पहले पद्मावत,अब मणिकर्णिका विवाद में! फिल्मों को इतिहास से छेड़-छाड के बिना बनाया जाना चाहिए? क्यों?...


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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

1:24

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सबसे पहले तो हमें यह समझना चाहिए कि कोई भी मूवी इंटरटेनमेंट के पर्पस से बनाई जाती है और उसका पूर्णता उद्देश्य आपको एंटरटेन करना होता है l कभी-कभी कोई मूवी इसलिए भी बनाई जाती है ताकि समाज के सामने सच्चाई लाई जा सके l लेकिन पद्मावती ऐसी मूवी या मणिकर्णिका जैसी मूवी बनाई जाती है उनका उद्देश्य ऐसा किसी की सेंटीमेंट को हर्ट करने का नहीं होता l और कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ विवाद जान बुजकर खड़े किए जाते हैं l जैसे अभी सेना करणी सेना नेता विवाद खड़ा किया बाद में उन्हें खुद बोल दिया कि ऐसा कुछ था ही नहीं, अच्छी मूवी है l तो मुझे लगता है कि केवल पब्लिसिटी गेन करने का तरीका है l करणी सेना को कोई जानता नहीं था आज से पहले l अब मणिकर्णिका में करने का कोई वही लोग विवाद करेंगे जो लोगों को कोई जानता नहीं था वह भी दो चार गाड़ी चलाएंगे, हम लोग को आपको परेशान करेंगे और हम आप हम उनको जाना शुरू हो जाएगा कि एक और दल ऐसा है जो अपने आप को महान तो बताता है, जो अपने आप को उनका भक्त मानता है लेकिन करता कुछ नहीं है, उधम करने का काम है l मुझे लगता है कि चीजों को थोड़ा दूर रखना चाहिए l इनको खबरों का बिल्कुल भी ध्यान ना दें, बिल्कुल इग्नोर करें l सबसे अच्छा तरीका यही है बिल्कुल पब्लिसिटी ना दें और न्यूज़ चैनल पर आ रहा है तो ना देखें lअपनी खुश रहें ताकि यह न्यूज़ भी लोग दिखाना बंद कर दें और इतिहास से चढ़ वाली बात है ही नहीं एंटरटेनमेंट की कोशिश हो रही है, एंटरटेनमेंट होना चाहिए, धन्यवाद l

sabse pehle toh hamein yah samajhna chahiye ki koi bhi movie entertainment ke purpose se banai jaati hai aur uska purnata uddeshya aapko entertain karna hota hai l kabhi kabhi koi movie isliye bhi banai jaati hai taki samaj ke saamne sacchai lai ja sake l lekin padmavati aisi movie ya manikarnika jaisi movie banai jaati hai unka uddeshya aisa kisi ki sentiment ko heart karne ka nahi hota l aur kabhi kabhi aisa hota hai ki kuch vivaad jaan bujakar khade kiye jaate hain l jaise abhi sena karni sena neta vivaad khada kiya baad mein unhe khud bol diya ki aisa kuch tha hi nahi achi movie hai l toh mujhe lagta hai ki keval publicity gain karne ka tarika hai l karni sena ko koi jaanta nahi tha aaj se pehle l ab manikarnika mein karne ka koi wahi log vivaad karenge jo logo ko koi jaanta nahi tha vaah bhi do char gaadi chalayenge hum log ko aapko pareshan karenge aur hum aap hum unko jana shuru ho jaega ki ek aur dal aisa hai jo apne aap ko mahaan toh batata hai jo apne aap ko unka bhakt manata hai lekin karta kuch nahi hai udham karne ka kaam hai l mujhe lagta hai ki chijon ko thoda dur rakhna chahiye l inko khabaro ka bilkul bhi dhyan na de bilkul ignore kare l sabse accha tarika yahi hai bilkul publicity na de aur news channel par aa raha hai toh na dekhen apni khush rahein taki yah news bhi log dikhana band kar de aur itihas se chad wali baat hai hi nahi Entertainment ki koshish ho rahi hai Entertainment hona chahiye dhanyavad l

सबसे पहले तो हमें यह समझना चाहिए कि कोई भी मूवी इंटरटेनमेंट के पर्पस से बनाई जाती है और उस

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिये, पहले पद्मावत ने कितना ज्यादा ऑपरेशन, कितना ज्यादा विरोध जेले और अब मणिकर्णिका l कंगना रनौत किए जो मूवी है यह रानी लक्ष्मीबाई के ऊपर आधारित है l और जयपुर में मंडे को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी थी सुरेश मिश्रा ने को प्रेसिडेंट है सर्व ब्राह्मण महासभा के और उन्होंने मणिकर्णिका के बारे में बोला कि जो यह मूवी बन रही है इससे जो हिस्ट्री है लक्ष्मीबाई से रिलेटेड उसके साथ छेड़छाड़ की गई है और एक लव अफेयर दिखाया गया है झांसी की रानी के बीच में और एक ब्रिटिश आदमी के बीच में l तो देखिये, अगर हिस्ट्री के बारे में कोई गारंटी के साथ नहीं पूछ सकता कि एक्सिस्ट हुई है कि नहीं हुई l वैसे भी यह जो मूवी है यह एक राइटर की बुक के ऊपर बेस्ड है और जिसे कि अभी यह पद्मावती के टाइम पर हुआ था जैसा लोगों को लगा था जैसा करणी सेना को लगाता है वैसा कुछ हुआ नहीं था और इन्हें भी कोई गारंटी नहीं है कि जो इन्होंने सिर्फ कुछ लोगों के कहने पर ही ओपिनियन बना लिया है कि इस मूवी के साथ छेड़छाड़ की गई है l क्या पता ऐसा ना हो कि जो लोग मूवी बनाते हैं वह रिस्पॉन्सिबल लोग होते हैं l उन्हें पता होता है कि एक और जो ऑडियंस कैसी है और यह कंगना रनौत की मूवी है l कंगना रनौत वैसे भी नेशनल अवार्ड विनर एक्ट्रेस है l तो वह मुझे लगता नहीं कि ऐसे किसी जूठी चीज़ में इन्वोल्व होगी l और हिस्ट्री के साथ छेड़छाड़ करना गलत है लेकिन जो मूवी है वह हिस्ट्री के पर बनाई जा सकती है बिना छेड़छाड़ करें बिल्कुल l और अगर किसी को छेड़-छाड़ हो रही है तो फिर उस मूवी के आगे लिखा जाएगा कि यह मूवी काल्पनिक है, डिस्क्लेमर में चला जाएगा l तो मुझे लगता है कि ज्यादा प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए क्योंकि झांसी की रानी की इंपॉर्टेंटस हम जानते हैं, हमने पढ़ा है उनके बारे में तो एक मूवी हमारा उपनयन चेंज नहीं कर सकती l

dekhiye pehle padmavat ne kitna zyada operation kitna zyada virodh jele aur ab manikarnika l kangana ranaut kiye jo movie hai yah rani lakshmibai ke upar aadharit hai l aur jaipur mein monday ko ek press conference rakhi thi suresh mishra ne ko president hai surv brahman mahasabha ke aur unhone manikarnika ke bare mein bola ki jo yah movie ban rahi hai isse jo history hai lakshmibai se related uske saath chedchad ki gayi hai aur ek love affair dikhaya gaya hai jhansi ki rani ke beech mein aur ek british aadmi ke beech mein l toh dekhiye agar history ke bare mein koi guarantee ke saath nahi puch sakta ki eksist hui hai ki nahi hui l waise bhi yah jo movie hai yah ek writer ki book ke upar based hai aur jise ki abhi yah padmavati ke time par hua tha jaisa logo ko laga tha jaisa karni sena ko lagaata hai waisa kuch hua nahi tha aur inhen bhi koi guarantee nahi hai ki jo inhone sirf kuch logo ke kehne par hi opinion bana liya hai ki is movie ke saath chedchad ki gayi hai l kya pata aisa na ho ki jo log movie banate hain vaah responsible log hote hain l unhe pata hota hai ki ek aur jo adiyans kaisi hai aur yah kangana ranaut ki movie hai l kangana ranaut waise bhi national award winner actress hai l toh vaah mujhe lagta nahi ki aise kisi juthi cheez mein inwolwa hogi l aur history ke saath chedchad karna galat hai lekin jo movie hai vaah history ke par banai ja sakti hai bina chedchad kare bilkul l aur agar kisi ko ched chad ho rahi hai toh phir us movie ke aage likha jaega ki yah movie kalpnik hai disclaimer mein chala jaega l toh mujhe lagta hai ki zyada problem nahi honi chahiye kyonki jhansi ki rani ki impartentas hum jante hain humne padha hai unke bare mein toh ek movie hamara upnayan change nahi kar sakti l

देखिये, पहले पद्मावत ने कितना ज्यादा ऑपरेशन, कितना ज्यादा विरोध जेले और अब मणिकर्णिका l कं

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Rajsi

Sports Commentator & Reporter

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मणिकर्णिका में और इसके अलावा हम सभी जानते पद्मावत के साथ जो छेड़छाड़ का जो मामला सामने आया था और दोनों इतिहास से विभिन थी l मुझे बहुत याद है इसके पहले जोधा अकबर भी जब आएगी तब बहुत सवाल खड़े किए गए थे कि इतिहास से छेड़खानी की गई है और यह गलत है, वह गलत है l पर मेरे हिसाब से फिल्मों को है फिल्मकारो को छेड़छाड़ करी भी नहीं थी इतिहास से l इसके अलावा इतना बवाल भी नहीं करना चाहिए हमें l मैं समझ सकती हूं कि इतिहास से छेड़खानी बच्चों पर भी गलत असर डालती है और उसके अलावा वह जिनकी होता है इतिहास उनको बहुत बुरा लगता है l लेकिन अभी कल को अगर कोई हॉलीवुड से आएगा डायरेक्टर वह आकर बनाएगा तब आप तो विवाद नहीं करोगे तब तुम मूवी ऐसे कैसे बन जाएगी l मुझे बखूबी याद है जिस तरह से हॉलीवुड के डायरेक्टर यहां पर आते हैं और स्लमडॉग मिलेनियर जैसी मूवी बनाते हैं l अब आप ऐसे ही मूवी आप सोचिए हमारे फ़िल्मकार क्यों नहीं बना पाए क्योंकि अगर धारावी पे कोई मूवी बनाते हैं इस तरह से तो हर कोई कहता कि आप देश के होके विदेश को भारत की गरीबी दिखाना चाहते हो l तो आपने उनको कुछ नहीं कहा लेकिन हमारे फ़िल्मकार बनाते है तो हाथ से दस तरह के इश्यूज हो जाते हैं l ऐसे में लगता है की फिल्में अगर बने तो फिल्में बहुत बेहतर होगा कि वह इतिहास से छेड़छाड़ ज़रूर ना करें लेकिन बने अगर तो उसमें छेड़खानी हमें भी नहीं करनी चाहिए l इतिहास से जरूर तोड़-मरोड़ करना गलत है लेकिन ज्यादा सवाल उठाना भी गलत है l या आपकी जो फीलिंग होती है जो आपका अपना खुद का जो पेशेंस लेवल होता उसको भी चेक करती है जो मेरे साथ से इतना खराब होना नहीं चाहिए देश का l फ्रुस्त्रतेद बहुत होते हैं इंडियन समूह मुझे नहीं लगता कि इतना फ्रुस्त्रष्ण कभी सामने आना चाहिए कि आप फिल्मों को मना करें, कम से कम उन्हें तो बनने दें l

manikarnika mein aur iske alava hum sabhi jante padmavat ke saath jo chedchad ka jo maamla saamne aaya tha aur dono itihas se vibhin thi l mujhe bahut yaad hai iske pehle jodha akbar bhi jab aayegi tab bahut sawaal khade kiye gaye the ki itihas se chedkhani ki gayi hai aur yah galat hai vaah galat hai l par mere hisab se filmo ko hai filmakaro ko chedchad kari bhi nahi thi itihas se l iske alava itna bawaal bhi nahi karna chahiye hamein l main samajh sakti hoon ki itihas se chedkhani baccho par bhi galat asar daalti hai aur uske alava vaah jinki hota hai itihas unko bahut bura lagta hai l lekin abhi kal ko agar koi hollywood se aayega director vaah aakar banayega tab aap toh vivaad nahi karoge tab tum movie aise kaise ban jayegi l mujhe bakhubi yaad hai jis tarah se hollywood ke director yahan par aate hain aur slamadag mileniyar jaisi movie banate hain l ab aap aise hi movie aap sochiye hamare filmakar kyon nahi bana paye kyonki agar dharavi pe koi movie banate hain is tarah se toh har koi kahata ki aap desh ke hoke videsh ko bharat ki garibi dikhana chahte ho l toh aapne unko kuch nahi kaha lekin hamare filmakar banate hai toh hath se das tarah ke issues ho jaate hain l aise mein lagta hai ki filme agar bane toh filme bahut behtar hoga ki vaah itihas se chedchad jarur na kare lekin bane agar toh usme chedkhani hamein bhi nahi karni chahiye l itihas se zaroor tod marod karna galat hai lekin zyada sawaal uthana bhi galat hai l ya aapki jo feeling hoti hai jo aapka apna khud ka jo patience level hota usko bhi check karti hai jo mere saath se itna kharab hona nahi chahiye desh ka l frustrated bahut hote hain indian samuh mujhe nahi lagta ki itna frustrashn kabhi saamne aana chahiye ki aap filmo ko mana kare kam se kam unhe toh banne de l

मणिकर्णिका में और इसके अलावा हम सभी जानते पद्मावत के साथ जो छेड़छाड़ का जो मामला सामने आया

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Kunjansinh Rajput

Aspiring Journalist

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मीठी बेरी पद्मावती फिल्म को लेकर जो बहुत बड़ी Contra बसंती फिर से बताओ जाति के इतिहास से छेड़छाड़ की गई है और आज गर्मी ज्यादा है और लड़के भोजपुरी वीडियो चैट चैट करना पसंद करोगी कौन सा ऐसा नहीं है कि तुम मेरी वजह से छेड़छाड़ की कोई दीवाना कहता है आदमी जो इतिहास से छेड़छाड़ कर दिखाना कितना रूपए दुनिया की सबसे बड़ी बात क्यों नहीं करते हो मैं भी काफी चिंतित नहीं लगेगा भारत की सबसे बड़ी फिल्म सर्टिफिकेशन देसी BF सेक्सी रखा जाता है फोन कब करेगी MP3 में तूने पहली नजर में मुझे याद रखना जिस दिन बढ़ती है क्या कुछ ऐसा कभी नहीं बन सकते हो खाना खाने के तरीके से कुर्बानी

mithi berry padmavati film ko lekar jo bahut badi Contra basanti phir se batao jati ke itihas se chedchad ki gayi hai aur aaj garmi zyada hai aur ladke bhojpuri video chat chat karna pasand karogi kaun sa aisa nahi hai ki tum meri wajah se chedchad ki koi deewana kahata hai aadmi jo itihas se chedchad kar dikhana kitna rupee duniya ki sabse badi baat kyon nahi karte ho main bhi kaafi chintit nahi lagega bharat ki sabse badi film certification desi BF sexy rakha jata hai phone kab karegi MP3 mein tune pehli nazar mein mujhe yaad rakhna jis din badhti hai kya kuch aisa kabhi nahi ban sakte ho khana khane ke tarike se kurbani

मीठी बेरी पद्मावती फिल्म को लेकर जो बहुत बड़ी Contra बसंती फिर से बताओ जाति के इतिहास से छ

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Ekta

Researcher and Writer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता कि फिल्मों को इतिहास से छेड़छाड़ के बिना बनाया जाना चाहिए क्यूंकि मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई छेड़छाड़ इतिहास के साथ की जाती है l जो इतिहास बीत गया है हम उसे बदल नहीं सकते हैं l हमने उस इतिहास को कभी देखा भी नहीं है, हम बस उसे पढ़कर जानते हैं l तो जिस तरीके से हम उसे पढ़कर जानते हैं उसी तरीके से कुछ लोग हमें अपने एक्ट के द्वारा उसे दिखाने की कोशिश करते हैं l इसे किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ नहीं कहा जा सकता है l अब बात रहे विवादों की जो हमारे देश में हो रही है तो मुझे नहीं समझ में आ रहा कि हमारे देश में आखिर पद्मावती मूवी को लेकर विवाद क्यों हुआ l नाम पद्मावती से पद्मावत कर दिया गया यह मुझे समझ में नहीं आया या फिर हमारे देश के लोग इन चीजों को अडॉप्ट नहीं करना चाहते या फिर अगर नहीं करना चाहते हो तो उन्हें बहुत पहले ही इस पर रोक लगा देना चाहिए था जैसे बाकी की डोमिनेट कंट्री ने लगाया हुआ है l हमारी कंट्री एक फ्री कंट्री है जहां पर हर किसी को राइट है अपने हिसाब से काम करने का लेकिन अगर पब्लिक ऐसे एक्शन लेगी तो किसी के लिए भी कुछ टिप ले पाना सही वह मुश्किल होगा l तो मुझे नहीं लगता कि फिल्मो के इतिहास के प्रमुख को इतिहास के साथ कोई छेड़छाड़ का वास्ता भी है, यह लोगों की अपनी-अपनी थिंकिंग है कि उसे कैसे लेते हैं l

ji nahi mujhe aisa nahi lagta ki filmo ko itihas se chedchad ke bina banaya jana chahiye kyunki mujhe nahi lagta ki aisi koi chedchad itihas ke saath ki jaati hai l jo itihas beet gaya hai hum use badal nahi sakte hain l humne us itihas ko kabhi dekha bhi nahi hai hum bus use padhakar jante hain l toh jis tarike se hum use padhakar jante hain usi tarike se kuch log hamein apne act ke dwara use dikhane ki koshish karte hain l ise kisi bhi prakar ka chedchad nahi kaha ja sakta hai l ab baat rahe vivadon ki jo hamare desh mein ho rahi hai toh mujhe nahi samajh mein aa raha ki hamare desh mein aakhir padmavati movie ko lekar vivaad kyon hua l naam padmavati se padmavat kar diya gaya yah mujhe samajh mein nahi aaya ya phir hamare desh ke log in chijon ko adopt nahi karna chahte ya phir agar nahi karna chahte ho toh unhe bahut pehle hi is par rok laga dena chahiye tha jaise baki ki dominet country ne lagaya hua hai l hamari country ek free country hai jaha par har kisi ko right hai apne hisab se kaam karne ka lekin agar public aise action legi toh kisi ke liye bhi kuch tip le paana sahi vaah mushkil hoga l toh mujhe nahi lagta ki filmo ke itihas ke pramukh ko itihas ke saath koi chedchad ka vasta bhi hai yah logo ki apni apni thinking hai ki use kaise lete hain l

जी नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता कि फिल्मों को इतिहास से छेड़छाड़ के बिना बनाया जाना चाहिए क्यू

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विकी पहले जो पद्मावती के लिए जितना भी विरोध हुआ था वह सब के बाद अब अगर हम पद्मावती कंडीशन देखे तो हमारे देश में बहुत अच्छे से चल रही है मूवी और सब लोग जो कि करणी सेना वाले लोग उनका विरोध कर रहे थे वह खुद उसके लिए सपोर्टर बन चुके हैं और उसको राजपूतों की बहुत अच्छी तरह से दर्शाई हुई मूवी का नाम देकर उसको सपोर्ट कर रहे हैं और लोग कह रहे हैं कि बहुत अच्छी बनी हुई है तो आप जो कहा था वह पूरी तरह से बेबुनियाद था और अब अब जो मणिकर्णिका मूवी बन रही है उसके ऊपर ब्राह्मण समाज के लोगों ने विवाद शुरू किया है यह कहकर कि उसके उसमें भी जो हिस्ट्री है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है और इतिहास की जो पिक्चर उनको गलत तरह से दर्शाया गया है तो मेरे हिसाब से तो लोगों को यह बात समझनी चाहिए कि यह सिर्फ स्पेशल मूवीस है यानी एक इंसान द्वारा बनाई गई एक कला है और जिस में अगर कुछ थोड़ा इधर-उधर ऐतिहासिक किया भी गया है तो आप उसको सिर्फ एक एंटरटेनमेंट पापा से देखने गए हैं ना कि उसे हिस्ट्री पढ़ने गए हैं स्त्री को समझने गए हैं और जैसा की मणि करने का है उसमें तो हम सभी जानते हैं कि रानी लक्ष्मी बाई की कहानी दिखाई गई है जिसमें पहले वह एक अच्छे समाज अच्छे घर से बिलॉन्ग करती थी उसके बाद वही झांसी की रानी बनी और जब उनके हस्बैंड की डेथ हो गई थी राजा की तब उसके बाद उन्होंने अपने देश का साथ संभाला पूरे उसके कर्ता-धर्ता बनी और आखिर में जो ब्रिटिश पर्सनल पर कब्जा करने की कोशिश की थी उनके देश पर उनकी जगह पर आज झांसी में तो उन्होंने उनके खिलाफ लड़ाई की थी हिस्टोरिकल से इसमें इसमें कोई छेड़छाड़ कर भी नहीं सकता यह पहले से ही सबको पता है तुझे बातें हो रही है जो विरोध हो रहा है बिल्कुल बेबुनियाद है और मुझे नहीं लगता कि मूवीस मैं कुछ भी छेड़छाड़ की जाती है तो आपको ही पहली बात तो समझना चाहिए क्योंकि चैनल है कुछ भी रियालिटी नहीं होता है एग्जैक्ट और अगर वह बन भी रही है तो आप उसको कॉमर्स नहीं देखे ना कि उससे इतिहास पढ़ने जा रहे हैं जो उससे इतना ज्यादा विरोध कर आ जा रहा है

vicky pehle jo padmavati ke liye jitna bhi virodh hua tha vaah sab ke baad ab agar hum padmavati condition dekhe toh hamare desh mein bahut acche se chal rahi hai movie aur sab log jo ki karni sena waale log unka virodh kar rahe the vaah khud uske liye supporter ban chuke hai aur usko rajputo ki bahut achi tarah se darshaii hui movie ka naam dekar usko support kar rahe hai aur log keh rahe hai ki bahut achi bani hui hai toh aap jo kaha tha vaah puri tarah se bebuniyad tha aur ab ab jo manikarnika movie ban rahi hai uske upar brahman samaj ke logo ne vivaad shuru kiya hai yah kehkar ki uske usme bhi jo history hai uske saath chedchad ki gayi hai aur itihas ki jo picture unko galat tarah se darshaya gaya hai toh mere hisab se toh logo ko yah baat samajhni chahiye ki yah sirf special Movies hai yani ek insaan dwara banai gayi ek kala hai aur jis mein agar kuch thoda idhar udhar etihasik kiya bhi gaya hai toh aap usko sirf ek Entertainment papa se dekhne gaye hai na ki use history padhne gaye hai stree ko samjhne gaye hai aur jaisa ki mani karne ka hai usme toh hum sabhi jante hai ki rani laxmi bai ki kahani dikhai gayi hai jisme pehle vaah ek acche samaj acche ghar se Belong karti thi uske baad wahi jhansi ki rani bani aur jab unke husband ki death ho gayi thi raja ki tab uske baad unhone apne desh ka saath sambhala poore uske karta dharta bani aur aakhir mein jo british personal par kabza karne ki koshish ki thi unke desh par unki jagah par aaj jhansi mein toh unhone unke khilaf ladai ki thi historical se isme isme koi chedchad kar bhi nahi sakta yah pehle se hi sabko pata hai tujhe batein ho rahi hai jo virodh ho raha hai bilkul bebuniyad hai aur mujhe nahi lagta ki Movies main kuch bhi chedchad ki jaati hai toh aapko hi pehli baat toh samajhna chahiye kyonki channel hai kuch bhi reality nahi hota hai exact aur agar vaah ban bhi rahi hai toh aap usko commerce nahi dekhe na ki usse itihas padhne ja rahe hai jo usse itna zyada virodh kar aa ja raha hai

विकी पहले जो पद्मावती के लिए जितना भी विरोध हुआ था वह सब के बाद अब अगर हम पद्मावती कंडीशन

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Ridhima

Mass Communications Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखे फिल्में बनती है इंटरटेनमेंट के लिए लोगों को एंटरटेन करने के लिए फिल्म का इसीलिए बनाते हैं फिल्में और इसमें का कोई भी बात करें तो मेरे हिसाब से यह थोड़ा इसलिए बात होता है कि जो चीज बस एंटरटेनमेंट के ऑफिस में बनाई हुई रहती है उसने भी बात करना है थे इसलिए इसलिए है क्योंकि एक चीज जो इंडीज क्रिकेट होता है वह इंटरटेनमेंट के लिए होता है अगर ठीक है वह एक खेल हो गया और उसमें वह गया प्लीज होते हैं बहुत सारे नाटक होते उसमें कोई विवाद क्यों नहीं उठाता आई थिंग जितना ज्यादा पॉपुलर ID किसी चीज का बढ़ जाता है उसने ज्यादा विवादे आती है क्योंकि वह उसका एक उसके साथ ही साथ वह एक इंटरव्यू पेंडेंट चीज है विवाद के बिना कुछ आइटम विवाद से ज्यादा तक एक तो पब्लिसिटी ठीक है बाय पब्लिसिटी भी हुई पर कुछ तो पब्लिसिटी होती है फिल्मों की राइटिंग में करनी होगी कि कुछ ना कुछ करके एक तो है कि जो जो ग्रुप से बात करते हैं उनको हाईलाइट में आने का भी बहुत यह होता है कि हां इसमें विवाद करें तो हाईलाइट होता है उतना ग्रुप हाईलाइट होता है प्लस फिल्मी हाईलाइट होती है नथिंग जो ऐतिहासिक फिल्में बनती है वह बस एक इन्फॉर्म एजुकेट करने के लिए बनती है और एंटरटेनमेंट एंटरटेनमेंट के लिए तो इसमें थोड़ा बहुत तो जो डायरेक्टर प्रोडूसर बनाते हैं वह अपना कुछ तो रीज़न डालेंगे ही क्योंकि वह फिल्म वैसे ही 18 है वह एक वैसा ही कल्चर है तो सही बात नहीं है जब विवाद ऐसे वैसे चीजों में आती है

dekhe filme banti hai entertainment ke liye logo ko entertain karne ke liye film ka isliye banate hain filme aur isme ka koi bhi baat kare toh mere hisab se yah thoda isliye baat hota hai ki jo cheez bus Entertainment ke office mein banai hui rehti hai usne bhi baat karna hai the isliye isliye hai kyonki ek cheez jo indies cricket hota hai vaah entertainment ke liye hota hai agar theek hai vaah ek khel ho gaya aur usme vaah gaya please hote hain bahut saare natak hote usme koi vivaad kyon nahi uthaata I thing jitna zyada popular ID kisi cheez ka badh jata hai usne zyada vivade aati hai kyonki vaah uska ek uske saath hi saath vaah ek interview pendent cheez hai vivaad ke bina kuch item vivaad se zyada tak ek toh publicity theek hai bye publicity bhi hui par kuch toh publicity hoti hai filmo ki writing mein karni hogi ki kuch na kuch karke ek toh hai ki jo jo group se baat karte hain unko highlight mein aane ka bhi bahut yah hota hai ki haan isme vivaad kare toh highlight hota hai utana group highlight hota hai plus filmy highlight hoti hai nothing jo etihasik filme banti hai vaah bus ek inform educate karne ke liye banti hai aur Entertainment Entertainment ke liye toh isme thoda bahut toh jo director producer banate hain vaah apna kuch toh region daalenge hi kyonki vaah film waise hi 18 hai vaah ek waisa hi culture hai toh sahi baat nahi hai jab vivaad aise waise chijon mein aati hai

देखे फिल्में बनती है इंटरटेनमेंट के लिए लोगों को एंटरटेन करने के लिए फिल्म का इसीलिए बनाते

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S

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जितनी भी मूवीस आप देखते हो वह सब काल्पनिक है l भले ही ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित होगी कोई मूवी लेकिन पूरी तरीके से एक्यूरेट कभी नहीं होती क्योंकि मूवी आप कही ना कही ऐसा पैकेज करना चाहते हो , सब बनाना चाहते हो जो जितना इंटरेस्टिंग हो सकता है उतना इंटरेस्टिंग हो l क्योंकि एंटरटेन करना आप का एक उद्देश्य होता है हर एक मूवी के साथ l कमर्शियल सिनेमा जो भी है वह तो ओबविओउसली ऐसा ही करेगा क्योंकि उनका उद्देश्य होता है मुनाफा कमाना l तो वैसे मैं वह एंटरटेनमेंट के उद्देश्य से मूवीस बनाते हैं और वैसे में वह दे आर वैरी केयर अबाउट इट l वह कुछ छुपाते नहीं आपसे l यह नहीं कहते कि हम आपको हिस्ट्री का एक लेसन देने जा रहे हैं l वह कहते कि भाई इंटरटेनमेंट के लिए, आपके मनोरंजन के लिए और उसी के लिए वह बनाई गई है l तो वैसे भी मूवीस का मुझे लगता है हिस्तोरिक्ली एक्यूरेट होना बहुत ज़रूरी है एस लॉन्ग एस जो मूवी बना रहे लोग वह यह एक्सेप्ट कर रहे, एडमिट कर रहे हैं कि भाई यह हिस्तोरिक्ली एक्यूरेट नहीं है और हिस्ट्री का लेसन नहीं है l कोई बस एंटरटेनमेंट के लिए आपके बनाई गई लॉन्ग इज धे आर ओनेस्ट टोटली कूल विथ इट l

jitni bhi Movies aap dekhte ho vaah sab kalpnik hai l bhale hi etihasik ghatnaon par aadharit hogi koi movie lekin puri tarike se ekyuret kabhi nahi hoti kyonki movie aap kahi na kahi aisa package karna chahte ho sab banana chahte ho jo jitna interesting ho sakta hai utana interesting ho l kyonki entertain karna aap ka ek uddeshya hota hai har ek movie ke saath l commercial cinema jo bhi hai vaah toh obaviousali aisa hi karega kyonki unka uddeshya hota hai munafa kamana l toh waise main vaah Entertainment ke uddeshya se Movies banate hain aur waise mein vaah de R vary care about it l vaah kuch chhupaate nahi aapse l yah nahi kehte ki hum aapko history ka ek Lesson dene ja rahe hain l vaah kehte ki bhai entertainment ke liye aapke manoranjan ke liye aur usi ke liye vaah banai gayi hai l toh waise bhi Movies ka mujhe lagta hai historikli ekyuret hona bahut zaruri hai s long s jo movie bana rahe log vaah yah except kar rahe admit kar rahe hain ki bhai yah historikli ekyuret nahi hai aur history ka Lesson nahi hai l koi bus Entertainment ke liye aapke banai gayi long is dhe R onest totally cool with it l

जितनी भी मूवीस आप देखते हो वह सब काल्पनिक है l भले ही ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित होगी कोई म

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Anukrati

Journalism Graduate

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सभी मूवीस काल्पनिक होती है पहले से ही आप अगर मूवी देखने जाते हैं तो उससे पहले आप को चेतावनी दी दे दी जाती है कि यह काल्पनिक है किसी किस चीज से इंस्पायर्ड जरूर हो सकती है पर ऐसा नहीं है कि वही की वही चीज बताई गई हो अगर यह सब चीजें कविताओं में या किताबों में आप परमिशन दे देते हैं करने की तो मूवीस में क्यों नहीं आखिर वह भी तो एक तरह का आती है यह आर्टिस्टिक फ्रीडम होनी चाहिए कि कोई किसी भी तरह की मूवी बना सके पद्मावत एक कविता से इंसपायर्ड थी तो उस मूवी पर इतना विरोध हुआ उस कविता पर कभी क्यों नहीं हुआ वहीं मणिकर्णिका भी एक किताब से इंसपायर्ड है तो आप उस मूवी पर विरोध कर रहे हैं उस किताब पर नहीं कर रहे हैं ऐसा क्यों जबकि किताब तो और ज्यादा उसमें आनी चाहिए कि आप विरोध करें कि लोग इसे आगे जाकर कई सालों तक पढ़ेंगे पर अगर उस चीज में हम लोग एक्सेप्ट कर लेते हैं तो मुझे नहीं लगता है कि मूवीस पर भी हमें विरोध करना चाहिए हमें यह बात समझनी चाहिए कि वह बनाने वाले की क्रिएटिव फ्रीडम है अगर किसी को मूवी नहीं देखनी है तो वह ना देखें आप यह क्यों सोचते हैं कि वह एग्जैक्ट ली हिस्ट्री को बताती है जबकि हम सब जानते हैं कि ऐसा होना नामुमकिन है कि हम जैसा हिस्ट्री में हुआ है वैसा का वैसा दर्शाए फिल्मों को इतिहास से छेड़छाड़ के बिना बनाया जाना चाहिए यह तो मुझे सवाल ही गलत लगता है क्योंकि इतिहास से इंसपायर्ड फिल्में होती हैं उन पर बनी भी नहीं होती हैं

sabhi Movies kalpnik hoti hai pehle se hi aap agar movie dekhne jaate hai toh usse pehle aap ko chetavani di de di jaati hai ki yah kalpnik hai kisi kis cheez se inspired zaroor ho sakti hai par aisa nahi hai ki wahi ki wahi cheez batai gayi ho agar yah sab cheezen kavitao mein ya kitabon mein aap permission de dete hai karne ki toh Movies mein kyon nahi aakhir vaah bhi toh ek tarah ka aati hai yah artistic freedom honi chahiye ki koi kisi bhi tarah ki movie bana sake padmavat ek kavita se insapayard thi toh us movie par itna virodh hua us kavita par kabhi kyon nahi hua wahi manikarnika bhi ek kitab se insapayard hai toh aap us movie par virodh kar rahe hai us kitab par nahi kar rahe hai aisa kyon jabki kitab toh aur zyada usme aani chahiye ki aap virodh kare ki log ise aage jaakar kai salon tak padhenge par agar us cheez mein hum log except kar lete hai toh mujhe nahi lagta hai ki Movies par bhi hamein virodh karna chahiye hamein yah baat samajhni chahiye ki vaah banane waale ki creative freedom hai agar kisi ko movie nahi dekhni hai toh vaah na dekhen aap yah kyon sochte hai ki vaah exact li history ko batati hai jabki hum sab jante hai ki aisa hona namumkin hai ki hum jaisa history mein hua hai waisa ka waisa darshaye filmo ko itihas se chedchad ke bina banaya jana chahiye yah toh mujhe sawaal hi galat lagta hai kyonki itihas se insapayard filme hoti hai un par bani bhi nahi hoti hain

सभी मूवीस काल्पनिक होती है पहले से ही आप अगर मूवी देखने जाते हैं तो उससे पहले आप को चेतावन

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