योगियों ने हिमालय में रहना क्यों चुना?...


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देखिए हिमालय में तरह-तरह की जड़ी बूटियों वहां का जो प्राकृतिक दृश्य होता है एक तो बहुत सुंदर होता है वह अध्यात्म के लिए प्रेरणा देता है मा तारे तारे की जड़ी बूटी पेड़ पौधे मिलते हैं उसके लिए उनको अन्य की आवश्यकता नहीं पड़ती जीवन जीने के लिए उन शक्तियों और जड़ी बूटियों का ग्रहण करते हैं और इसके बाद सारा जीवन में अध्यात्म में लगाते हैं ईश्वर दर्शन उनका क्योंकि मुख्य है वह इतने अध्यात्म के मतलब का आंतरिक नरसिंहपुर जाते हैं कि उनको न तो सादगी लगती है ना ही गर्मी लगती है केवल अध्यात्म और ईश्वर में इतने लीन हो जाते हैं कि उनका शरीर केवल ईश्वर में हो जाता है उनकी आत्मा ईश्वर में विलुप्त हो जाती है और वह कितना तपस्या करते हैं कि उनको अपने शरीर का सुध बुध कहो इतने कहते हैं ना कि भोजन बतासा अर्जुन रहे कछु को पवासा भोजन पेड़ पत्ते कुछ दिन केवल इस्तेमाल कितने में शरीर चल जाए इसके बाद वह इतने ज्ञानी हो जाते हैं और इतना शक्तिशाली उनका मन अध्यात्म की ओर हो जाता है प्रणब के द्वारा कई महीनों तक विश्वास को रोककर के समाधि किस देश में रहते हैं और अपने जीवन को बचाए रखें और परमात्मा में लीन रहते हैं और जीवन जीने की कला को भी करके तभी मतलब उन्होंने उस स्थान को चुना है

dekhiye himalaya me tarah tarah ki jadi butiyon wahan ka jo prakirtik drishya hota hai ek toh bahut sundar hota hai vaah adhyaatm ke liye prerna deta hai ma taare taare ki jadi buti ped paudhe milte hain uske liye unko anya ki avashyakta nahi padti jeevan jeene ke liye un shaktiyon aur jadi butiyon ka grahan karte hain aur iske baad saara jeevan me adhyaatm me lagate hain ishwar darshan unka kyonki mukhya hai vaah itne adhyaatm ke matlab ka aantarik narsinghpur jaate hain ki unko na toh saadgi lagti hai na hi garmi lagti hai keval adhyaatm aur ishwar me itne Lean ho jaate hain ki unka sharir keval ishwar me ho jata hai unki aatma ishwar me vilupt ho jaati hai aur vaah kitna tapasya karte hain ki unko apne sharir ka sudh buddha kaho itne kehte hain na ki bhojan batasa arjun rahe kachu ko pavasa bhojan ped patte kuch din keval istemal kitne me sharir chal jaaye iske baad vaah itne gyani ho jaate hain aur itna shaktishali unka man adhyaatm ki aur ho jata hai pranab ke dwara kai mahinon tak vishwas ko rokakar ke samadhi kis desh me rehte hain aur apne jeevan ko bachaye rakhen aur paramatma me Lean rehte hain aur jeevan jeene ki kala ko bhi karke tabhi matlab unhone us sthan ko chuna hai

देखिए हिमालय में तरह-तरह की जड़ी बूटियों वहां का जो प्राकृतिक दृश्य होता है एक तो बहुत सुं

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Siyaram Dubey

YouTuber/Spiritual Person/Thinker/Social-media Activist

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Rajesh Kumar Pandey

Career Counsellor

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हमारे यहां मलय पर्वत में कैसा पर्वत है जो हमें मिलेगा ना करें और आबादी नहीं आया पानी की भी सुविधा है जंगल है पर पेड़ पौधे हैं बच्चे खुश हुआ है और हर चीज से बनता है उनके लिए वहां पर इसलिए हमारे पसंद करते हैं असाइनमेंट है शांति है आध्यात्मिक रूप से भी वहां पर भगवान शंकर से लेकर बहुत से लोग हिमालय पर चमका जुड़ा हो रहा है इसलिए गुरु बिना माला पोतम को बंद कर दो भाग में सपोर्ट है जहां पर आप ऐसा काम हो सकते हैं बाकी के अंदर है कोई पर देख लीजिए बढ़िया बच्चे खराब है

hamare yahan malya parvat me kaisa parvat hai jo hamein milega na kare aur aabadi nahi aaya paani ki bhi suvidha hai jungle hai par ped paudhe hain bacche khush hua hai aur har cheez se banta hai unke liye wahan par isliye hamare pasand karte hain assignment hai shanti hai aadhyatmik roop se bhi wahan par bhagwan shankar se lekar bahut se log himalaya par chamaka juda ho raha hai isliye guru bina mala potam ko band kar do bhag me support hai jaha par aap aisa kaam ho sakte hain baki ke andar hai koi par dekh lijiye badhiya bacche kharab hai

हमारे यहां मलय पर्वत में कैसा पर्वत है जो हमें मिलेगा ना करें और आबादी नहीं आया पानी की भी

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Jitendra Singh

Social Worker

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योगियों को हिमालय में रहना क्यों चुना क्योंकि अगर आदमी अपने घर में रहता है तो घर में उसके सामने अनेक प्रकार के परिवार के कार्य सामने रहते हैं वह अपने मन को एकाग्र नहीं कर पाता तो घर से दूर अपनों से दूर हिमालय में ही क्यों जाना चाहते हैं क्योंकि वहां के शुद्ध हवा और शुद्ध जल मन को एकाग्र करने में शतक सहायक होते हिमालय में प्रदूषण बिल्कुल नहीं है शोर-शराबा ध्वनि प्रदूषण वगैरह कुछ भी नहीं है वहां जब आदमी रहने लगता है और ध्यान मग्न हो जाता है तो वहां की वायु और जल दोनों इतने शक्तिशाली हैं कि उसके जीव के मन को प्रबल बना देते हैं जिससे ध्यान और योग करने में उसको सहायता में शक्ति और उसका चित्त एकाग्र हो जाता एकता ग्रुप होने से ही ध्यान लग जाता है और वह अपने अनंत शक्तियों को जान जाता अपने सातों चक्रों को वह उनसे उज्जवल अन्यथा इस प्रकार से यह कार्य वही हिमालय में रहकर करके एकांतवास में जहां कोई ना एकांत पैसे किसको जहां एक का भी अंत होता है जहां एक भी विचार एक ब्याव सत्ता एक का अंत हो जाना ही एकांत है एकांत में बहुत बड़ा तत्व है कोई विचार नहीं एक कोई इच्छा नहीं एक कोई उनकी आवश्यकता नहीं अपने को बिल्कुल इच्छाओं से रहित कर करके कभी अंत करके उसमें आदमी डर लग जाता है तो मन और चित्त एकाग्र हो जाते हैं और उनको योग साधना में महारत हासिल होता है इसीलिए लोग हिमालय पर योग साधना करने जाते हैं धन्यवाद

yogiyon ko himalaya me rehna kyon chuna kyonki agar aadmi apne ghar me rehta hai toh ghar me uske saamne anek prakar ke parivar ke karya saamne rehte hain vaah apne man ko ekagra nahi kar pata toh ghar se dur apnon se dur himalaya me hi kyon jana chahte hain kyonki wahan ke shudh hawa aur shudh jal man ko ekagra karne me shatak sahayak hote himalaya me pradushan bilkul nahi hai shor sharaba dhwani pradushan vagera kuch bhi nahi hai wahan jab aadmi rehne lagta hai aur dhyan magn ho jata hai toh wahan ki vayu aur jal dono itne shaktishali hain ki uske jeev ke man ko prabal bana dete hain jisse dhyan aur yog karne me usko sahayta me shakti aur uska chitt ekagra ho jata ekta group hone se hi dhyan lag jata hai aur vaah apne anant shaktiyon ko jaan jata apne saton chakron ko vaah unse ujjawal anyatha is prakar se yah karya wahi himalaya me rahkar karke ekantavas me jaha koi na ekant paise kisko jaha ek ka bhi ant hota hai jaha ek bhi vichar ek byav satta ek ka ant ho jana hi ekant hai ekant me bahut bada tatva hai koi vichar nahi ek koi iccha nahi ek koi unki avashyakta nahi apne ko bilkul ikchao se rahit kar karke kabhi ant karke usme aadmi dar lag jata hai toh man aur chitt ekagra ho jaate hain aur unko yog sadhna me maharat hasil hota hai isliye log himalaya par yog sadhna karne jaate hain dhanyavad

योगियों को हिमालय में रहना क्यों चुना क्योंकि अगर आदमी अपने घर में रहता है तो घर में उसके

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सुरेश चंद आचार्य

Social Worker ( Self employed )

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नमस्कार दोस्तों पुरातन काल में हिमालय अति दुर्गम क्षेत्र था जहां पर दूर-दूर तक मनुष्यों का होना ही असंभव था और हिमालय में ऐसे दुर्गम स्थान है उपाय हैं नदियां पहाड़ वहां का जलवायु स्तर पर है कि वहां पर मनुष्य मात्र का जाना कठिन था इसलिए योगी तपस्वी ऐसे स्थान को चुनते थे जहां पर उन्हें कोई याद ना आए

namaskar doston puratan kaal me himalaya ati durgam kshetra tha jaha par dur dur tak manushyo ka hona hi asambhav tha aur himalaya me aise durgam sthan hai upay hain nadiyan pahad wahan ka jalvayu sthar par hai ki wahan par manushya matra ka jana kathin tha isliye yogi tapaswi aise sthan ko chunte the jaha par unhe koi yaad na aaye

नमस्कार दोस्तों पुरातन काल में हिमालय अति दुर्गम क्षेत्र था जहां पर दूर-दूर तक मनुष्यों का

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Loan Guru

Financial Expert

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आपको जो उसने बहुत सही है योगियों ने हिमालय में रहने की सूचना कैप्सूल का होता है कि समाज होती समाज में हम लोगों के जो विचार होते हम लोगों के जो दिल्ली की जो पिया करम होते हैं वह काफी डिफरेंट होते हैं और योगी चाहता हुए कहा जाता है कि क्योंकि आप भी जानते हैं अगर आपको सपोर्ट किसी वृक्ष को खड़ा करना है तो हम लोग क्या करते हुए चारों तरफ कुछ लगा देते हैं जिससे उनको छेड़छाड़ ना करें लकड़ी करा देते हैं कुछ उतार में शंकर जी श्री कृष्ण कोई उंगली ना करें बार-बार इसी प्रकार से महात्मा भी एकांत में रहना पसंद करते हैं कि उनसे कोई छेड़छाड़ ना करें और वह एक आत्मा परमात्मा में लीन हो सके इसलिए नहीं मालूम

aapko jo usne bahut sahi hai yogiyon ne himalaya me rehne ki soochna capsule ka hota hai ki samaj hoti samaj me hum logo ke jo vichar hote hum logo ke jo delhi ki jo piya karam hote hain vaah kaafi different hote hain aur yogi chahta hue kaha jata hai ki kyonki aap bhi jante hain agar aapko support kisi vriksh ko khada karna hai toh hum log kya karte hue charo taraf kuch laga dete hain jisse unko chedchad na kare lakdi kara dete hain kuch utar me shankar ji shri krishna koi ungli na kare baar baar isi prakar se mahatma bhi ekant me rehna pasand karte hain ki unse koi chedchad na kare aur vaah ek aatma paramatma me Lean ho sake isliye nahi maloom

आपको जो उसने बहुत सही है योगियों ने हिमालय में रहने की सूचना कैप्सूल का होता है कि समाज हो

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mohit

8307747204 Founder Abhyasa Yogshala

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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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हिमालय की भूमि होती है वह ध्यान और साधना योग इन सब के लिए उपयुक्त होती है हिमालय की ओर होती है इनकी मात्रा अधिक होती और वहां पर शोर शराबा बिल्कुल कम होता है और अनेक औषधीय पाई जाती है तो योगी हिमालया पर पीपर भीड़ भाड़ एपिसोड शराबा ऐसा बहुत ज्यादा होता है तो इससे माहौल में उनका योग करना मुश्किल हो जाता है जो कि दुनिया सेट कर के अंदर देखना होता है उनको शांति जैसी कोई जगह सही होती है तो 4 किलोमीटर 5 किलोमीटर ऊपर हिमालय आयोग के लिए और साधना के लिए उपयुक्त जगह है

himalaya ki bhoomi hoti hai vaah dhyan aur sadhna yog in sab ke liye upyukt hoti hai himalaya ki aur hoti hai inki matra adhik hoti aur wahan par shor sharaba bilkul kam hota hai aur anek aushadhiye payi jaati hai toh yogi himalaya par pipar bheed bhad episode sharaba aisa bahut zyada hota hai toh isse maahaul mein unka yog karna mushkil ho jata hai jo ki duniya set kar ke andar dekhna hota hai unko shanti jaisi koi jagah sahi hoti hai toh 4 kilometre 5 kilometre upar himalaya aayog ke liye aur sadhna ke liye upyukt jagah hai

हिमालय की भूमि होती है वह ध्यान और साधना योग इन सब के लिए उपयुक्त होती है हिमालय की ओर होत

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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हिमालय में रहना क्यों चुना क्योंकि वहां पर जब हिमालय में होते तो पॉजिटिव वाइब्रेशन रहता है साथ ही साथ में रह सकते बातचीत कर सकते हैं और खुद का फैमिली होता है उनसे दूर रहते और चीजों से दूर रहते तो हिमालय और उनसे वहां उनकी तपस्या भी अच्छी होती है और घर में सब सही है

himalaya mein rehna kyon chuna kyonki wahan par jab himalaya mein hote toh positive vibration rehta hai saath hi saath mein reh sakte batchit kar sakte hain aur khud ka family hota hai unse dur rehte aur chijon se dur rehte toh himalaya aur unse wahan unki tapasya bhi achi hoti hai aur ghar mein sab sahi hai

हिमालय में रहना क्यों चुना क्योंकि वहां पर जब हिमालय में होते तो पॉजिटिव वाइब्रेशन रहता है

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M S Aditya Pandit

Entrepreneur | Politician

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कि कि वहां प्रकृति का वातावरण तथा उनके अनुकूल है वहां पर चारों तरफ पानी है झाड़ है अकाउंट है और हर मोह से दूर है इंसानों की दुआ पहुंच से दूर है जिसके लिए वहां का मौत से उनके अनुकूल है इसलिए वहां रहते हैं

ki ki wahan prakriti ka vatavaran tatha unke anukul hai wahan par charo taraf paani hai jhad hai account hai aur har moh se dur hai insano ki dua pohch se dur hai jiske liye wahan ka maut se unke anukul hai isliye wahan rehte hain

कि कि वहां प्रकृति का वातावरण तथा उनके अनुकूल है वहां पर चारों तरफ पानी है झाड़ है अकाउंट

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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हमारे देश के योग्य नहीं बल्कि विदेशी योगी भी हिमालय में रहने के लिए वह जगह हिस्ट्री चुनते हैं क्योंकि वहां पर उनको देवी शांति का एहसास होता है वहां पर गिरीकंद राहों में अलग-अलग जगह पर बहुत ही अच्छी अच्छी वनस्पतियां होती है उनका भी उनको ज्ञान मिलता है वहां पर नदियों का बिल्कुल स्वच्छ पानी उपलब्ध और ऐसी जगह पर जाकर ठंडी का जो प्रभाव जो हमारे शरीर पर पड़ता है तो शक्ति जो सेंकंटेंट जो आदमी की होती है योगियों की वह उसमें उसकी परीक्षा हो जाती है जब एकदम शांति निराकार जगह पर बैठते हैं तो समाधि अस्थल इसको बोलते तो वह समाधि लगाने पर हम अपनी आत्मा से मिलन कर सकते हैं हम अपनी आत्मा से बातें कर सकते हैं और उस से मानसिक शांति बहुत ही अच्छी मिलती है और यह सब तो सीलिंग करने की अनुभव लेने की बात है हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी वह भी अभी गए हुए थे केदारनाथ और वहां पर ध्यान दिखा दो है बनाएंगे उसमें उन्होंने एक रात की थी और अपने आप से बात किया इसके अलावा जो प्रधानमंत्री बनने के पहले केदारनाथ में रह चुके हैं और यह सब देगी और अनुभूति का अनुभव हुआ है बहुत ही वहां पर ऐसे ही साधु सन्यासी और ज्ञानी लोगों का परिचय भी होता है और उसे अपनी आत्मशक्ति मन की सूची और ज्ञान की सूची और ज्ञान की अभिवृद्धि यह सभी चीजें वहां पर उपलब्ध हैं जो कि समय मिलने पर हमें भी इसका लाभ लेना चाहिए धन्यवाद

hamare desh ke yogya nahi balki videshi yogi bhi himalaya mein rehne ke liye vaah jagah history chunte hain kyonki wahan par unko devi shanti ka ehsaas hota hai wahan par girikand rahon mein alag alag jagah par bahut hi achi achi vanaspatiyan hoti hai unka bhi unko gyaan milta hai wahan par nadiyon ka bilkul swachh paani uplabdh aur aisi jagah par jaakar thandi ka jo prabhav jo hamare sharir par padta hai toh shakti jo senkantent jo aadmi ki hoti hai yogiyon ki vaah usme uski pariksha ho jaati hai jab ekdam shanti nirakaar jagah par baithate hain toh samadhi asthal isko bolte toh vaah samadhi lagane par hum apni aatma se milan kar sakte hain hum apni aatma se batein kar sakte hain aur us se mansik shanti bahut hi achi milti hai aur yah sab toh ceiling karne ki anubhav lene ki baat hai hamare mananiya pradhanmantri ji vaah bhi abhi gaye hue the kedarnath aur wahan par dhyan dikha do hai banayenge usme unhone ek raat ki thi aur apne aap se baat kiya iske alava jo pradhanmantri banne ke pehle kedarnath mein reh chuke hain aur yah sab degi aur anubhuti ka anubhav hua hai bahut hi wahan par aise hi sadhu sanyaasi aur gyani logo ka parichay bhi hota hai aur use apni atmashakti man ki suchi aur gyaan ki suchi aur gyaan ki abhivriddhi yah sabhi cheezen wahan par uplabdh hain jo ki samay milne par hamein bhi iska labh lena chahiye dhanyavad

हमारे देश के योग्य नहीं बल्कि विदेशी योगी भी हिमालय में रहने के लिए वह जगह हिस्ट्री चुनते

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Harish Chand

Social Worker

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योग्य ने हिमालय में रहना क्यों चुना आपका प्रश्न सही तो मित्र मेरे दोस्त एक चीज होता हूं कि योगी जो होते हैं उनको सांसारिक चीजों से कुछ लेना-देना नहीं होता है और अनादि काल से जो हिमालय पर्वत है वह साधना का मुख्य केंद्र रहा है और रहेगा इसलिए योगी हमेशा हिमालय में रहना पसंद करते जय हिंद

yogya ne himalaya mein rehna kyon chuna aapka prashna sahi toh mitra mere dost ek cheez hota hoon ki yogi jo hote hain unko sansarik chijon se kuch lena dena nahi hota hai aur anadi kaal se jo himalaya parvat hai vaah sadhna ka mukhya kendra raha hai aur rahega isliye yogi hamesha himalaya mein rehna pasand karte jai hind

योग्य ने हिमालय में रहना क्यों चुना आपका प्रश्न सही तो मित्र मेरे दोस्त एक चीज होता हूं कि

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योगियों ने हिमालय में लड़ाई क्यों होता है यह आपको रोक पकड़ती है कैसी है उतनी आपसे कल कौन सा अक्षर होता है और पहाड़ों पर कब हो रहा है समझा जाता है जैसे जैसे आप तो चाय पी जाते जाओगे तो कुर्ता क्षेत्र आएगा सजना भी करनी होती तो अपने को अगर आप और कुछ नहीं करो कोई पेड़ बड़ा पेड़ पर चढ़कर ज्यादा करो तो बात ही की है क्योंकि को सबसे कम हो जाते

yogiyon ne himalaya mein ladai kyon hota hai yah aapko rok pakadti hai kaisi hai utani aapse kal kaun sa akshar hota hai aur pahadon par kab ho raha hai samjha jata hai jaise jaise aap toh chai p jaate jaoge toh kurta kshetra aayega sajna bhi karni hoti toh apne ko agar aap aur kuch nahi karo koi ped bada ped par chadhakar zyada karo toh baat hi ki hai kyonki ko sabse kam ho jaate

योगियों ने हिमालय में लड़ाई क्यों होता है यह आपको रोक पकड़ती है कैसी है उतनी आपसे कल कौन स

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हिमालय साधना का स्थल है इसलिए योगियों ने हिमालय में रहकर साधना करना उपयुक्त समझा और वह शिव का स्थान है आत्महत्या जल्दी प्राप्त होती है मां शांति है वह अच्छे से साधना की जा सकती है इसलिए लोगों ने हिमालयन हकीकत राहों में रहकर साधना की और उसे चुना

himalaya sadhna ka sthal hai isliye yogiyon ne himalaya me rahkar sadhna karna upyukt samjha aur vaah shiv ka sthan hai atmahatya jaldi prapt hoti hai maa shanti hai vaah acche se sadhna ki ja sakti hai isliye logo ne himalayan haqiqat rahon me rahkar sadhna ki aur use chuna

हिमालय साधना का स्थल है इसलिए योगियों ने हिमालय में रहकर साधना करना उपयुक्त समझा और वह शिव

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Anupam Trivedi

Social Worker

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योगियों ने हिमालय पर रहने का एक खास मकसद था वहां की शांत वातावरण वहां का शांत माहौल कंदगांव में उनको जो है एक शांति का अनुभव होता था वह वहां उन्हें कोई डिस्टर्ब नहीं करता था आराम से वह और वहां का मौसम

yogiyon ne himalaya par rehne ka ek khas maksad tha wahan ki shaant vatavaran wahan ka shaant maahaul kandaganv me unko jo hai ek shanti ka anubhav hota tha vaah wahan unhe koi disturb nahi karta tha aaram se vaah aur wahan ka mausam

योगियों ने हिमालय पर रहने का एक खास मकसद था वहां की शांत वातावरण वहां का शांत माहौल कंदगां

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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

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सभी देशवासियों और वो कलेक्ट यूजर्स को मेरा प्रणाम आप लोगों ने जानना चाहा है योगियों ने हिमालय में रहना क्यों चुना लोगों ने मामले में रहने की इसलिए चुना है इसके दो कारण हैं पहला तो वहां एकांत होता है ध्यान केंद्रित करने में योग करने में किसी प्रकार का डिस्टरबेंस नहीं होता है दूसरा वहां सांसारिक मोह माया से दूर रहकर के लोग योग करते हैं तो उनका मन माया रुपी संसार में भटकने नहीं वहां प्रेशर से फल-फूल कंदमूल खाकर ही शक्ति अर्जित करते हैं और उस तारीख ब्लू का उपयोग योग ध्यान करने में समर्थ करते हैं जिससे उनको अदृश्य शक्तियों अखियां प्राप्त होती है धन्यवाद

sabhi deshvasiyon aur vo collect users ko mera pranam aap logo ne janana chaha hai yogiyon ne himalaya me rehna kyon chuna logo ne mamle me rehne ki isliye chuna hai iske do karan hain pehla toh wahan ekant hota hai dhyan kendrit karne me yog karne me kisi prakar ka distarabens nahi hota hai doosra wahan sansarik moh maya se dur rahkar ke log yog karte hain toh unka man maya rupee sansar me bhatakne nahi wahan pressure se fal fool kandamul khakar hi shakti arjit karte hain aur us tarikh blue ka upyog yog dhyan karne me samarth karte hain jisse unko adrishya shaktiyon akhiyan prapt hoti hai dhanyavad

सभी देशवासियों और वो कलेक्ट यूजर्स को मेरा प्रणाम आप लोगों ने जानना चाहा है योगियों ने हिम

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Ramandeep Singh

Waheguru industry

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देखिए जो जो भी है यह जो भी हैं उन्होंने सिर्फ अपने सुख के लिए हिमालय में रहना शुरू किया क्या कि जो रिद्धि है जो सिद्धि है सिर्फ हमको मिल जाए हम उसकी ओर चल पड़े हमको परमात्मा मिल जाए दुनियादारी के ऐसी तैसी दुनियादारी को क्या लेना देना इन्होंने इसलिए एक एकांत चुन लिया और लगे पूजा करने विधियां सिद्धियां मिल गई यह हो गया वह हो गया बहुत कुछ हो गया अपनी सृष्टि को चलाने के लिए उन्होंने शादियां तक नहीं की तो दोस्तों जो जो भी है इंसान को ऐसा जो भी कभी नहीं बनना चाहिए जोगी का मतलब होता है जोड़ने वाला जोगी का मतलब होता है वह इंसान जो गलत को सही को एक जगह पर जोड़ दे शेर को गाय को एक जगह पर बांधे जो भी का मतलब होता है और धर्म ग्रंथ को बांधे हर चीज को एक जगह पर झुक कर दे उसको जो भी दूरियां सिद्धियों को करने गया है उसको जोगी काहे का जोगी वह वह फिर इन रिधि सिद्धियों में ऐसा उलझ जाता है ऐसा उलझ जाता है एकांत में रह रहा है कि ऐसा हो जाता है कि मरने के बाद वह भूत प्रेत भर के उधर घूमता रहता है कि किसी काम का नहीं गुरु गोविंद सिंह जी के टाइम पर बाबा जो बंदा सिंह बहादुर थे वह पहले एक जोगी अर्थात रिद्धि अशुद्धियों के मालिक थे वह किसी को भी कैसे मर्जी घुमा सकते इतनी उनके अंदर मंत्रों की शक्ति थी लेकिन क्या हुआ गुरु गोविंद सिंह जी ने उनको सत्य का मार्ग बताया कि जो भी बनने का मतलब यह नहीं कि तुम मंत्रों अंतरों को सिद्ध करके लोगों के ऊपर जमाने लग जाए क्या फायदा तेरा तू इस दुनिया में रहे एकांत में नहीं इस दुनिया में रहकर इस दुनिया की सेवा कर इतने लोग बेचारे परेशान हैं इतने भूखे मर रहे हैं उनकी सेवा कर इतने लोग एक दूसरे के ऊपर मचा रहे हैं उनको देख सच्चाई को दे कहां तो हिमालय पर चढ़कर जोगी बनकर घूम रहा है जोगी का मतलब है इस दुनिया में रहना है जो भी करना है ऐसा जो करना है कि हर परिवार हर घर हर देश सुख शांति से रहना शुरू हो जाए और प्रभु चरणों में जुड़ जाए जो प्रभु के चरणों में जोड़ता है वही जो भी है जो हिमालय के साथ जोड़ता है ऐसे जोगी सिर्फ भूत प्रेत हैं और कुछ भी नहीं मरने के बाद यह वहीं पर ही घूमते रहेंगे क्यों अपने दीदी सिद्धियों के मामले में फंसे रहेंगे हम तो बहुत बड़े भगवान बन गए कमरे को घमंड भी हो जाता है वैसे जोगी नहीं चाहिए हमें वह जोगी चाहिए जो इस संसार की सेवा करें वह जो भी चाहिए जो इस संसार को एक डोर में बांधकर सब की लड़ाई को खत्म कर दूं जोगी हमें चाहिए धन्यवाद

dekhiye jo jo bhi hai yah jo bhi hain unhone sirf apne sukh ke liye himalaya me rehna shuru kiya kya ki jo riddhi hai jo siddhi hai sirf hamko mil jaaye hum uski aur chal pade hamko paramatma mil jaaye duniyaadaari ke aisi taisi duniyaadaari ko kya lena dena inhone isliye ek ekant chun liya aur lage puja karne vidhiyan siddhiyan mil gayi yah ho gaya vaah ho gaya bahut kuch ho gaya apni shrishti ko chalane ke liye unhone shadiyan tak nahi ki toh doston jo jo bhi hai insaan ko aisa jo bhi kabhi nahi banna chahiye jogi ka matlab hota hai jodne vala jogi ka matlab hota hai vaah insaan jo galat ko sahi ko ek jagah par jod de sher ko gaay ko ek jagah par bandhe jo bhi ka matlab hota hai aur dharm granth ko bandhe har cheez ko ek jagah par jhuk kar de usko jo bhi duriyan siddhiyon ko karne gaya hai usko jogi kaahe ka jogi vaah vaah phir in ridhi siddhiyon me aisa ulajh jata hai aisa ulajh jata hai ekant me reh raha hai ki aisa ho jata hai ki marne ke baad vaah bhoot pret bhar ke udhar ghoomta rehta hai ki kisi kaam ka nahi guru govind Singh ji ke time par baba jo banda Singh bahadur the vaah pehle ek jogi arthat riddhi ashuddhiyon ke malik the vaah kisi ko bhi kaise marji ghuma sakte itni unke andar mantron ki shakti thi lekin kya hua guru govind Singh ji ne unko satya ka marg bataya ki jo bhi banne ka matlab yah nahi ki tum mantron antaron ko siddh karke logo ke upar jamane lag jaaye kya fayda tera tu is duniya me rahe ekant me nahi is duniya me rahkar is duniya ki seva kar itne log bechare pareshan hain itne bhukhe mar rahe hain unki seva kar itne log ek dusre ke upar macha rahe hain unko dekh sacchai ko de kaha toh himalaya par chadhakar jogi bankar ghum raha hai jogi ka matlab hai is duniya me rehna hai jo bhi karna hai aisa jo karna hai ki har parivar har ghar har desh sukh shanti se rehna shuru ho jaaye aur prabhu charno me jud jaaye jo prabhu ke charno me Jodta hai wahi jo bhi hai jo himalaya ke saath Jodta hai aise jogi sirf bhoot pret hain aur kuch bhi nahi marne ke baad yah wahi par hi ghumte rahenge kyon apne didi siddhiyon ke mamle me fanse rahenge hum toh bahut bade bhagwan ban gaye kamre ko ghamand bhi ho jata hai waise jogi nahi chahiye hamein vaah jogi chahiye jo is sansar ki seva kare vaah jo bhi chahiye jo is sansar ko ek door me bandhkar sab ki ladai ko khatam kar doon jogi hamein chahiye dhanyavad

देखिए जो जो भी है यह जो भी हैं उन्होंने सिर्फ अपने सुख के लिए हिमालय में रहना शुरू किया क्

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