क्या शादी करना आध्यात्मिक राह में एक रुकावट है?...


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Achal Kumar

Business & Industry

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Urmila Yadav

Financial Expert

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Amit Kumar

Spiritual Counselor, Motivational Speaker, Life Coach, Religious Speaker & Youth Counselor

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श्री कृष्ण भवन तक निति अध्यात्मिक मतलब एक पूरा व्यक्तित्व अध्ययन होता है यदि आध्यात्मिक आध्यात्मिक एक बार अध्यापक अध्यापक को प्राप्त हुए उसके बाद दुख सुख A1 प्लस बी हुआ जा सकता कि हो सकता है कि आध्यात्मिक रुकावट नहीं है उसे मेंटेन करना चाहिए आपको पता होना चाहिए कि उस रुकावट ना हो मेंटेन कर सकूं अध्यात्मिक मिल पाओगे तुम राजी नरसी मॉर्निंग में प्रकट हुए प्रथम अग्रसेन महाराज की कृपा से बहुत है मन से ग्रस्त है और टॉप पर भगवान के भक्त हैं शुद्ध भक्त हैं तो अध्यात्म में शादी कोई रुकावट नहीं है वह आपके ऊपर हर संडे को फिजिकल होता है कैसे कर सकते हैं लेकिन अगर सोचो ब्रह्मचारी भाषण विच बैटरी तो शादी कर लो और उन्हें कोई इंटरेस्ट नहीं है तो फिर आप ऐसा नहीं है

shri krishna bhawan tak niti adhyatmik matlab ek pura vyaktitva adhyayan hota hai yadi aadhyatmik aadhyatmik ek baar adhyapak adhyapak ko prapt hue uske baad dukh sukh A1 plus be hua ja sakta ki ho sakta hai ki aadhyatmik rukavat nahi hai use maintain karna chahiye aapko pata hona chahiye ki us rukavat na ho maintain kar sakun adhyatmik mil paoge tum raji narasi morning me prakat hue pratham agrasen maharaj ki kripa se bahut hai man se grast hai aur top par bhagwan ke bhakt hain shudh bhakt hain toh adhyaatm me shaadi koi rukavat nahi hai vaah aapke upar har sunday ko physical hota hai kaise kar sakte hain lekin agar socho brahmachari bhashan which battery toh shaadi kar lo aur unhe koi interest nahi hai toh phir aap aisa nahi hai

श्री कृष्ण भवन तक निति अध्यात्मिक मतलब एक पूरा व्यक्तित्व अध्ययन होता है यदि आध्यात्मिक आध

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Pramod Kushwaha

famous Motivational Guru N Painter

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हेलो मैं मोटिवेशनल गुरु प्रमोद कुशवाहा जबलपुर एमपी से लोकल पर आपका स्वागत करता हूं आपकी हर समस्या का समाधान हेतु मेरा व्हाट्सएप नंबर 90980 31929 है आपके हर समस्या का समाधान करने हेतु मैं आपके साथ हूं किसी ने प्रश्न किया है क्या शादी करना अध्याय में एक रिपोर्ट रुकावट है भी और नहीं भी रुकावट आ गए तब आपका पार्टनर समझदार ना हो अगर पाटनर आपका समझदार है तो कोई भी रुकावट नहीं है अगर वह समझता है आपको तो कोई बात नहीं

hello main Motivational guru pramod kushwaha jabalpur MP se local par aapka swaagat karta hoon aapki har samasya ka samadhan hetu mera whatsapp number 90980 31929 hai aapke har samasya ka samadhan karne hetu main aapke saath hoon kisi ne prashna kiya hai kya shaadi karna adhyay me ek report rukavat hai bhi aur nahi bhi rukavat aa gaye tab aapka partner samajhdar na ho agar partner aapka samajhdar hai toh koi bhi rukavat nahi hai agar vaah samajhata hai aapko toh koi baat nahi

हेलो मैं मोटिवेशनल गुरु प्रमोद कुशवाहा जबलपुर एमपी से लोकल पर आपका स्वागत करता हूं आपकी हर

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Nishant Kr. Sharma

Social Worker And Advocate

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वह आध्यात्मिक राह में रुकावट नहीं है जैसा कि पूर्व काल में हमने देखा है कि बहुत से ऋषि विवाहित होते थे और वैवाहिक जीवन के साथ ही अध्यात्म की ओर अध्यात्म में लगे रहो परंतु इसके लिए आवश्यक यह है आपका जीवन साथी कैसा है यदि आपके जीवन साथी भी अध्यात्म की ओर जाना चाहती है और आप दोनों संयुक्त रूप से वंदन करते हैं और दिखाए हुए सत मार्ग पर चल सकते हैं तो विवाह बाधा नहीं है

vaah aadhyatmik raah me rukavat nahi hai jaisa ki purv kaal me humne dekha hai ki bahut se rishi vivaahit hote the aur vaivahik jeevan ke saath hi adhyaatm ki aur adhyaatm me lage raho parantu iske liye aavashyak yah hai aapka jeevan sathi kaisa hai yadi aapke jeevan sathi bhi adhyaatm ki aur jana chahti hai aur aap dono sanyukt roop se vandan karte hain aur dekhiye hue sat marg par chal sakte hain toh vivah badha nahi hai

वह आध्यात्मिक राह में रुकावट नहीं है जैसा कि पूर्व काल में हमने देखा है कि बहुत से ऋषि विव

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Phool Kanwar

Business Owner

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क्या शादी करना आध्यात्मिक राह में एक रुकावट है नहीं शादी करने में कोई रुकावट नहीं है शादी तो आप चाहे कर सकते हो शादी करके भी आध्यात्मिक शक्ति

kya shaadi karna aadhyatmik raah me ek rukavat hai nahi shaadi karne me koi rukavat nahi hai shaadi toh aap chahen kar sakte ho shaadi karke bhi aadhyatmik shakti

क्या शादी करना आध्यात्मिक राह में एक रुकावट है नहीं शादी करने में कोई रुकावट नहीं है शादी

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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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Santosh Singh indrwar

Business Consultant & Life Couch

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Virendra Pratap Singh Chundawat

Philanthropist & a Politician

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नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है विवाह करना है शादी करना एक अलग चीज है और आध्यात्मिक होना अलग चीज है अगर विभाग करने से शादी करने से आध्यात्मिक राह में रुकावट आती है तो शायद भगवान श्री राम विवाह नहीं करते कृष्ण भगवान भी विवाह नहीं करते हमारी जितनी भी देवी देवता ही हुआ है जितने भी हमारे जो भगवान हुए हैं उन सब के साथ में कोई न कोई स्त्री है उन सब ने विभाग किए हैं उसके बावजूद को भगवान के लाए हैं और वह तत्व की राह पर चले हैं इसलिए यह कोई बड़ा नहीं है क्या शादी करके आ जा सकते आध्यात्मिक होने के लिए आप को पवित्र मन से आपको धर्म या आपने जो और जाता है उसकी खोज करनी पड़ेगी आपको उसका पट्टा ध्यान करना पड़ेगा आपको प्राप्त करना पड़ेगा आप शादीशुदा है या नहीं है उसे कोई फर्क नहीं पड़ता

nahi aisa bilkul bhi nahi hai vivah karna hai shaadi karna ek alag cheez hai aur aadhyatmik hona alag cheez hai agar vibhag karne se shaadi karne se aadhyatmik raah me rukavat aati hai toh shayad bhagwan shri ram vivah nahi karte krishna bhagwan bhi vivah nahi karte hamari jitni bhi devi devta hi hua hai jitne bhi hamare jo bhagwan hue hain un sab ke saath me koi na koi stree hai un sab ne vibhag kiye hain uske bawajud ko bhagwan ke laye hain aur vaah tatva ki raah par chale hain isliye yah koi bada nahi hai kya shaadi karke aa ja sakte aadhyatmik hone ke liye aap ko pavitra man se aapko dharm ya aapne jo aur jata hai uski khoj karni padegi aapko uska patta dhyan karna padega aapko prapt karna padega aap shaadishuda hai ya nahi hai use koi fark nahi padta

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है विवाह करना है शादी करना एक अलग चीज है और आध्यात्मिक होना अलग च

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Dr. J.Singh

Financial Expert || Ayurvedic Doctor

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मेरी जानकारी के अनुसार शादी करना आध्यात्मिक राह में आंखों रुकावट नहीं है रुकावट है आपका मुंह अगर आपकी शादी की है तो आप उस परिवार की जिम्मेदारी को पूरी तरह से निर्वहन करते हुए भी आप आध्यात्मिक बन सकते हैं ऐसे बहुत उदाहरण हैं आप उन सब महापुरुषों की जीवनी आप पढ़ सकते हैं जो शादी भी किए हुए थे गृहस्ती भी थी और उसके बाद भी वह बहुत बड़े आधारित पुरुषों में धन्यवाद

meri jaankari ke anusaar shaadi karna aadhyatmik raah me aakhon rukavat nahi hai rukavat hai aapka mooh agar aapki shaadi ki hai toh aap us parivar ki jimmedari ko puri tarah se nirvahan karte hue bhi aap aadhyatmik ban sakte hain aise bahut udaharan hain aap un sab mahapurushon ki jeevni aap padh sakte hain jo shaadi bhi kiye hue the grihasti bhi thi aur uske baad bhi vaah bahut bade aadharit purushon me dhanyavad

मेरी जानकारी के अनुसार शादी करना आध्यात्मिक राह में आंखों रुकावट नहीं है रुकावट है आपका म

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मित्रों नमस्कार मैं दिनेश प्रस्तुत करें नहीं कदापि नहीं क्योंकि शादी करना जो है दो आत्माओं को पवित्र मिलन है और एक दूसरे की पूर्ति करते हैं और अगर हम संयम साधना के द्वारा आपके जीवन को पर पहुंचे तो निश्चित रूप से शादी अध्यात्म की राह में और आसान बना देती है अच्छा जीवन साथी हमेशा ज्यादा ही साबित होता है पति पत्नी रात में पत्नी का रूप होता है दिन में वह माता का रूप होता है जब हमारी मां दर्शन करती है तो गुरु के रूप में हो जाती है और जब हमारे लिए सेवा कार्य करती है घर की नौकरानी नहीं हो जाती इस प्रकार पत्नी के विभिन्न रूप हमको देखने को मिलते हैं और यदि हम अपना दृष्टिकोण सही रखें अपने जीवन में चार बातों का समावेश कर ले चार प्रकार के सईया बना ले दिनेश ने सिर्फ मुझसे जीवन आनंद में बन जाएगा अध्यात्म की राह और आसान हो जाएगी 14 संयम जो है इंद्रिय संयम समय संयम विचार सेव अर्थ सहित इंद्रिय संयम नवंबर नजर का पालन करें और अपने को संयमित रखें और एक नियम 10 तरीके से जो है पत्नी के साथ संभोग करें जीवन में आनंद ही आनंद रहेगा अर्थ संयम पैसों पर संयम रखें फर्जी ना करें इसी प्रकार विचार सैया सुविचार माया करते हैं फिर बताया करते हैं तो उनको नाटक करके अच्छे विचारों का समावेश अपने अंदर करें खाली बैठे उसने बर्बाद किया करते हैं और उसको अगर नियोजित ढंग से अपने उन्नत के मार्ग में लगाएं तो निश्चित रूप से समय तुम्हारे लिए भूल बड़ा वरदान साबित हो सकता है इंद्रिय संयम समय संयम विचार से हर समय यह चारों संयम अगर जीवन में हम बना करके शादी का आनंद लेते हैं निश्चित रूप से अध्यात्म की राह आसान हो जाती है और हम ईश्वर तक जरूर 523 और हमारा संभल बनके हमारा घर बल्कि तुम्हारा बेड़ा पार करता है वह आत्मा परमात्मा का मिलन होता है धन्यवाद

mitron namaskar main dinesh prastut kare nahi kadapi nahi kyonki shaadi karna jo hai do atmaon ko pavitra milan hai aur ek dusre ki purti karte hain aur agar hum sanyam sadhna ke dwara aapke jeevan ko par pahuche toh nishchit roop se shaadi adhyaatm ki raah me aur aasaan bana deti hai accha jeevan sathi hamesha zyada hi saabit hota hai pati patni raat me patni ka roop hota hai din me vaah mata ka roop hota hai jab hamari maa darshan karti hai toh guru ke roop me ho jaati hai aur jab hamare liye seva karya karti hai ghar ki naukrani nahi ho jaati is prakar patni ke vibhinn roop hamko dekhne ko milte hain aur yadi hum apna drishtikon sahi rakhen apne jeevan me char baaton ka samavesh kar le char prakar ke saiya bana le dinesh ne sirf mujhse jeevan anand me ban jaega adhyaatm ki raah aur aasaan ho jayegi 14 sanyam jo hai indriya sanyam samay sanyam vichar save arth sahit indriya sanyam november nazar ka palan kare aur apne ko sanyamit rakhen aur ek niyam 10 tarike se jo hai patni ke saath sambhog kare jeevan me anand hi anand rahega arth sanyam paison par sanyam rakhen farji na kare isi prakar vichar saiya suvichar maya karte hain phir bataya karte hain toh unko natak karke acche vicharon ka samavesh apne andar kare khaali baithe usne barbad kiya karte hain aur usko agar niyojit dhang se apne unnat ke marg me lagaye toh nishchit roop se samay tumhare liye bhool bada vardaan saabit ho sakta hai indriya sanyam samay sanyam vichar se har samay yah charo sanyam agar jeevan me hum bana karke shaadi ka anand lete hain nishchit roop se adhyaatm ki raah aasaan ho jaati hai aur hum ishwar tak zaroor 523 aur hamara sambhal banke hamara ghar balki tumhara beda par karta hai vaah aatma paramatma ka milan hota hai dhanyavad

मित्रों नमस्कार मैं दिनेश प्रस्तुत करें नहीं कदापि नहीं क्योंकि शादी करना जो है दो आत्माओं

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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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नमस्कार आपका प्रश्न है क्या शादी करना आध्यात्मिक राह में एक रुकावट है उत्तर है नहीं अध्यात्म के लिए नर नारी के बिना अधूरा है जैसे शिव शक्ति के बिना सब रूप में हो जाते हैं अतः शादी अध्यात्म के दृष्टिकोण से कभी रुकावट नहीं है बल्कि आध्यात्मिक रास्ते में उसे और सहयोग मिलता है धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai kya shaadi karna aadhyatmik raah me ek rukavat hai uttar hai nahi adhyaatm ke liye nar nari ke bina adhura hai jaise shiv shakti ke bina sab roop me ho jaate hain atah shaadi adhyaatm ke drishtikon se kabhi rukavat nahi hai balki aadhyatmik raste me use aur sahyog milta hai dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है क्या शादी करना आध्यात्मिक राह में एक रुकावट है उत्तर है नहीं अध्यात

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Shailesh Kumar Dubey

Yoga Teacher , Retired Government Employee

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bhaand's Theatre and Acting Classes

Acting And drama Coach Casting director Drama Director

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जी बिल्कुल ऐसा नहीं है कि शादी करना अध्यात्म की राह में रुकावट है ऐसा बिल्कुल नहीं आपने देखे होंगे बड़े बड़े गुरु महागुरु ऋषि मुनि जिनके पुत्र पुत्र होते थे और वह अध्यात्म की राह पर ही चलते थे अब रामायण देखते हैं महाभारत देखते हैं आप या कोई भी ग्रंथ पढ़ते हैं उसमें देखिए हर ऋषि मुनि जो अध्यात्म में रहते थे उनके भी पुत्र हुए हैं और उनका भी एक सामाजिक दायित्व था जो निभाते थे वह लोग और वह अपना खुद का अपना परिवार होता था उनका पत्नी होती थी उनके बच्चे होते थे उनके मां बाप भाई बहन सब होते थे और जिनके साथ रहकर वह आध्यात्म भी करते थे और अपना सामाजिक जीवन भी जीते थे तो शादी कोई रुकावट नहीं है रुकावट है आपके मानसिक संतुलन आपके जो दिमाग में ख्याल आते हैं जो विचार आते हैं वह रुकावट है तू जो रुकावट करने वाले विचार आए हैं उन्हें दूर हटा दीजिए और अध्यात्म में लग जाइए और शादी भी कीजिए

ji bilkul aisa nahi hai ki shaadi karna adhyaatm ki raah me rukavat hai aisa bilkul nahi aapne dekhe honge bade bade guru mahaguru rishi muni jinke putra putra hote the aur vaah adhyaatm ki raah par hi chalte the ab ramayana dekhte hain mahabharat dekhte hain aap ya koi bhi granth padhte hain usme dekhiye har rishi muni jo adhyaatm me rehte the unke bhi putra hue hain aur unka bhi ek samajik dayitva tha jo nibhate the vaah log aur vaah apna khud ka apna parivar hota tha unka patni hoti thi unke bacche hote the unke maa baap bhai behen sab hote the aur jinke saath rahkar vaah aadhyatm bhi karte the aur apna samajik jeevan bhi jeete the toh shaadi koi rukavat nahi hai rukavat hai aapke mansik santulan aapke jo dimag me khayal aate hain jo vichar aate hain vaah rukavat hai tu jo rukavat karne waale vichar aaye hain unhe dur hata dijiye aur adhyaatm me lag jaiye aur shaadi bhi kijiye

जी बिल्कुल ऐसा नहीं है कि शादी करना अध्यात्म की राह में रुकावट है ऐसा बिल्कुल नहीं आपने दे

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Akhil

Yoga Expert

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नहीं आप सही अलसी जीवन की तो दोनों मिलकर में बिठा सकते हैं हमारे यहां तो कहा भी गया है 373 भोजन तथा क्या पूर्वक वो करो

nahi aap sahi aalsi jeevan ki toh dono milkar me bitha sakte hain hamare yahan toh kaha bhi gaya hai 373 bhojan tatha kya purvak vo karo

नहीं आप सही अलसी जीवन की तो दोनों मिलकर में बिठा सकते हैं हमारे यहां तो कहा भी गया है 373

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Manoj Kumar

Spiritual Knowdge / working as a Social Worker

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जी बिल्कुल भी नहीं शादी करना आध्यात्मिक मार्ग में रुकावट नहीं है अगर आप शादी आत्मा से कर रहे हैं जो आपके वैचारिक मेल से हैं यानी चीन के साथ आपके आपका वैचारिक मेल हो जो आपकी ही लाइन से हो आध्यात्मिक मार्ग को समझते हो अगर ऐसी आत्मा से आप जोड़ते हैं तो 7 दिन में कोई भी रुकावट क्यों की शादी न करना या शादी करके ही मोक्ष प्राप्त करना यह दोनों ही बातें सही नहीं है कि परमात्मा कहते हैं कि आप साथी ना करके भी परमात्मा प्राप्ति कर सकते हैं और शादी करके हम आत्माएं यहां उदाहरण देते हैं कि ढूंढ रहे खुश रहो खुश रैना मोक्ष ध्रुव प्रह्लाद और पार हो गए कि कृष-3 ने कह दिया कि अगर गृहस्ती में जीवन जीते जीते डूबा परलाद जैसी आत्माएं पार हो गई फिर कृष 3 में कोई दोष नहीं है और अगर बिना शादी करवाने से ही आत्मा पर हो तो फिर जो यह खुश रहे घूमते हैं तो यह तो हम में सबसे पहले पार हो जाते हैं इसलिए शादी करना या न करना इसका कोई लेना-देना नहीं है आप शादी करके भी पा सकते हैं और रुकावट तब आएंगे जब आपके वैचारिक में से आसमान में हो तो

ji bilkul bhi nahi shaadi karna aadhyatmik marg me rukavat nahi hai agar aap shaadi aatma se kar rahe hain jo aapke vaicharik male se hain yani china ke saath aapke aapka vaicharik male ho jo aapki hi line se ho aadhyatmik marg ko samajhte ho agar aisi aatma se aap jodte hain toh 7 din me koi bhi rukavat kyon ki shaadi na karna ya shaadi karke hi moksha prapt karna yah dono hi batein sahi nahi hai ki paramatma kehte hain ki aap sathi na karke bhi paramatma prapti kar sakte hain aur shaadi karke hum aatmaen yahan udaharan dete hain ki dhundh rahe khush raho khush raina moksha dhruv prahlad aur par ho gaye ki krish 3 ne keh diya ki agar grihasti me jeevan jeete jeete dooba parlad jaisi aatmaen par ho gayi phir krish 3 me koi dosh nahi hai aur agar bina shaadi karwane se hi aatma par ho toh phir jo yah khush rahe ghumte hain toh yah toh hum me sabse pehle par ho jaate hain isliye shaadi karna ya na karna iska koi lena dena nahi hai aap shaadi karke bhi paa sakte hain aur rukavat tab aayenge jab aapke vaicharik me se aasman me ho toh

जी बिल्कुल भी नहीं शादी करना आध्यात्मिक मार्ग में रुकावट नहीं है अगर आप शादी आत्मा से कर र

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Anshu Saxena

Business Manager

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शादी करना आध्यात्मिक राह में रुकावट नहीं है अगर आप किसी कथा में महाभारत में रामायण में आपने से बहुत से वर्णन सुने होंगे कि फलां ऋषि हैं उनकी पत्नी फलाना श्री कृष्ण जहां पढ़ते थे वहां गुरु भी थे और गुरु माता की थी अध्यात्म को आप दूसरे नजरिए से समझिए अध्यात्म जो है आत्मबोध है उसमें रुकावट नहीं है वह यह नहीं कहता कि आप अपनी जिम्मेदारी ओं को छोड़कर केवल में बैठकर के सन्यास धारण करने नहीं अध्यात्म है अपने आपको जानना इस दुनिया को जानना है इसके शख्स को जानना इसकी रचना को जानना पेड़ रावन फुल हवा इनको पहचान ना इनकी शक्तियों का ज्ञान होना इसके लिए आपको एक जीवनशैली अपनानी पड़ती है हर काम का अपना निश्चित समय तय करना पड़ता है पूजा-पाठ का ध्यान का अपने परिवार के लिए अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए हर समय एक निश्चित होता है अगर आप अपने जीवन को इस तरह से एक इस प्रारूप में रख लेते हैं कि इस वक्त मुझे यह करना है इस वक्त मुझे योगा करना है इस वक्त मुझे ग्रंथ का ज्ञान इस वक्त मुझे माला फेरनी है इस वक्त मुझे भगवान के ध्यान में रहना है वहां शादी कोई रुकावट नहीं है कोई यह नहीं कहता कि आप शादी ना करें शादी ना करने का अध्यात्म से कोई संबंध नहीं है

shaadi karna aadhyatmik raah me rukavat nahi hai agar aap kisi katha me mahabharat me ramayana me aapne se bahut se varnan sune honge ki falan rishi hain unki patni falana shri krishna jaha padhte the wahan guru bhi the aur guru mata ki thi adhyaatm ko aap dusre nazariye se samjhiye adhyaatm jo hai atmabodh hai usme rukavat nahi hai vaah yah nahi kahata ki aap apni jimmedari on ko chhodkar keval me baithkar ke sanyas dharan karne nahi adhyaatm hai apne aapko janana is duniya ko janana hai iske sakhs ko janana iski rachna ko janana ped raavan full hawa inko pehchaan na inki shaktiyon ka gyaan hona iske liye aapko ek jeevan shaili apanani padti hai har kaam ka apna nishchit samay tay karna padta hai puja path ka dhyan ka apne parivar ke liye apni rozi roti kamane ke liye har samay ek nishchit hota hai agar aap apne jeevan ko is tarah se ek is prarup me rakh lete hain ki is waqt mujhe yah karna hai is waqt mujhe yoga karna hai is waqt mujhe granth ka gyaan is waqt mujhe mala ferni hai is waqt mujhe bhagwan ke dhyan me rehna hai wahan shaadi koi rukavat nahi hai koi yah nahi kahata ki aap shaadi na kare shaadi na karne ka adhyaatm se koi sambandh nahi hai

शादी करना आध्यात्मिक राह में रुकावट नहीं है अगर आप किसी कथा में महाभारत में रामायण में आपन

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Isu Vasava

PASTOR in CHURCH.

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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क्या शादी करना आध्यात्मिक राय में रुकावट है बिल्कुल नहीं अगर आपके अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति है और इंद्रियों का अनुशासन और नमन आपका अच्छा है तो क्यों अध्यात्म कर रहा है अनासक्त गिराए उदासीन का किराया ट्रेन किराया की शादी कहीं बिल्कुल भी बहुत सारी गृहस्थ संत एवं महात्मा है जो इस संसार में अपनी वाणी से अपने आचरण व्यवहार से लोगों की जगह स्थित रामकृष्ण परमहंस का उदाहरण दीजिए उनकी शादी मां शारदा से हुई और उनकी पत्नी इतनी ज्यादा थी अपनी पत्नी से श्रद्धा हुए रेल के स्थान पर श्रद्धा वासना के स्थान पर भक्तों का भाव जागृत हो गया और उन्होंने ऊर्जा एवं शक्ति का केंद्र समझा और रामकृष्ण परमहंस की आध्यात्मिक और

kya shaadi karna aadhyatmik rai me rukavat hai bilkul nahi agar aapke andar dridh ichchhaashakti hai aur indriyon ka anushasan aur naman aapka accha hai toh kyon adhyaatm kar raha hai anasakt giraye udasin ka kiraaya train kiraaya ki shaadi kahin bilkul bhi bahut saari grihasth sant evam mahatma hai jo is sansar me apni vani se apne aacharan vyavhar se logo ki jagah sthit ramakrishna paramhans ka udaharan dijiye unki shaadi maa sharda se hui aur unki patni itni zyada thi apni patni se shraddha hue rail ke sthan par shraddha vasana ke sthan par bhakton ka bhav jagrit ho gaya aur unhone urja evam shakti ka kendra samjha aur ramakrishna paramhans ki aadhyatmik aur

क्या शादी करना आध्यात्मिक राय में रुकावट है बिल्कुल नहीं अगर आपके अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति है

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अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

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जिस तरह से हम शादी करते हैं कि हमने किसी के ऊपर के रूप रंग को देखा उसका स्टेटस देखा और हमने सोचा कि यह व्यक्ति मेरे लिए बहुत सहायक होगा तो हम एक शादी का बंधन में बंध जाते हैं दरअसल शादी एक कंस्ट्रक्ट की तरह है उसमें आपको सब कुछ नहीं मिलेगा कुछ सुविधा मिलेगी तो कुछ उसके कारण और सुविधाएं भी होगी जब आप शादी में जाएं तो कोशिश करें कि आप दोनों के बीच मैत्री भाव कैसे विकसित हो एक दूसरे का सम्मान एक दूसरे का स्वीकार उसकी तमाम कमियों के साथ भी स्वीकार करके उनमें धीरे-धीरे एक अच्छा वातावरण निर्मित करना एक दूसरे के उसमें हाथ बटाना अगर हम यह प्रयोग करते हैं तो हमारा विवाह भी धीरे-धीरे मैत्री में रूपांतरित हो जाता है और फिर यह हमारे किसी भी जीवन यात्रा में रुकावट नहीं सहायक हो जाता है धन्यवाद

jis tarah se hum shaadi karte hain ki humne kisi ke upar ke roop rang ko dekha uska status dekha aur humne socha ki yah vyakti mere liye bahut sahayak hoga toh hum ek shaadi ka bandhan me bandh jaate hain darasal shaadi ek construct ki tarah hai usme aapko sab kuch nahi milega kuch suvidha milegi toh kuch uske karan aur suvidhaen bhi hogi jab aap shaadi me jayen toh koshish kare ki aap dono ke beech maitri bhav kaise viksit ho ek dusre ka sammaan ek dusre ka sweekar uski tamaam kamiyon ke saath bhi sweekar karke unmen dhire dhire ek accha vatavaran nirmit karna ek dusre ke usme hath batana agar hum yah prayog karte hain toh hamara vivah bhi dhire dhire maitri me rupantarit ho jata hai aur phir yah hamare kisi bhi jeevan yatra me rukavat nahi sahayak ho jata hai dhanyavad

जिस तरह से हम शादी करते हैं कि हमने किसी के ऊपर के रूप रंग को देखा उसका स्टेटस देखा और हमन

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Gyandeep Kkr

Social Activist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शादी करना अध्यात्मिक राम में रुकावट हो भी सकता है और नहीं भी अगर हमारी शादी ऐसे व्यक्ति से हो जाए जिसका हमारे साथ तालमेल ना बैठे तू बहुत दुख की बात है अगर तालमेल बैठ जाए तो बहुत दुख की बात है परंतु फिर भी खुद का भी काम आता है और परिस्थिति जैसी लड़कियों के लिए ताकि का कुछ और मतलब होता है लड़कों के लिए कुछ और लड़कियों को दूसरे के घर जाना है उसकी एक व्यक्ति से मानो शादी हुई परंतु उसके साथ कितने लोग जुड़े होते हैं कितना मुश्किल होता है किसी के घर में रहना यह कोई बच्चों का खेल नहीं होता इंसान में थकान भी होते हैं बहुत सी ऐसी चीज होती है कि इंसान का मन हमेशा एक जैसा नहीं रहता और इंसान को दया की बहुत जरूरत होती है इंसान एक सुखमय जीवन में ही सही तरीके से जीत सकता है अगर हम दुखी हो जाए तो अध्यात्म में भी फिर हम उतनी अच्छी कर नहीं चल पाते इसलिए किसी के कहने से यह नहीं सोचना चाहिए कि शादी रुकावट नहीं है रुकावट इतनी हो सकती है कि हम सोच भी नहीं सकते लड़कियों के लिए दूसरे के घर जाना बहुत ही मुश्किल होता है जो इस चीज को महसूस करता है वह जानता है हमें अपने जीवन में जो चाहिए हम गरीबी में खेल सकते हैं परंतु मानसिक संतोष बहुत ज्यादा जरूरी होता है इंसान का जब मन परेशान हो जाता है वह किसी कार्य को ढंग से नहीं कर पाता क्योंकि यह होता है कि जैसे वह अपने घर में किस मॉल में रही है अगर वैसा ही मुगलों ने नहीं मिल पाता उसे अलग मिल पाता है तो कितना मुश्किल होता है करने में लड़कों को अपने ही घर में रहना होता है अपने घर में रहना बहुत आसान होता है परंतु अगर हम इस बात को बिल्कुल एक नॉर्मल तरीके से ले यह तो ऐसा ही होता है नहीं हमें यह सोचना चाहिए कि लड़की की भी आत्मा है आत्मा कितना दुख पाती है जब उसको एक गुलाम कैसा जीवन जीना पड़ता है हमें यह सोचना चाहिए कि परमात्मा का बच्चा है उसको कैसे रखना है और यह दूसरे पर निर्भर करता है तो अगर आप भक्ति मार्ग में बहुत ज्यादा है और आप अकेले रह सकते हैं या अकेले भी नहीं किसी और तरीके से अपनी बहन भाइयों के साथ अच्छी तरह सकते हैं तो यह जरूरी नहीं है कि आपको शादी ही करूंगी क्योंकि अगर शादी करके निभाना पाए तो यह भी दूसरे के साथ धोखा ही होता है तो इसलिए यह फैसला बहुत ही माता-पिता को भी सोच समझ कर लेना चाहिए

shaadi karna adhyatmik ram me rukavat ho bhi sakta hai aur nahi bhi agar hamari shaadi aise vyakti se ho jaaye jiska hamare saath talmel na baithe tu bahut dukh ki baat hai agar talmel baith jaaye toh bahut dukh ki baat hai parantu phir bhi khud ka bhi kaam aata hai aur paristhiti jaisi ladkiyon ke liye taki ka kuch aur matlab hota hai ladko ke liye kuch aur ladkiyon ko dusre ke ghar jana hai uski ek vyakti se maano shaadi hui parantu uske saath kitne log jude hote hain kitna mushkil hota hai kisi ke ghar me rehna yah koi baccho ka khel nahi hota insaan me thakan bhi hote hain bahut si aisi cheez hoti hai ki insaan ka man hamesha ek jaisa nahi rehta aur insaan ko daya ki bahut zarurat hoti hai insaan ek sukhmay jeevan me hi sahi tarike se jeet sakta hai agar hum dukhi ho jaaye toh adhyaatm me bhi phir hum utani achi kar nahi chal paate isliye kisi ke kehne se yah nahi sochna chahiye ki shaadi rukavat nahi hai rukavat itni ho sakti hai ki hum soch bhi nahi sakte ladkiyon ke liye dusre ke ghar jana bahut hi mushkil hota hai jo is cheez ko mehsus karta hai vaah jaanta hai hamein apne jeevan me jo chahiye hum garibi me khel sakte hain parantu mansik santosh bahut zyada zaroori hota hai insaan ka jab man pareshan ho jata hai vaah kisi karya ko dhang se nahi kar pata kyonki yah hota hai ki jaise vaah apne ghar me kis mall me rahi hai agar waisa hi mugalon ne nahi mil pata use alag mil pata hai toh kitna mushkil hota hai karne me ladko ko apne hi ghar me rehna hota hai apne ghar me rehna bahut aasaan hota hai parantu agar hum is baat ko bilkul ek normal tarike se le yah toh aisa hi hota hai nahi hamein yah sochna chahiye ki ladki ki bhi aatma hai aatma kitna dukh pati hai jab usko ek gulam kaisa jeevan jeena padta hai hamein yah sochna chahiye ki paramatma ka baccha hai usko kaise rakhna hai aur yah dusre par nirbhar karta hai toh agar aap bhakti marg me bahut zyada hai aur aap akele reh sakte hain ya akele bhi nahi kisi aur tarike se apni behen bhaiyo ke saath achi tarah sakte hain toh yah zaroori nahi hai ki aapko shaadi hi karungi kyonki agar shaadi karke nibhana paye toh yah bhi dusre ke saath dhokha hi hota hai toh isliye yah faisla bahut hi mata pita ko bhi soch samajh kar lena chahiye

शादी करना अध्यात्मिक राम में रुकावट हो भी सकता है और नहीं भी अगर हमारी शादी ऐसे व्यक्ति से

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

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देखिए आपका प्रश्न है क्या शादी करना आध्यात्मिक राम रुकावट है जी नहीं बिल्कुल नहीं शादी करना और अध्यापक शादी करना किसी तरह से आप जाते ग्राम में या ईश्वर प्राप्ति में भक्ति मार्ग में कोई रुकावट बसंती आप अपनी इंद्रियों का उचित उपयोग करें देखें हिंदुओं का सही ढंग से उपयोग करने वाला व्यक्ति भी आ जाता है बेस्ट व्यक्ति भी बहुत बड़ा संत हो सकता है यह हमारे महापुरुषों ने सूचित किया है कि हमारे प्राचीन काल में जितने ऋषि मुनि की सबसे प्राचीन ऋषि मुनियों की बात की जाए तो भगवान राम ने जिन ऋषि-मुनियों के दर्शन किए महर्षि अत्रि उनकी पत्नियां थी और भी जितने महर्षि ओक यहां गई जितने ऋषि मुनियों के अंदर सभी गृहस्थी सभी ग्रह धर्म का पालन करते हुए अपना बना रही थी यदि उनकी पुत्र का रविदास जी कितने बड़े संत में संत तुकाराम महाराष्ट्र संत तुकाराम एकनाथ यह सभी संतो है यह कहते हुए इन्होंने किया तो यह नहीं कह सकते हैं कि गृहस्थ धर्म शादी करने के बाद व्यक्ति आध्यात्मिक प्रगति नहीं कर सकता शादी करना एक अलग बात है और शादी करते हुए भी आदमी अपनी आध्यात्मिक प्रगति कर सकता है बशर्ते वह शादी में शादी को एक अलग मामला माने और आध्यात्मिक उन्नति की

dekhiye aapka prashna hai kya shaadi karna aadhyatmik ram rukavat hai ji nahi bilkul nahi shaadi karna aur adhyapak shaadi karna kisi tarah se aap jaate gram me ya ishwar prapti me bhakti marg me koi rukavat basanti aap apni indriyon ka uchit upyog kare dekhen hinduon ka sahi dhang se upyog karne vala vyakti bhi aa jata hai best vyakti bhi bahut bada sant ho sakta hai yah hamare mahapurushon ne suchit kiya hai ki hamare prachin kaal me jitne rishi muni ki sabse prachin rishi muniyon ki baat ki jaaye toh bhagwan ram ne jin rishi muniyon ke darshan kiye maharshi atri unki patniya thi aur bhi jitne maharshi oak yahan gayi jitne rishi muniyon ke andar sabhi grihasthi sabhi grah dharm ka palan karte hue apna bana rahi thi yadi unki putra ka ravidas ji kitne bade sant me sant tukaram maharashtra sant tukaram eknath yah sabhi santo hai yah kehte hue inhone kiya toh yah nahi keh sakte hain ki grihasth dharm shaadi karne ke baad vyakti aadhyatmik pragati nahi kar sakta shaadi karna ek alag baat hai aur shaadi karte hue bhi aadmi apni aadhyatmik pragati kar sakta hai basharte vaah shaadi me shaadi ko ek alag maamla maane aur aadhyatmik unnati ki

देखिए आपका प्रश्न है क्या शादी करना आध्यात्मिक राम रुकावट है जी नहीं बिल्कुल नहीं शादी कर

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mohit

8307747204 Founder Abhyasa Yogshala

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शादी करने से आध्यात्मिकता में कोई रुकावट नहीं आती है क्योंकि आध्यात्मिकता का अर्थ है सत्य की खोज करना तो ऐसा कुछ नहीं है कि हम शादी करने के बाद सत्य की खोज नहीं कर सकते बल्कि आप अगर इतिहास को देखेंगे बड़े-बड़े ऋषि मुनि हुए हैं जिन्होंने शादी करी है ग्रस्त जीवन जिया है और वह आध्यात्म के रास्ते पर चले हैं धन्यवाद

shaadi karne se aadhyatmikta me koi rukavat nahi aati hai kyonki aadhyatmikta ka arth hai satya ki khoj karna toh aisa kuch nahi hai ki hum shaadi karne ke baad satya ki khoj nahi kar sakte balki aap agar itihas ko dekhenge bade bade rishi muni hue hain jinhone shaadi kari hai grast jeevan jiya hai aur vaah aadhyatm ke raste par chale hain dhanyavad

शादी करने से आध्यात्मिकता में कोई रुकावट नहीं आती है क्योंकि आध्यात्मिकता का अर्थ है सत्य

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BK Kalyani

Teacher On Rajyoga Spiritual Knowledge

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Dr.Sachin Pathak

Dietician And Reiki GrandMaster

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क्या शादी करना आध्यात्मिक राह में एक रुकावट है बिल्कुल नहीं आध्यात्मिक राह में शादी करना कोई रुकावट नहीं है बल्कि शादी करके जवाब गृहस्थाश्रम में इंट्री करते हो तो वहां से भी आप अपनी आध्यात्मिक राह को शुरू रख सकते हो क्योंकि हम सभी मानते हैं कि संभोग करना एक आध्यात्मिक विकास में एक रुकावट बनती है कहीं ना कहीं तो ऐसा कुछ नहीं होता क्योंकि संभोग करना एक आध्यात्मिक चरण है इस बात को हमेशा ध्यान रखिएगा लेकिन संभोग करना एक सही समय पर करना बहुत जरूरी होता है यह आवेश में आकर बस मन किया तब इस तरह से करना यह गलत होता है क्योंकि इसका सही समय निर्धारित किया गया है हमारे ग्रंथों में करता हूं कि आपको मेरा जवाब पसंद आया होगा मैं रेकी ग्रैंड मास्टर सचिन पाठक थैंक यू वेरी मच

kya shaadi karna aadhyatmik raah me ek rukavat hai bilkul nahi aadhyatmik raah me shaadi karna koi rukavat nahi hai balki shaadi karke jawab grihasthashram me intri karte ho toh wahan se bhi aap apni aadhyatmik raah ko shuru rakh sakte ho kyonki hum sabhi maante hain ki sambhog karna ek aadhyatmik vikas me ek rukavat banti hai kahin na kahin toh aisa kuch nahi hota kyonki sambhog karna ek aadhyatmik charan hai is baat ko hamesha dhyan rakhiega lekin sambhog karna ek sahi samay par karna bahut zaroori hota hai yah aavesh me aakar bus man kiya tab is tarah se karna yah galat hota hai kyonki iska sahi samay nirdharit kiya gaya hai hamare granthon me karta hoon ki aapko mera jawab pasand aaya hoga main reki grand master sachin pathak thank you very match

क्या शादी करना आध्यात्मिक राह में एक रुकावट है बिल्कुल नहीं आध्यात्मिक राह में शादी करना क

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Shipra Ranjan

Life Coach

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वापस आएगी के शादी करना आध्यात्मिक राह में एक रुकावट है तो देखिए दोनों अलग-अलग चीजें हैं अगर आप शादी करना चाहते हैं मतलब आप गृहस्थाश्रम में प्रवेश करना चाहते हैं और अगर अध्यात्म को किराए पर जाना चाहते हैं तो इसका मतलब है क्या बिक सन्यासी जीवन जीना चाहते हैं तो दोनों चीजें ही बिल्कुल अलग अलग है पहले आप अपना मन सेट करिए कि आप करना क्या चाहते हैं अपनी लाइफ में आप मुझसे क्या चाहते हैं उसके बाद ही निर्णय लें कि आपको करना क्या है आपका दिन शुभ रहे धन्यवाद

wapas aayegi ke shaadi karna aadhyatmik raah me ek rukavat hai toh dekhiye dono alag alag cheezen hain agar aap shaadi karna chahte hain matlab aap grihasthashram me pravesh karna chahte hain aur agar adhyaatm ko kiraye par jana chahte hain toh iska matlab hai kya bik sanyaasi jeevan jeena chahte hain toh dono cheezen hi bilkul alag alag hai pehle aap apna man set kariye ki aap karna kya chahte hain apni life me aap mujhse kya chahte hain uske baad hi nirnay le ki aapko karna kya hai aapka din shubha rahe dhanyavad

वापस आएगी के शादी करना आध्यात्मिक राह में एक रुकावट है तो देखिए दोनों अलग-अलग चीजें हैं अग

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