkul kisi ko cheez ke andar se kushalata hai uski aakhon me azadi bahut si aisi batein kathor apne aati hai toh vyakti paksh me aadmi ka ek alag ho toh bike se dur hota hai toh apne apne kshetra chunav ke upar baat hai ki usko kis dhang se apne siddhant ko barkaraar dikhane ke liye lagta hai lekin kaise bacha jaaye yah baat aa rahi hai ki tu isme se bachne ka ek hi tarika hai ki aap usko hi satya ki asatya hai ki nahi aur yah sab dharm se aur dayitva se sahi prakriya me hai ki nahi kyonki apradhi bhi emotional ko dikhakar ya dhokhebaj log bhi aise hote hain jo emotional ko badha chadhakar thak karte hain toh yah bhi is emotional ka bahut bada nuksan hota hai toh list emotional ke prati hamari andar bahut badi siddhant ek pattern hoti hai jiske aadhar par hum uski prayukti kar sake anyatha toh ek aadhar par aakar national me jyadatar aniyantrit ho jata hai manushya aur vaah itne bhavuk me usko pata nahi chalta hai toh yahi hai ki isse bachne ke liye yahi ki aap atmik roop se gyaan me sthit ho jo sat aur dharm hota hai jaise ki nyay ki sangat me jo nyaymurti ka jo chinh bana hua uski aakhon me kali patti bandhi jaati kyonki wahan isliye ki emotional na dekhen tathya ke aadhar par hi sakshya ke aadhar par hi pramaan ko ghoshit kare toh isi tarah manushya ke prati bhi rujhan rakhna chahiye ki yah vastavik agar hai toh yah apne karmon ko bhog raja doshi yukt hai toh dandniya hai toh prakriti badhta hai usko behtar hai uske saath anuchit nahi rakh sakte anubhuti pura toh uska hum dukh bhag nahi hata sakte lekin is anuchit nahi di jaati hai ki kuch na kuch usko vaicharik soch milti hai hi cheez ke liye prasiddh kare agar rupaye me zyada hai toh bachne ke liye yah hai ki apne aap ko hi sahi nirnay is avastha me rakhna chahiye aur aap apne aap ko ek siddhant ke pahaloo me ujagar rakhna chahiye kyonki siddhant ke bina vyakti kabhi balance me chale hi nahi sakta hai toh jo bhi hai vaah apne guruon ke ya kisi bhi aadhyatmik shaili ke gyaan se aap apne aap ko niyojit kar sakte hain ki hamein siddhant rikt aur par kaha aur kis tarah se upchaar kar sakte hain toh yah apni soch ka ek najariya hai agar aap thane gay toh aap apne usi siddhant me motion ko confirm kar sakte hain dhanyavad mujhe PUG xbox x ki aur se

यह वास्तव में बहुत ही रविदास भक्त परेशन है कि इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए दरअसल यह बहु

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Kankan Sarmah

Psychologist

2:07
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए जैसे दोस्तों इमोशन कोई खराब नहीं हुआ वह अच्छा है लेकिन आपको यह जानना जरूरी है कि उसको आप किस हिसाब से कैसे इस्तेमाल करते हो और कब किसके साथ क्यों यह जानना बहुत जरूरी है तो इसलिए आपको इमोशनल फूल बनने की कोई जरूरी नहीं डिवोशनल फुल बनते हैं वह इमोशनल धोखा भी खाते हैं और जो भी काम होते हैं उनके सामने और उस कम पर वह कभी सक्सेस नहीं कर पाते भी है तो मुश्किल से मिलते हैं या सही टाइम पर नहीं मिलते हैं तो इसलिए इमोशनल फूल बनना नहीं है क्योंकि इमोशनल फूल बनने से अपने कलेक्शन पर जाओगे और जो बात रही मोशन अटैचमेंट है लेकिन उसको पॉजिटिव पॉजिटिव डायरेक्शन या अपनी बेटी को प्यार करते हैं एक इमोशन बॉन्डिंग रहते हैं लेकिन माली जी के बच्चे का उम्र 2 साल 28 साल की है पापा भैया मम्मी ऑफिस जाने के समय आ गया है अगर पापा मम्मी को लगे कि नहीं मैं मुझे इसके साथ और 5 मिनट और 10 मिनट आना है क्योंकि जिन पर मुझे यह देखने को नहीं मिलेगा तो वहां पर लक्ष्मी जी वो तो 10 मिनिट है वह 10 मिनट में बच्चों के शर्ट थोड़ा टाइम स्पेंड करेगा तो ऑफिस आने में देरी होगी फिर अभी असली अपने बॉस की तरफ से हो या जो भी हो ऑफिस का जो माहौल है जो रोशन रेगुलेशन है उसमें भी क्या होगा 10:15 मिनट का लेट हो जाएगा फिर बाद में प्रोडक्टिविटी में भी आने पहुंचेगा तो इसलिए उन चीजों को देखना समझना जरूरी है अब सही टाइम पर ऑफिस से आप ऑफिस के लिए घर से बाहर निकले लेकिन यह भी ध्यान रखें कि आपके घर वालों की सुरक्षित रहें क्योंकि वह आपके साथ एक इमोशनली अटैच है बस थैंक यू धन्यवाद

emotional attachment se kaise bacha jaaye jaise doston emotion koi kharab nahi hua vaah accha hai lekin aapko yah janana zaroori hai ki usko aap kis hisab se kaise istemal karte ho aur kab kiske saath kyon yah janana bahut zaroori hai toh isliye aapko emotional fool banne ki koi zaroori nahi devotional full bante hain vaah emotional dhokha bhi khate hain aur jo bhi kaam hote hain unke saamne aur us kam par vaah kabhi success nahi kar paate bhi hai toh mushkil se milte hain ya sahi time par nahi milte hain toh isliye emotional fool banna nahi hai kyonki emotional fool banne se apne collection par jaoge aur jo baat rahi motion attachment hai lekin usko positive positive direction ya apni beti ko pyar karte hain ek emotion bonding rehte hain lekin maali ji ke bacche ka umar 2 saal 28 saal ki hai papa bhaiya mummy office jaane ke samay aa gaya hai agar papa mummy ko lage ki nahi main mujhe iske saath aur 5 minute aur 10 minute aana hai kyonki jin par mujhe yah dekhne ko nahi milega toh wahan par laxmi ji vo toh 10 minute hai vaah 10 minute me baccho ke shirt thoda time spend karega toh office aane me deri hogi phir abhi asli apne boss ki taraf se ho ya jo bhi ho office ka jo maahaul hai jo roshan regulation hai usme bhi kya hoga 10 15 minute ka late ho jaega phir baad me productivity me bhi aane pahunchaega toh isliye un chijon ko dekhna samajhna zaroori hai ab sahi time par office se aap office ke liye ghar se bahar nikle lekin yah bhi dhyan rakhen ki aapke ghar walon ki surakshit rahein kyonki vaah aapke saath ek emotionally attach hai bus thank you dhanyavad

इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए जैसे दोस्तों इमोशन कोई खराब नहीं हुआ वह अच्छा है लेकिन आपक

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Jyotish Daiya

Chairman At Vijyam Classes, Motivator and Life Coach

3:02
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तो आपका प्रश्न है कि इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए घोषणा अटैचमेंट का मतलब है भावनात्मक रूप से जुड़ा भावनात्मक रूप से जुड़ाव को रोकने के लिए क्या करें ताकि लोगों से सुना होगा अपनी भावनाओं को काबू में रखें पर कैसे यह कोई नहीं पता था चलो आज मैं आपको बताता हूं कि भावनाओं को काबू में कैसे रखें भावनाओं को काबू में रखने के लिए आप को एकाग्र होना होता है क्यों क्योंकि यह मन हमारा मन जो है वह निरंतर विचारों की धड़कन में रहता है निरंतर नए-नए विचार उत्पन्न करता है और विचार उत्पन्न करते करते करते करते आपकी बुद्धि को भ्रमित कर देता है आपको इमोशनल कर देता है आपको उन भावनाओं में बहा देता है जो आपके पसंद की है आप दिल से लगाओ करते हैं आपसे से गुस्सा करते हैं आपका कोई भी इमोशनल अटैचमेंट जचता है उसके प्रति आपको विचारों से गलत कर देते हैं आपका मस्तिष्क को विवाद में फंसा देते हैं आपके मन का यही कार्य है इससे बचने के लिए आपको एकाग्र होना जरूरी है मन को ई-मेल आना जरूरी है और उसकी सबसे बेहतरीन विधि जो क्या तक हुई गई है ध्यान ध्यान ध्यान करके मेडिटेशन करके योग करके आप अपने मस्तिष्क को इतना एकाग्र कर सकते हैं कि आप जो सोचेंगे आप फ्री करेंगे आप मन की बातों में नहीं आएंगे आप होना में नहीं रहेंगे मैं आपको नहीं कह रहा कि आप कौन हो सही हो जाओ बिल्कुल इमोशनल मत हो ऐसा नहीं कह रहा लेकिन इमोशनल अटैचमेंट से बचने के लिए आपको योगा करना चाहिए आपको ध्यान करना चाहिए क्या मेडिटेशन योगा करने पर एक और मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ रहेंगे और एकाग्र रहेंगे एकदम कंसंट्रेट रहेंगे आपको कार्य करेंगे जो आप करना चाहते हैं आप बताएंगे तो सोचा चाहते हैं आपकी नहीं विचारों के जाल में फंस एंगे जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे तरक्की प्राप्त करेंगे क्यों क्योंकि अगर कोई व्यक्ति कंप्यूटर इमोशनल लेता है तो उसे कई सारे नुकसान उठाने पड़ सकते हैं अपनी जिंदगी में स्थिति को बेहतर बनाए योगा करें और एक और बात आज से अकेला ज्यादा पानी पीना शुरू करें कि आपको बेहतर हाइड्रेशन में मदद करेगा शरीर में पानी की अच्छी मात्रा बहुत सारी सच्चाई आपके दिमाग को शांत रखने में मदद करेगी बेतरायल के लिए अपने रूटीन में वॉकिंग एनएससी वगैरह शामिल करें युवा करें ध्यान करें आप बेहतरीन हो गए और दूसरों को भी बेहतर बनाएंगे थैंक यू सो मच बहुत धन्यवाद आपका

toh aapka prashna hai ki emotional attachment se kaise bacha jaaye ghoshana attachment ka matlab hai bhavnatmak roop se juda bhavnatmak roop se judav ko rokne ke liye kya kare taki logo se suna hoga apni bhavnao ko kabu me rakhen par kaise yah koi nahi pata tha chalo aaj main aapko batata hoon ki bhavnao ko kabu me kaise rakhen bhavnao ko kabu me rakhne ke liye aap ko ekagra hona hota hai kyon kyonki yah man hamara man jo hai vaah nirantar vicharon ki dhadkan me rehta hai nirantar naye naye vichar utpann karta hai aur vichar utpann karte karte karte karte aapki buddhi ko bharmit kar deta hai aapko emotional kar deta hai aapko un bhavnao me baha deta hai jo aapke pasand ki hai aap dil se lagao karte hain aapse se gussa karte hain aapka koi bhi emotional attachment jachata hai uske prati aapko vicharon se galat kar dete hain aapka mastishk ko vivaad me fansa dete hain aapke man ka yahi karya hai isse bachne ke liye aapko ekagra hona zaroori hai man ko E male aana zaroori hai aur uski sabse behtareen vidhi jo kya tak hui gayi hai dhyan dhyan dhyan karke meditation karke yog karke aap apne mastishk ko itna ekagra kar sakte hain ki aap jo sochenge aap free karenge aap man ki baaton me nahi aayenge aap hona me nahi rahenge main aapko nahi keh raha ki aap kaun ho sahi ho jao bilkul emotional mat ho aisa nahi keh raha lekin emotional attachment se bachne ke liye aapko yoga karna chahiye aapko dhyan karna chahiye kya meditation yoga karne par ek aur mansik dono roop se swasth rahenge aur ekagra rahenge ekdam concentrate rahenge aapko karya karenge jo aap karna chahte hain aap batayenge toh socha chahte hain aapki nahi vicharon ke jaal me fans enge jeevan me safalta prapt karenge tarakki prapt karenge kyon kyonki agar koi vyakti computer emotional leta hai toh use kai saare nuksan uthane pad sakte hain apni zindagi me sthiti ko behtar banaye yoga kare aur ek aur baat aaj se akela zyada paani peena shuru kare ki aapko behtar haidreshan me madad karega sharir me paani ki achi matra bahut saari sacchai aapke dimag ko shaant rakhne me madad karegi betrayal ke liye apne routine me walking NSC vagera shaamil kare yuva kare dhyan kare aap behtareen ho gaye aur dusro ko bhi behtar banayenge thank you so match bahut dhanyavad aapka

तो आपका प्रश्न है कि इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए घोषणा अटैचमेंट का मतलब है भावनात्मक र

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Pramodan swami (PK.VERMAN)

Prem Hi Dharm Hai Premi Karm Hi Prem Hi Safar

1:10
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आपने पूछा ही इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए आप उस व्यक्ति से इमोशनल अटैचमेंट से नहीं बच सकते जो निस्वार्थ भाव से निर्दोष भाव से आपसे प्रेम करता है बिना किसी कारण और बिना किसी भाव के आपकी बांहों से जुड़ा रहते हैं सिर्फ यह हुई उसे आपके साथ जुड़ी में आनंद आता है उसके इमोशनल अटैचमेंट से आप कितना भी बचाए लेकिन नहीं बच पाएंगे लेकिन हाथ जो सिर्फ दिखावा करता है और आपके मुंह पर आपकी बात है और ऐसा सब करता है उसे आपका इमोशनल अटैचमेंट हो ही नहीं सकता आपको टूटकर चाहेगा अब उसी इमोशनल अटैचमेंट से नहीं बच सकते हो ही जाएगा चाहे वह गलती से क्यों ना हो

aapne poocha hi emotional attachment se kaise bacha jaaye aap us vyakti se emotional attachment se nahi bach sakte jo niswarth bhav se nirdosh bhav se aapse prem karta hai bina kisi karan aur bina kisi bhav ke aapki banhon se juda rehte hain sirf yah hui use aapke saath judi me anand aata hai uske emotional attachment se aap kitna bhi bachaye lekin nahi bach payenge lekin hath jo sirf dikhawa karta hai aur aapke mooh par aapki baat hai aur aisa sab karta hai use aapka emotional attachment ho hi nahi sakta aapko tutkar chahega ab usi emotional attachment se nahi bach sakte ho hi jaega chahen vaah galti se kyon na ho

आपने पूछा ही इमोशनल अटैचमेंट से कैसे बचा जाए आप उस व्यक्ति से इमोशनल अटैचमेंट से नहीं बच स

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Aashik

As a Social Server.

0:46
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हेलो दोस्तों अगर आपको इमोशनल अटैचमेंट केवल वही इंसान कर सकता है जिसको आप इमोशनली मतलब जिससे आप इमोशनल जुड़े हुए हैं क्योंकि अगर आप उनसे अच्छे ढंग से जुड़े हैं इसीलिए आपको उस इमोशनल का एहसास हो है उसको फीलिंग हो रहा है और जो भी बातें कर रहे हैं उसका आप का इफेक्ट हो रहा है आप उसे प्रभावित हो रही तभी तो आप अटैचमेंट यहां अगर आप आप किसी को जानते नहीं हैं तो आप कितना भी इमोशनल अटैक में हो या फिर किसी भी प्रकार का हो आपको कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला लेकिन वह आपका करीबी है इसकी आपको फर्क पड़ेगा आपके ऊपर डिपेंड करता है कि आई मिस यू इमोशनल अटैचमेंट है वह सही है यह नहीं है कि आप पर डिपेंड है तो आप सोच सकते हैं कि वो कैसा है थैंक यू

hello doston agar aapko emotional attachment keval wahi insaan kar sakta hai jisko aap emotionally matlab jisse aap emotional jude hue hain kyonki agar aap unse acche dhang se jude hain isliye aapko us emotional ka ehsaas ho hai usko feeling ho raha hai aur jo bhi batein kar rahe hain uska aap ka effect ho raha hai aap use prabhavit ho rahi tabhi toh aap attachment yahan agar aap aap kisi ko jante nahi hain toh aap kitna bhi emotional attack mein ho ya phir kisi bhi prakar ka ho aapko kuch fark nahi padane vala lekin vaah aapka karibi hai iski aapko fark padega aapke upar depend karta hai ki I miss you emotional attachment hai vaah sahi hai yah nahi hai ki aap par depend hai toh aap soch sakte hain ki vo kaisa hai thank you

हेलो दोस्तों अगर आपको इमोशनल अटैचमेंट केवल वही इंसान कर सकता है जिसको आप इमोशनली मतलब जिसस

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