हमें गुस्सा बहुत आता है और हर बात पर चिढ़ होती है, तो हमें क्या करना चाहिए?...


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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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ऐसे और सवाल
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Rimjhim Singh

Behavioral Science, Personality Development, Soft Skills, English Language, V&A, IELTS, TOEFL, PTE Trainer; PET, Life Reinvent Coach & Motivational Speaker

2:20

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए गुस्सा जो है एक बहुत ही नेगेटिव इमोशन है जो आपको एक आंख की तरह महसूस होता है गुस्सा आता है ताकि हम नुकसान पहुंचा सके अपनी प्रतिक्रिया दे सके कहीं ना कहीं तुझे गुस्सा होता है उसे मैं हमेशा ही सब से कहती हूं कि एक आंख की तरह समझ गए जो कि दूसरे को तो चलाता ही है दूसरा जो इंसान है या वस्तु से नुकसान पहुंचाता है लेकिन अंत में सब को दूर करने के बाद को जला देने के बाद जो आग होती है वह स्वयं को भी खाक में मिला लेती है तुझे गुस्सा आए तो सबसे पहले तो हम जो गुस्से का कारण है उसे बहुत ही राजस्थानी समझने की कोशिश करें गुस्सा में आता है परिस्थितियों और लोगों पर जो कि हमारे मर्जी के अनुरूप काम नहीं करते तो बेस्ट क्या है हम सोचे कि उसकी जगह पर हम होते तो क्या हमारा भी वही प्रतिक्रिया नहीं होती सामने वाले की जो रही तुम्हारा तो गुस्सा तो वही जो है उतर जाएगा दूसरों को समझना नहीं कहूंगी मैं से कहीं ना कहीं खुद को दूसरों की जगह रखना बेहद जरूरी है ताकि आप खुद को अपने ही गुस्से से बचा सकें लेकिन अगर आप चाहे तो थोड़ा सब सेल्फिश होकर सोचे क्या तो खुद को नुकसान नहीं पहुंचाना इसलिए आप गुस्सा नहीं करेंगे क्योंकि दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए आप खुद को अगर कहीं ना कहीं बात कर रहे हैं तो वह तो कोई फायदे का सौदा हुआ नहीं गुस्सा जो है उसे आप खेती की तरह जो है कल्टीवेट कीजिए पाली और उसे चैनेलाइज कीजिए और कुछ बाबा गुस्से को अपने पास पालते हैं जब उसे रखते हैं तो वह बहुत ही पॉजिटिव एनर्जी में कन्वर्ट हो सकता है वह कोयले की तरह है जिसे आप चलाइए नहीं अब से अपने पास रखी है अपने अंदर जो है उसको प्रॉपर कंडीशनिंग कीजिए वह आपको हीरा बना कर देगा परिस्थितियों का सामना कीजिए और उस समय के लिए गुस्सा पी लीजिए जैसे जो है विष पी लिया था उसे अपने पास रखिए और देखिए आप लंबे समय में जो गुस्सा है आपको पिस्टल दिखाएगा और आपको जिस से भी आपका जिसकी वजह से अपमान किया है आपको परेशान किया है वह कहीं ना कहीं आपके बिना कुछ भी प्रतिक्रिया दे आपके सामने शर्मिंदा नजर आएगा धन्यवाद

dekhiye gussa jo hai ek bahut hi Negative emotion hai jo aapko ek aankh ki tarah mehsus hota hai gussa aata hai taki hum nuksan pohcha sake apni pratikriya de sake kahin na kahin tujhe gussa hota hai use main hamesha hi sab se kehti hoon ki ek aankh ki tarah samajh gaye jo ki dusre ko toh chalata hi hai doosra jo insaan hai ya vastu se nuksan pohchta hai lekin ant mein sab ko dur karne ke baad ko jala dene ke baad jo aag hoti hai vaah swayam ko bhi khak mein mila leti hai tujhe gussa aaye toh sabse pehle toh hum jo gusse ka karan hai use bahut hi rajasthani samjhne ki koshish kare gussa mein aata hai paristhitiyon aur logo par jo ki hamare marji ke anurup kaam nahi karte toh best kya hai hum soche ki uski jagah par hum hote toh kya hamara bhi wahi pratikriya nahi hoti saamne waale ki jo rahi tumhara toh gussa toh wahi jo hai utar jaega dusro ko samajhna nahi kahungi main se kahin na kahin khud ko dusro ki jagah rakhna behad zaroori hai taki aap khud ko apne hi gusse se bacha sake lekin agar aap chahen toh thoda sab selfish hokar soche kya toh khud ko nuksan nahi pahunchana isliye aap gussa nahi karenge kyonki dusre ko nuksan pahunchane ke liye aap khud ko agar kahin na kahin baat kar rahe hain toh vaah toh koi fayde ka sauda hua nahi gussa jo hai use aap kheti ki tarah jo hai kaltivet kijiye paali aur use chainelaij kijiye aur kuch baba gusse ko apne paas palate hain jab use rakhte hain toh vaah bahut hi positive energy mein convert ho sakta hai vaah koyle ki tarah hai jise aap chalaiye nahi ab se apne paas rakhi hai apne andar jo hai usko proper Conditioning kijiye vaah aapko heera bana kar dega paristhitiyon ka samana kijiye aur us samay ke liye gussa p lijiye jaise jo hai vish p liya tha use apne paas rakhiye aur dekhiye aap lambe samay mein jo gussa hai aapko pistol dikhaega aur aapko jis se bhi aapka jiski wajah se apman kiya hai aapko pareshan kiya hai vaah kahin na kahin aapke bina kuch bhi pratikriya de aapke saamne sharminda nazar aayega dhanyavad

देखिए गुस्सा जो है एक बहुत ही नेगेटिव इमोशन है जो आपको एक आंख की तरह महसूस होता है गुस्सा

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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

2:30
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह बहुत ही अच्छी बात है कि आपने खुद से अपने अंदर इस बात को रिलाइज किया कि आपको हर बात पर गुस्सा आता है और चूची होती है तो आप का 25% काम तो हो गया समझो अब मैं आपको इस प्रॉब्लम के सलूशन में दो चीजें बताना चाहूंगी एक है जिसका long-term रिजल्ट आएगा कि आप मेडिटेशन करना शुरू करें और दमोह सिंपलेस्ट एंड द बेस्ट मेडिटेशन इन दिस वर्ल्ड कि आप सिर्फ बैठे आंखें बंद करके और अपनी सांसो पर ध्यान दें कि आपकी सांस कैसे चल रही है तेज है धीरे है लंबी है गहरी है गर्म आ रही है ठंडी जा रही है किधर से आ रही है किधर जा रही है जब अंदर लेते हैं तो हवा का एहसास कहां होता है जब बाहर छोड़ते हैं तो वह हवा कहां टच होती है इस तरीके से सिर्फ एहसास की हर चीज के ऊपर ध्यान थे बीच-बीच में आपके दिमाग में अलग-अलग तरह के ख्याल आएंगे कोई बात नहीं हम खयालों को आने दे आप फिर से सांस पर ध्यान देना शुरू करें इस तरीके से आप सुबह शाम दर्द अगर करना स्टार्ट करते हो तो इसके आपको सिर्फ गुस्से पर कंट्रोल ही नहीं और भी बहुत सारे हजारों फायदे होंगे तो एक सवाल का एक का सलूशन तो यह हो क्या आपकी प्रॉब्लम का दूसरा शॉर्ट टर्म के लिए बहुत ही सिंपल सी चीज है जिस वक्त आपको गुस्सा आता है तो आप इस बात को थोड़ा गहराई से समझने की कोशिश करें कि हमारे सामने सिचुएशन कुछ होती है मान लीजिए किसी ने आपसे कुछ कह दिया जो आप नहीं सुनना चाहते थे या फिर किसी भी वह नहीं कहा जो आप सुनना चाहते थे यह दो ही रीजन होते हैं गुस्से के आने के लिए तू या आपके मन की नहीं हुई या अन जो आपके मन में नहीं था वह हो गई तो जब कभी भी ऐसा होता है और आपको गुस्सा आने लगता है उस समय आप जब गुस्सा मुझे कैसे आ रहा है कहां से क्रिएट हो रहा है बाहर यह हुआ और अंदर मेरे क्या चल रहा है जिसकी वजह से मैं गुस्सा कर रहा हूं तो अगर आपने इन बारी क्यों को पकड़ना सीख लिया तो आप देखेंगे धीरे-धीरे आपका गुस्सा बिल्कुल शांत हो जाएगा अपने आप बिना किसी और के साथ मेरी उम्र 2 साल आपको माने और यह मेरा अपना एक स्पीड है कि एक टाइम था जब मुझे बहुत गुस्सा आता था और आज मुझे 99.9% मेरा गुस्सा शांत हो चुका तो मैं आपको वही सलाह दे रही हूं जो चीजें मैंने अपना ही है आप यह करें आपको जरूर आपने समस्या का समाधान मिलेगा

yah bahut hi achi baat hai ki aapne khud se apne andar is baat ko rilaij kiya ki aapko har baat par gussa aata hai aur choochi hoti hai toh aap ka 25 kaam toh ho gaya samjho ab main aapko is problem ke salution mein do cheezen bataana chahungi ek hai jiska long term result aayega ki aap meditation karna shuru kare aur damoh simpalest and the best meditation in this world ki aap sirf baithe aankhen band karke aur apni saanso par dhyan de ki aapki saans kaise chal rahi hai tez hai dhire hai lambi hai gehri hai garam aa rahi hai thandi ja rahi hai kidhar se aa rahi hai kidhar ja rahi hai jab andar lete hain toh hawa ka ehsaas kahaan hota hai jab bahar chodte hain toh vaah hawa kahaan touch hoti hai is tarike se sirf ehsaas ki har cheez ke upar dhyan the beech beech mein aapke dimag mein alag alag tarah ke khayal aayenge koi baat nahi hum khayalo ko aane de aap phir se saans par dhyan dena shuru kare is tarike se aap subah shaam dard agar karna start karte ho toh iske aapko sirf gusse par control hi nahi aur bhi bahut saare hazaro fayde honge toh ek sawaal ka ek ka salution toh yah ho kya aapki problem ka doosra short term ke liye bahut hi simple si cheez hai jis waqt aapko gussa aata hai toh aap is baat ko thoda gehrai se samjhne ki koshish kare ki hamare saamne situation kuch hoti hai maan lijiye kisi ne aapse kuch keh diya jo aap nahi sunana chahte the ya phir kisi bhi vaah nahi kaha jo aap sunana chahte the yah do hi reason hote hain gusse ke aane ke liye tu ya aapke man ki nahi hui ya an jo aapke man mein nahi tha vaah ho gayi toh jab kabhi bhi aisa hota hai aur aapko gussa aane lagta hai us samay aap jab gussa mujhe kaise aa raha hai kahaan se create ho raha hai bahar yah hua aur andar mere kya chal raha hai jiski wajah se main gussa kar raha hoon toh agar aapne in baari kyon ko pakadna seekh liya toh aap dekhenge dhire dhire aapka gussa bilkul shaant ho jaega apne aap bina kisi aur ke saath meri umr 2 saal aapko maane aur yah mera apna ek speed hai ki ek time tha jab mujhe bahut gussa aata tha aur aaj mujhe 99 9 mera gussa shaant ho chuka toh main aapko wahi salah de rahi hoon jo cheezen maine apna hi hai aap yah kare aapko zaroor aapne samasya ka samadhan milega

यह बहुत ही अच्छी बात है कि आपने खुद से अपने अंदर इस बात को रिलाइज किया कि आपको हर बात पर ग

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Vikas Singh

Political Analyst

4:05
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपको गुस्सा बहुत आता है और आपको हर बात पर छूट पड़ती है आपको क्या करना चाहिए गुस्सा तो मुझे भी आता है लेकिन गलत बात पर आता है हमारे समाज में जो लोग गलत बात करते हैं भ्रष्टाचारी विचारधारा के लोग हैं राष्ट्र विरोधी विचारधारा के लोग हैं जब यह लोग हमसे बात करते हो तो हमको भी बहुत गुस्सा बढ़ता है क्योंकि मैं देशभक्त हूं देश से प्रेम करने वाला हूं मेरे रग-रग में अपने हिंदुस्तान के लिए प्रेम भरा हुआ है जब मुझसे कोई देश विरोधी बात करता है ना तो मेरा खून खौल ने लगता है मुझे मन करता है कि या तो मार दूं या तो खुद हट जाओ यहां से दूर हट जाओ लेकिन सोचता हूं कि ऐसे लोगों को सुधारना बहुत जरूर जरूरी है क्योंकि आज राष्ट्र विरोधी बात कर रहे हैं हमसे कल दूसरे जगह बात करेंगे कल तीसरे जगह बात करेंगे सब जगह जा जा कर यह बात करेंगे और लोगों को भी गाड़ेंगे ऐसे लोगों को सबक सिखाना बहुत जरूरी है आपको गुस्सा आता है अच्छी बात है गुस्सा आना बहुत अच्छी बात है अब गुस्सा नहीं आना भी बहुत अच्छी बात है जो गलत बात करें जो राष्ट्र विरोधी विचार से आपके सामने अपने बातों को प्रस्तुत करें ऐसे लोगों के ऊपर गुस्सा होना बहुत जरूरी है तो गुस्सा में आप उनको समझा आएंगे तब वह समझेंगे वह लाइन पर आएंगे हां जब आप तो कोई प्यार से बात करता है कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति अच्छी बात करता है तो आप उसके ऊपर गुस्सा मत करिए उससे प्यार से बात करिए मोहब्बत से बात करिए इतने अच्छे से बात करिए कि उसको भी अच्छा लगे और आपको भी अच्छा लगे तो कहने का मतलब है गुस्सा आना भी जरूरी है और गुस्सा नहीं आना भी जरूरी है हमेशा गुस्सा में भी रहना बहुत गलत बात है कुछ लोग चौबीसों घंटा गुस्सा में रहते हैं क्योंकि उनके दिमाग में कहीं न कहीं किसी के प्रति नफरत भरी होती है उस नफरत को निकालने की जरूरत है दोस्तों इस नफरत को आप निकालेंगे फिर जब आप कार्य करेंगे प्यार मोहब्बत से तभी समाज का विकास होगा समाज में सुधार होगा संघवाद वार्तालाप एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे सब को सुधारा जा सकता है संवाद करना अच्छी बात है लेकिन संगवाद गलत तरीके से करना अच्छी बात नहीं है कुछ लोग संवाद में भ्रष्टाचारी भावना से बात करते हैं आपने देखा होगा कांग्रेस पार्टी के जो प्रवक्ता होते हैं हमेशा गलत विचार से प्रस्तुत होते हैं हम तो डूबेंगे सनम आपको भी ले कर दूं देंगे पूरा डूबा दिया इन लोगों ने कांग्रेस पार्टी को जो डूबा कांग्रेस पार्टी हम धारा 370 खत्म नहीं होने देंगे हम राम मंदिर बनने नहीं देंगे जिस राम ने आपको बनाया है उस राम का मंदिर अगर आप नहीं बनने देंगे तो क्या धरती पर आ पाएंगे नहीं रह पाएंगे हमेशा सच्ची राजनीति करिए बच्चे लोगों का समर्थन करिए सच्चे लोगों के समर्थन में अगर आपका गुस्सा आता है राष्ट्र विरोधियों के खिलाफ तो गुस्सा आना चाहिए कोशिश करिए कि हर एक बात पर चढ़ना हो एकदम प्यार से बात करिए मिलजुलकर रहिए और कभी भी मन में किसी के प्रति द्वेष मत रखिए जो गलत लोग हैं अगर वह आपके बात से मानते नहीं हैं तो आप उसे दूर हट जाइए नासमझ को एक दो बार समझाने की कोशिश की जाती है अगर वह समझ नहीं पाता है तो तुझसे दूर हट जाइए दूरी बनाइए ऐसे लोगों से क्योंकि नासमझ को समझाने वाला भी बेवकूफ होता है जो समझ नहीं उसे समझाने की क्या जरूरत है तो सही समय पर गुस्सा करिए और गुस्सा आना चाहिए सही समय पर धन्यवाद

aapko gussa bahut aata hai aur aapko har baat par chhut padti hai aapko kya karna chahiye gussa toh mujhe bhi aata hai lekin galat baat par aata hai hamare samaj mein jo log galat baat karte hain bhrashtachaari vichardhara ke log hain rashtra virodhi vichardhara ke log hain jab yah log humse baat karte ho toh hamko bhi bahut gussa badhta hai kyonki main deshbhakt hoon desh se prem karne vala hoon mere rug rug mein apne Hindustan ke liye prem bhara hua hai jab mujhse koi desh virodhi baat karta hai na toh mera khoon khaul ne lagta hai mujhe man karta hai ki ya toh maar doon ya toh khud hut jao yahan se dur hut jao lekin sochta hoon ki aise logo ko sudharna bahut zaroor zaroori hai kyonki aaj rashtra virodhi baat kar rahe hain humse kal dusre jagah baat karenge kal teesre jagah baat karenge sab jagah ja ja kar yah baat karenge aur logo ko bhi gadenge aise logo ko sabak sikhaana bahut zaroori hai aapko gussa aata hai achi baat hai gussa aana bahut achi baat hai ab gussa nahi aana bhi bahut achi baat hai jo galat baat kare jo rashtra virodhi vichar se aapke saamne apne baaton ko prastut kare aise logo ke upar gussa hona bahut zaroori hai toh gussa mein aap unko samjha aayenge tab vaah samjhenge vaah line par aayenge haan jab aap toh koi pyar se baat karta hai koi padha likha vyakti achi baat karta hai toh aap uske upar gussa mat kariye usse pyar se baat kariye mohabbat se baat kariye itne acche se baat kariye ki usko bhi accha lage aur aapko bhi accha lage toh kehne ka matlab hai gussa aana bhi zaroori hai aur gussa nahi aana bhi zaroori hai hamesha gussa mein bhi rehna bahut galat baat hai kuch log chaubison ghanta gussa mein rehte hain kyonki unke dimag mein kahin na kahin kisi ke prati nafrat bhari hoti hai us nafrat ko nikalne ki zarurat hai doston is nafrat ko aap nikalenge phir jab aap karya karenge pyar mohabbat se tabhi samaj ka vikas hoga samaj mein sudhaar hoga sanghavad vartalaap ek aisi prakriya hai jisse sab ko sudhara ja sakta hai samvaad karna achi baat hai lekin sangavad galat tarike se karna achi baat nahi hai kuch log samvaad mein bhrashtachaari bhavna se baat karte hain aapne dekha hoga congress party ke jo pravakta hote hain hamesha galat vichar se prastut hote hain hum toh dubenge sanam aapko bhi le kar doon denge pura dooba diya in logo ne congress party ko jo dooba congress party hum dhara 370 khatam nahi hone denge hum ram mandir banne nahi denge jis ram ne aapko banaya hai us ram ka mandir agar aap nahi banne denge toh kya dharti par aa payenge nahi reh payenge hamesha sachi raajneeti kariye bacche logo ka samarthan kariye sacche logo ke samarthan mein agar aapka gussa aata hai rashtra virodhiyon ke khilaf toh gussa aana chahiye koshish kariye ki har ek baat par chadhna ho ekdam pyar se baat kariye miljulakar rahiye aur kabhi bhi man mein kisi ke prati dvesh mat rakhiye jo galat log hain agar vaah aapke baat se maante nahi hain toh aap use dur hut jaiye nasamajh ko ek do baar samjhane ki koshish ki jaati hai agar vaah samajh nahi pata hai toh tujhse dur hut jaiye doori banaiye aise logo se kyonki nasamajh ko samjhane vala bhi bewakoof hota hai jo samajh nahi use samjhane ki kya zarurat hai toh sahi samay par gussa kariye aur gussa aana chahiye sahi samay par dhanyavad

आपको गुस्सा बहुत आता है और आपको हर बात पर छूट पड़ती है आपको क्या करना चाहिए गुस्सा तो मुझे

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Vinod Pathak

Journalist And Theosophist

4:54
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

किसी साथी ने सवाल पूछ रहा है हमें गुस्सा बहुत आता है और हर बात पर शुरू होती है तो हमें क्या करना चाहिए मित्र यह सवाल आपका ही नहीं है यह कई लोगों से जुड़ा हुआ है अगर इस ट्रेन में से देखा जाए तो हंड्रेड में से 80% लोग तो हमारा सुझाव सबसे पहले यह है कि आपको सबसे पहले अपने स्वास्थ्य की जांच की जानी चाहिए और मानसिक स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए अगर आप दोनों ही तरह से फिट हैं अगर आपको कोई भी समस्या ऐसी नहीं लग रही है डॉक्टर से कल सेट करने के बाद भी ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं लग रही है तो आपके लिए ही सोचने जैसी बात है या फिर आपको एक नए सिरे से अपनी लाइफ को अलेसिस करने की और मंथन करने की जरूरत है यह बहुत ही समझने जैसी चीज है कि आखिर क्रोध आता कहां से है इसकी बुनियाद क्या है तो क्रोध कोई ऐसा नहीं है कि जो कि बाय बर्थ हम लेकर पैदा हो ऐसा नहीं है भाई बर्थ नहीं होता है या हम जोगलेकर पैदा होते हैं भाई बरथु प्रेम लेकर पैदा होता है सब तो हम क्रिएट करते हैं ऐसे कि समुद्र में बूंद के समान है आपका स्वभाव है प्रिंस का स्वभाव है ना कि कुरुद का स्वभाव है क्रोध के स्वभाव को आप ने जबरन डाला है उसमें कभी भी आप अगर आपको मेरी बात सिद्ध करनी हो यार प्रैक्टिकली करनी हो तो कभी भी आप देख लीजिएगा कि आप सामान्य तौर पर जो जीवन जीते हैं यह जब खुश होते हैं जब प्रेम पूर्ण होते हैं जब प्रेम भाव से भरे होते हैं उसमें आपका चेहरा कैसा होता है वह आपका पूर्णता का स्वभाव है इसके इतर जब पूरे दिन में दो बार या पांच बार कितनी बार कराएगा और खुद ही कर लीजिएगा और उसकी वजह से मौत की वजह से विकृति स्क्रीन पर ही नहीं आती है इसकी वजह से शरीर पर इसका बहुत बड़ा फर्क पड़ता है प्रेम अंदर सुंदरता है और गुस्सा आया क्रोध यह बाहर से आरोपित किया जाता है बाहर से आरोपी जिन चीजों को भी हम सुता स्वीकार लेते हैं बाहर चारों की चीजों को तो फिर उसकी उत्पत्ति नकारात्मक ही होगी एग्जांपल के तौर पर देख लिया अगर किसी ने गाली हमने उसकी गली को स्वीकार किया तूने गुस्सा आया अगर मुझ को स्वीकार ही नहीं कर रहे हैं उन काली का जवाब भी हम प्रेम से दे रहे हैं तो हम तो अपनी पूर्णता में रह गए सामने सामने वाला अपूर्ण है तो तकलीफ उसको होगी क्रोध उसको आएगा और तुमने अगर अपने आपको अपनी पूर्णता को फॉलो किया तो फिर तुम्हारा जो मैं फ्री में हूं पड़ेगा उसका जो क्रोध है क्रोध करने से पड़ेगा एक दिन ऐसा आएगा जब उसको यह चीज लगेगी अगर और उसके बदले हम को पर मिल रहा है आपके चेहरे की हंसी आपके चेहरे की खुशी देख कर के आप के चेहरे का सौंदर्य देखकर के उसको जलन होनी चाहिए क्योंकि दूसरों से क्या नुकसान कर रहा है अपना तुम प्रेम पूर्ण होकर के क्या फायदे ले रहे हो इस पर पदस्थ हैं क्रोध आरोपित है वह प्रेम प्रेम हमारा स्वभाव है तब अपने स्वभाव में क्यों ना रहे अब अपने स्वभाव में रहेंगे तो हम पूर्ण तक उपलब्ध होंगे अगर हम कभी भी ऐसा है जब आपको लगे आपको बहुत ज्यादा क्रोध आ रहा है सीधा सा उपाय है कि आप पर बारात आई ना उठा कर के देख लीजिए और जो गहरी सांस ली और उसके बाद प्रेम से जब भर जाए तो दोबारा वापस आए उसी जगह पर और मुस्कुराते हुए हंसते हुए उसको रिप्लाई दीजिए देखी फिर क्या परिवर्तन आता है बहुत अमूल चूल परिवर्तन आएगा हमेशा 21 को याद रखिए हमेशा यू अरे लिविंग इन ए स्मॉल इंटरनल एनर्जी अपील करनी चाहिए थैंक यू

kisi sathi ne sawaal puch raha hai hamein gussa bahut aata hai aur har baat par shuru hoti hai toh hamein kya karna chahiye mitra yah sawaal aapka hi nahi hai yah kai logo se jinko hua hai agar is train mein se dekha jaaye toh hundred mein se 80 log toh hamara sujhaav sabse pehle yah hai ki aapko sabse pehle apne swasthya ki jaanch ki jani chahiye aur mansik swasthya ki jaanch karni agar aap dono hi tarah se fit hain agar aapko koi bhi samasya aisi nahi lag rahi hai doctor se kal set karne ke baad bhi aisi koi problem nahi lag rahi hai toh aapke liye hi sochne jaisi baat hai ya phir aapko ek naye sire se apni life ko alesis karne ki aur manthan karne ki zarurat hai yah bahut hi samjhne jaisi cheez hai ki aakhir krodh aata kahaan se hai iski buniyad kya hai toh krodh koi aisa nahi hai ki jo ki bye birth hum lekar paida ho aisa nahi hai bhai birth nahi hota hai ya hum joglekar paida hote hain bhai barthu prem lekar paida hota hai sab toh hum create karte hain aise ki samudra mein boond ke saman hai aapka swabhav hai prince ka swabhav hai na ki kurud ka swabhav hai krodh ke swabhav ko aap ne jabran dala hai usme kabhi bhi aap agar aapko meri baat siddh karni ho yaar practically karni ho toh kabhi bhi aap dekh lijiega ki aap samanya taur par jo jeevan jeete hain yah jab khush hote hain jab prem purn hote hain jab prem bhav se bhare hote hain usme aapka chehra kaisa hota hai vaah aapka purnata ka swabhav hai iske itra jab poore din mein do baar ya paanch baar kitni baar karaega aur khud hi kar lijiega aur uski wajah se maut ki wajah se vikriti screen par hi nahi aati hai iski wajah se sharir par iska bahut bada fark padta hai prem andar sundarta hai aur gussa aaya krodh yah bahar se aropit kiya jata hai bahar se aaropi jin chijon ko bhi hum suta sweekar lete hain bahar charo ki chijon ko toh phir uski utpatti nakaratmak hi hogi example ke taur par dekh liya agar kisi ne gaali humne uski gali ko sweekar kiya tune gussa aaya agar mujhse ko sweekar hi nahi kar rahe hain un kali ka jawab bhi hum prem se de rahe hain toh hum toh apni purnata mein reh gaye saamne saamne vala apurn hai toh takleef usko hogi krodh usko aayega aur tumne agar apne aapko apni purnata ko follow kiya toh phir tumhara jo main free mein hoon padega uska jo krodh hai krodh karne se padega ek din aisa aayega jab usko yah cheez lagegi agar aur uske badle hum ko par mil raha hai aapke chehre ki hansi aapke chehre ki khushi dekh kar ke aap ke chehre ka saundarya dekhkar ke usko jalan honi chahiye kyonki dusro se kya nuksan kar raha hai apna tum prem purn hokar ke kya fayde le rahe ho is par padasth hain krodh aropit hai vaah prem prem hamara swabhav hai tab apne swabhav mein kyon na rahe ab apne swabhav mein rahenge toh hum purn tak uplabdh honge agar hum kabhi bhi aisa hai jab aapko lage aapko bahut zyada krodh aa raha hai seedha sa upay hai ki aap par baraat I na utha kar ke dekh lijiye aur jo gehri saans li aur uske baad prem se jab bhar jaaye toh dobara wapas aaye usi jagah par aur muskurate hue hansate hue usko reply dijiye dekhi phir kya parivartan aata hai bahut amul chula parivartan aayega hamesha 21 ko yaad rakhiye hamesha you are living in a small internal energy appeal karni chahiye thank you

किसी साथी ने सवाल पूछ रहा है हमें गुस्सा बहुत आता है और हर बात पर शुरू होती है तो हमें क्य

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

4:14
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमें गुस्सा बहुत आता है और हर बात पर तिल हो तो हमें क्या करना चाहिए गुस्सा आने का कारण क्या है वह अलग विषय है लेकिन जब भी किसी भी इंसान को गुस्सा है जिससे को हम प्रार्थना करते हैं सामने वाले व्यक्ति के चेहरे वह बातों से चाहे हम वायलेंस करते हैं या फिर अपने आप के ऊपर ऊपर गुस्सा वाले ट्रांसफर होता है इसलिए इसका एक अच्छा नुस्खा मैं आपको बताऊं कि जब भी गुस्सा आए तो गुस्से में बहुत सी ताकत होती उस लड़की को हम किसी भी रिलीज करना चाहते हैं उसके उस समय जब भी गुस्सा आए तो मुझसे को रिलीज करने के लिए ट्रांसफर करने के लिए कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए कि हमारी कैलोरी जाता बंद हो कैलोरी बंद करने के लिए जो भी एक्सरसाइज या जो भी आप कुछ करना चाहते हैं आप जरूर पर अगर आप कुछ तोड़फोड़ करना चाहते हैं तो फिर भी उसी के ऊपर जरूर कीजिए ताकि आपका गुस्सा रिलीज बॉक्सिंग कीजिए जो पैसे की रैली ऑफिस के साथ बैठक की याद दौड़ कदमताल कभी खुशी कभी लेकिन जब तक आपका गुस्सा निकलेगा नहीं आपकी जो मर्जी हो जब तक रिलीज नहीं होगी तब तक पैदल जाने दीजिए लेकिन किसानों के कोई अपनी वाणी से नहीं इसलिए गुस्सा कब निकल जाता है एनर्जी जो आपकी पॉजिटिव लेने चली जाती है तो आपको हल्का पर महसूस होता है और आप कुछ सोचने समझने की स्थिति में आ जाती भोंकते सही समय को देखा है जो गुस्से के पहले अपना घर संसार अपना संबंध बहुत कुछ गंवा चुके हैं लेकिन कुछ लोगों को ऐसे भी गुस्से के समय दरवाजे के ऊपर अपना हाथ मुक्का मार उन्होंने जब हाथ में चोट लग गई है तो शांति से बैठ जाते हैं इसलिए गुस्से को जो इमोशंस कोई भी करो लेकिन बिजली होना जरूरी है तो प्लीज होना चाहिए वरना हमारे मन और दिमाग पर असर दूसरों के विचार अलग हो सकते हैं लोग कहते हैं कि मेडिटेशन ऑर्डर योगा करिए लेकिन जब गुस्सा आता है तो यह कोई भी बातें हमें नहीं है और हमारे पास इस समय बहुत ही कम हो जाने के बाद अपने आप को बहुत कंट्रोल योर सेल्फ

hamein gussa bahut aata hai aur har baat par til ho toh hamein kya karna chahiye gussa aane ka karan kya hai vaah alag vishay hai lekin jab bhi kisi bhi insaan ko gussa hai jisse ko hum prarthna karte hai saamne waale vyakti ke chehre vaah baaton se chahen hum violence karte hai ya phir apne aap ke upar upar gussa waale transfer hota hai isliye iska ek accha nuskha main aapko bataun ki jab bhi gussa aaye toh gusse mein bahut si takat hoti us ladki ko hum kisi bhi release karna chahte hai uske us samay jab bhi gussa aaye toh mujhse ko release karne ke liye transfer karne ke liye kuch na kuch aisa karna chahiye ki hamari calorie jata band ho calorie band karne ke liye jo bhi exercise ya jo bhi aap kuch karna chahte hai aap zaroor par agar aap kuch thorphor karna chahte hai toh phir bhi usi ke upar zaroor kijiye taki aapka gussa release boxing kijiye jo paise ki rally office ke saath baithak ki yaad daudh kadamatal kabhi khushi kabhi lekin jab tak aapka gussa niklega nahi aapki jo marji ho jab tak release nahi hogi tab tak paidal jaane dijiye lekin kisano ke koi apni vani se nahi isliye gussa kab nikal jata hai energy jo aapki positive lene chali jaati hai toh aapko halka par mehsus hota hai aur aap kuch sochne samjhne ki sthiti mein aa jaati bhonkte sahi samay ko dekha hai jo gusse ke pehle apna ghar sansar apna sambandh bahut kuch ganva chuke hai lekin kuch logo ko aise bhi gusse ke samay darwaze ke upar apna hath mukka maar unhone jab hath mein chot lag gayi hai toh shanti se baith jaate hai isliye gusse ko jo emotional koi bhi karo lekin bijli hona zaroori hai toh please hona chahiye varna hamare man aur dimag par asar dusro ke vichar alag ho sakte hai log kehte hai ki meditation order yoga kariye lekin jab gussa aata hai toh yah koi bhi batein hamein nahi hai aur hamare paas is samay bahut hi kam ho jaane ke baad apne aap ko bahut control your self

हमें गुस्सा बहुत आता है और हर बात पर तिल हो तो हमें क्या करना चाहिए गुस्सा आने का कारण क्

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Priyanka Raghav Teacher

Teacher - Hindi / Social Science

1:09
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो दोस्तो आप का क्वेश्चन है मैं गुस्सा बहुत आता है और हर बात पर चढ़ी होती है तो हमें क्या करना चाहिए ऐसा तब होता है जब हमारे माइंड में कोई प्रॉब्लम चल रही होती है या हम डिप्रेशन में जा रहे होते हैं तब बहुत गुस्सा आता है और चिड़चिड़ापन होता हो जाता है याद यह सब या तो तब होता है जब हम ज्यादा कमजोर हो रहे हैं कब जारी कर रहे हैं या फिर हम डिप्रेशन में जा रहे हैं किसी बात की वजह से ज्यादा गुस्सा आता है अकेलापन महसूस होता है तू हमें उस टाइम अगर अभी गुस्सा शांत करना है तो हमें एकदम शांत होकर लंबी सांस लेनी चाहिए कम से कम चार पांच पर और लंबी लंबी सांसे ले और सांस छोड़ने उसको अच्छा सा फील होगा और गुस्से पर कंट्रोल होगा और आपको अपना ध्यान है वह कहीं अपने लक्ष्य की तरफ लगाना चाहिए और जो फालतू की प्रॉब्लम से फालतू की बातें हैं उनको इग्नोर करना चाहिए जिससे कि तुम्हारा गुस्सा भी कम होगा और चिड़चिड़ापन भी कम होगा जो लोग तुम्हें लगते हैं कि वह तुम्हें परेशान कर रहे हैं इस लिस्ट में गुस्सा आता है या चिड़चिड़ापन होता है उनको इग्नोर करना सीखिए धन्यवाद

hello doston aap ka question hai gussa bahut aata hai aur har baat par chadhi hoti hai toh hamein kya karna chahiye aisa tab hota hai jab hamare mind mein koi problem chal rahi hoti hai ya hum depression mein ja rahe hote hain tab bahut gussa aata hai aur chidchidapan hota ho jata hai yaad yah sab ya toh tab hota hai jab hum zyada kamjor ho rahe hain kab jaari kar rahe hain ya phir hum depression mein ja rahe hain kisi baat ki wajah se zyada gussa aata hai akelapan mehsus hota hai tu hamein us time agar abhi gussa shaant karna hai toh hamein ekdam shaant hokar lambi saans leni chahiye kam se kam char paanch par aur lambi lambi sanse le aur saans chodne usko accha sa feel hoga aur gusse par control hoga aur aapko apna dhyan hai vaah kahin apne lakshya ki taraf lagana chahiye aur jo faltu ki problem se faltu ki batein hain unko ignore karna chahiye jisse ki tumhara gussa bhi kam hoga aur chidchidapan bhi kam hoga jo log tumhe lagte hain ki vaah tumhe pareshan kar rahe hain is list mein gussa aata hai ya chidchidapan hota hai unko ignore karna sikhiye dhanyavad

हेलो दोस्तो आप का क्वेश्चन है मैं गुस्सा बहुत आता है और हर बात पर चढ़ी होती है तो हमें क्य

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Kesharram

Teacher

10:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सबसे पहले तो हम बात करते हैं कि गुस्सा बहुत इसके पीछे एक अहम कारण करेंगे कि आपको गुस्सा किस तरह से आ रहा है और क्यों और हमारा जवाब यह था कि आपको गुस्सा आता है तो आता क्यों है और किस वजह से आता है और इतना गुस्सा को अगर आप कंट्रोल कैसे करें इसके बारे में मैं आपको विस्तार से बताऊंगा कि आपको क्या करना चाहिए और फिर आपको यह बताना कि आपको चीज होती है तो वास्तव में क्यों होती है उसके पीछे का कारण क्या होता है और हमारी तो हम जो भावना में भर्ती है ना उसी वजह से हम क्या है कि अलग से हमारे मन में एक आंखों से आ जाता है और किस वजह से हमारी यह जो ऐड हो जाती है तो हम इनके बारे में अलग चयन विस्तार से बात करेंगे तो सबसे पहले हम बात कर लेते हैं कि आपको गुस्सा बहुत आता है गुस्सा आने का एक ही कारण होता है या तो आपकी अंतरात्मा यह जो भावना होती है ना यह भी दो प्रकार की होती है एक तो हम भावना में बहकर जाते हैं तो गुस्से को पी जाते हैं और यह क्या है कि गुस्सा अंदर ही अंदर हमारे जो क्रोध को इतना जगा देता है कि हम अपनी भावनाओं पर कंट्रोल नहीं करते और सामने वाले पर हम बाहर कर देते हैं तो उससे क्या होता है कि आप नुकसान हो जाता है और सामने वाला का भुगतान हो जाता है तो सबसे पहले आपको अगर गुस्सा बहुत आता है तो पहले उस गुस्से पर आपका मन पर जो अंतरात्मा और फिर धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे अंतरात्मा से आप बाहर निकलो भाई कोई आपको कोई बात करते करते हो या मतलब होता है उसके बारे में आप इतना गुस्सा आ रहा है हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो आप धीरे-धीरे धीरे-धीरे उस पर करो कि हां अब हम सेंड करना क्योंकि बोतल के अंदर हम पानी डालते अगर उसको हमारी निकलेगा और उसमें हम अगर बराबर देते तो एकदम बराबर चलेगा और उस पर हम ढक्कन लगा देते नहीं गिरेगा हिसाब से फिर हम पानी पिए तो वह पानी क्या है कि धीरे धीरे धीरे उस बोतल से खाली होता जाएगा उसमें जितना करना है आपको गुस्सा बहुत आ रहा है और आप उससे बाहर नहीं निकल रहे हो तुम पहली बात मैं आपको बता देना चाहता हूं कि उसको दीदी आपको मैंने सामने वाले ने आपको कोई बात रख दी है और उससे वार है वह धीरे धीरे धीरे धीरे कर्म करते जाओ तो गुस्सा ही आ जाएगा और आपको बोली है उस बात पर आंख बंद करके जाना ना गुस्सा फिर आपको कभी नहीं आएगा फिर आप जो भी आप बोलेंगे वह आ जाएंगे धीरे-धीरे धीरे-धीरे ढलता चला जाएगा हर बात होती है तो वह क्यों हो रही है इसके पीछे क्या है इसके बारे में हम पता करेंगे कि वास्तव में यह लो हमारे साथ में यह मेरे साथ में क्यों हो रहा है और किसी के साथ में क्यों नहीं होता है जो भी बात आपको बोली जाती है उस पर आपको चिढ़ होती है और किडनी पर क्या है किस थामला आपको बार-बार छुड़ाने की कोशिश भी करेगा क्योंकि आपको वही बात वह जहां आप जिधर भी जाओगे जिधर भी खड़े रहोगे जिधर भी देखोगे जिधर भी घूमो गे या जिस समय भी आप उस व्यक्ति से मिलोगे तो वह एक ही कमेंट करके का जो आप जिस चीज से चिढ़ पर हो लेकिन उससे आपको अगर थोड़ा सा ही मेंटेन रखना है तो जैसी वह बंदा आपको जो शब्द बोलता है और जिससे आपको चीज होती है तो उसको आप एक घूंट पानी की तरह पी के रख लो अपने अंदर यहां ठीक है और बोल दो तो जैसे ही वह दुबारा दूसरी बार बोलेगा तो दूसरी बार बोलते ही आपके है कि उसको भी पानी की बूंद के सामान भी जाऊं फिर वह तीसरी बार बोलेगा तीसरी बार बोलेगा जब कोई किसी प्रकार की रिप्लाई नहीं आएगी तो वह व्यक्ति क्या है कि आप को चिढ़ाना बंद कर देगा या जिस चीज से आप चलते हो माली जी जी से आपके साथ में कोई आपकी वस्तु है उसको लेने में आपको सीट होती है या कोई आपका मतलब पर्सनल सामान है उसको लेने से जो सीट होती है तो उसी हिसाब से अगर आप उनको देखते हो तो अलग से मतलब जैसे एक बार माली जी मेरी स्कूटी के कारण सब कुछ हो रही है या होती है तो उसी स्कूटी को आप बखूबी हां यह स्कूटी है और इसको यह बंदा लेकर जा रहा है और इससे मेरे को चिड़ा रही है तो उसको एक बार ले जाने दो दो बार ले जाने दो तीसरी बार ले जाने दो तो फिर अपना वह भी अलग से इसमें होती है नजर आएगी आपको कि हां अब यह कम हो रही है और धीरे धीरे धीरे धीरे जो व्यवहार एक दूसरे से आप करोगे तो फिर यह अपने आप से चर्बी दूर हो जाएगी और आपका गुस्सा भी दूर हो जाएगा सबसे पहला यह होता है कि आप अपना व्यवहार बदलो और सामने वाले का ऑटोमेटिक ही व्यवहार बदल जाएगा अन्यथा आपका नाम तो आपका व्यवहार बदलेगा और ना ही सामने वालों का व्यवहार बदलेगा इससे क्या होता है कि गुस्सा और चिड़िया दोनों हम पर हावी हो जाती है मतलब जो सामने वाला जो भी व्यक्ति हमारे सामने जो बात रखता है वह बात हमारे पर स्पष्ट रूप से यह आ जाती है तो मैं इसका एक आर्टिकल आपको अपनाना अपनाने के लिए दे रहा हूं कि जो बंदा जैसा व्यवहार कर रहा है या जो वस्तु है हमारे काम आने वाली है उस पर अगर हम थोड़ा सा ध्यान चिंतन कर लेंगे और यह तो सहन करने की जो शक्ति हमारे अंदर ना होती है उसको धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे 1 दिन में कुछ नहीं होता है ना एक महीने में होता है ना एक साल के अंदर होता है लेकिन धीरे हमारे जो व्यवहार होता है हमारे तो मन के आंतरिक भावना होती है एक बौद्धिक होती है उन दोनों को हम कंट्रोल करते हुए हमारे मानसिक और शारीरिक और बौद्धिक इन चीजों को हम अपनाते हुए और उनका सारा लेते हुए धीरे धीरे धीरे धीरे किसी भी अगर हम बात पर चढ़ते नहीं है गुस्सा नहीं करते तो यह हमारे क्या है कि एक मोटिवेशनल के तौर पर हो चाहे किसी भी कारण वंश हो यह हमारा धीरे-धीरे दिमाग है वह एकदम शांत होता जाएगा और फिर हमारे किसी प्रकार की भावना में जो हम भरे हैं धीरे-धीरे उसमें बढ़ते जाएंगे तो हमारा गुस्सा कंट्रोल में आ जाएगा ना हमें सिद्ध होगी और ना ही दूसरा व्यक्ति देखेगा तो वह कहेगा वाह यार क्या है यह देखो आजकल राजेश इतना व्यवहार भी कैसे हो गया इसको इतना गुस्सा आता था कि यह पत्थर तोड़ देता था और आज इनका व्यवहार देखो यह एकदम नॉर्मल से व्यक्ति से लग गए हैं और उनके साथ में यार बात करने में भी मजा आ रहा है तो दोस्तों मैं यह नहीं कहना चाहता हूं कि जो मैं बातें आपको बता रहा हूं मैं यह कह रहा हूं कि जो मैंने शब्द बोले हैं उनको आप एक अपनी नजरिया से देखूं फिर पर को और फिर अपने व्यवहार में लाने से क्या होता है कि आप धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे पर जाओगे और आपका गुस्सा और यह दोनों समाप्त हो जाएगी सिर्फ और सिर्फ आपकी सोच है सोच बदलो विवेकानंद जी ने ही कहा था कि आप अपनी सोच बदलो आगे कुछ मत देखो ना पीछे देखो जो काम आपने हाथ में लिया है उसको निरंतर करते जाओ तो मैं भी यही कहना चाहता हूं कि आपने जो इसमें सोच बदलने की बात कारी है तो आपकी जो सोच क्या होती है कि आप बहुत जल्दी गुस्सा हो जाते हो तो उस गुस्से पे कंट्रोल करना है तो धीरे धीरे धीरे धीरे कीजिए एक दिन में कुछ नहीं होता है और जैसे ही आप इसमें धीरे-धीरे कंट्रोल करते जाओगे तो आपका गुस्सा भी शांत हो जाएगा आपका शरीर भी नॉर्मल हो जाएगा और आपकी सोच विकसित होगी और उसके हाथ की तरफ सुनता अधिक होगी और फिर अपना जो रिजल्ट देखना आप जो भी काम करते हो उसमें आप परफेक्ट रहोगे यह मेरा आपको आप लोगों के लिए यह संदेश है और जो यह है कि हमें गुस्सा बहुत आता है और हर बात प्रसिद्ध होती है तो हमें क्या करना चाहिए जो मैंने बातें बताइए उनको आप ध्यान से सुनना और फिर उस पर चिंतन और मनन करना उसके बाद में अगर आपका गुस्सा शांत नहीं होता है तो मेरे लिए जो कमेंट है उस पर लिखना कि सर जी आपने जो बातें हमें बताई है उससे तो हमारा ना तो गुस्सा कम हुआ

sabse pehle toh hum baat karte hai ki gussa bahut iske peeche ek aham karan karenge ki aapko gussa kis tarah se aa raha hai aur kyon aur hamara jawab yah tha ki aapko gussa aata hai toh aata kyon hai aur kis wajah se aata hai aur itna gussa ko agar aap control kaise kare iske bare mein main aapko vistaar se bataunga ki aapko kya karna chahiye aur phir aapko yah bataana ki aapko cheez hoti hai toh vaastav mein kyon hoti hai uske peeche ka karan kya hota hai aur hamari toh hum jo bhavna mein bharti hai na usi wajah se hum kya hai ki alag se hamare man mein ek aankho se aa jata hai aur kis wajah se hamari yah jo aid ho jaati hai toh hum inke bare mein alag chayan vistaar se baat karenge toh sabse pehle hum baat kar lete hai ki aapko gussa bahut aata hai gussa aane ka ek hi karan hota hai ya toh aapki antaraatma yah jo bhavna hoti hai na yah bhi do prakar ki hoti hai ek toh hum bhavna mein bahkar jaate hai toh gusse ko p jaate hai aur yah kya hai ki gussa andar hi andar hamare jo krodh ko 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saamne waale ne aapko koi baat rakh di hai aur usse war hai vaah dhire dhire dhire dhire karm karte jao toh gussa hi aa jaega aur aapko boli hai us baat par aankh band karke jana na gussa phir aapko kabhi nahi aayega phir aap jo bhi aap bolenge vaah aa jaenge dhire dhire dhire dhire dhalta chala jaega har baat hoti hai toh vaah kyon ho rahi hai iske peeche kya hai iske bare mein hum pata karenge ki vaastav mein yah lo hamare saath mein yah mere saath mein kyon ho raha hai aur kisi ke saath mein kyon nahi hota hai jo bhi baat aapko boli jaati hai us par aapko chidh hoti hai aur KIDNEY par kya hai kis thamla aapko baar baar chudane ki koshish bhi karega kyonki aapko wahi baat vaah jaha aap jidhar bhi jaoge jidhar bhi khade rahoge jidhar bhi dekhoge jidhar bhi ghumo gay ya jis samay bhi aap us vyakti se miloge toh vaah ek hi comment karke ka jo aap jis cheez se chidh par ho lekin usse aapko agar thoda sa hi maintain rakhna hai toh jaisi vaah banda aapko jo shabd bolta hai aur jisse aapko cheez hoti hai toh usko aap ek ghunt paani ki tarah p ke rakh lo apne andar yahan theek hai aur bol do toh jaise hi vaah dubara dusri baar bolega toh dusri baar bolte hi aapke hai ki usko bhi paani ki boond ke saamaan bhi jaaun phir vaah teesri baar bolega teesri baar bolega jab koi kisi prakar ki reply nahi aayegi toh vaah vyakti kya hai ki aap ko chidhana band kar dega ya jis cheez se aap chalte ho maali ji ji se aapke saath mein koi aapki vastu hai usko lene mein aapko seat hoti hai ya koi aapka matlab personal saamaan hai usko lene se jo seat hoti hai toh usi hisab se agar aap unko dekhte ho toh alag se matlab jaise ek baar maali ji meri scooty ke karan sab kuch ho rahi hai ya hoti hai toh usi scooty ko aap bakhubi haan yah scooty hai aur isko yah banda lekar ja raha hai aur isse mere ko chida rahi hai toh usko ek baar le jaane do do baar le jaane do teesri baar le jaane do toh phir apna vaah bhi alag se isme hoti hai nazar aayegi aapko ki haan ab yah kam ho rahi hai aur dhire dhire dhire dhire jo vyavhar ek dusre se aap karoge toh phir yah apne aap se charbi dur ho jayegi aur aapka gussa bhi dur ho jaega sabse pehla yah hota hai ki aap apna vyavhar badlo aur saamne waale ka Automatic hi vyavhar badal jaega anyatha aapka naam toh aapka vyavhar badlega aur na hi saamne walon ka vyavhar badlega isse kya hota hai ki gussa aur chidiya dono hum par haavi ho jaati hai matlab jo saamne vala jo bhi vyakti hamare saamne jo baat rakhta hai vaah baat hamare par spasht roop se yah aa jaati hai toh main iska ek article aapko apnana apnane ke liye de raha hoon ki jo banda jaisa vyavhar kar raha hai ya jo vastu hai hamare kaam aane wali hai us par agar hum thoda sa dhyan chintan kar lenge aur yah toh sahan karne ki jo shakti hamare andar na hoti hai usko dhire dhire dhire dhire dhire dhire 1 din mein kuch nahi hota hai na ek mahine mein hota hai na ek saal ke andar hota hai lekin dhire hamare jo vyavhar hota hai hamare toh man ke aantarik bhavna hoti hai ek baudhik hoti hai un dono ko hum control karte hue hamare mansik aur sharirik aur baudhik in chijon ko hum apanate hue aur unka saara lete hue dhire dhire dhire dhire kisi bhi agar hum baat par chadhte nahi hai gussa nahi karte toh yah hamare kya hai ki ek Motivational ke taur par ho chahen kisi bhi karan vansh ho yah hamara dhire dhire dimag hai vaah ekdam shaant hota jaega aur phir hamare kisi prakar ki bhavna mein jo hum bhare hai dhire dhire usme badhte jaenge toh hamara gussa control mein aa jaega na hamein siddh hogi aur na hi doosra vyakti dekhega toh vaah kahega wah yaar kya hai yah dekho aajkal rajesh itna vyavhar bhi kaise ho gaya isko itna gussa aata tha ki yah patthar tod deta tha aur aaj inka vyavhar dekho yah ekdam normal se vyakti se lag gaye hai aur unke saath mein yaar baat karne mein bhi maza aa raha hai toh doston main yah nahi kehna chahta hoon ki jo main batein aapko bata raha hoon main yah keh raha hoon ki jo maine shabd bole hai unko aap ek apni najariya se dekhu phir par ko aur phir apne vyavhar mein lane se kya hota hai ki aap dhire dhire dhire dhire dhire dhire par jaoge aur aapka gussa aur yah dono samapt ho jayegi sirf aur sirf aapki soch hai soch badlo vivekananda ji ne hi kaha tha ki aap apni soch badlo aage kuch mat dekho na peeche dekho jo kaam aapne hath mein liya hai usko nirantar karte jao toh main bhi yahi kehna chahta hoon ki aapne jo isme soch badalne ki baat kaari hai toh aapki jo soch kya hoti hai ki aap bahut jaldi gussa ho jaate ho toh us gusse pe control karna hai toh dhire dhire dhire dhire kijiye ek din mein kuch nahi hota hai aur jaise hi aap isme dhire dhire control karte jaoge toh aapka gussa bhi shaant ho jaega aapka sharir bhi normal ho jaega aur aapki soch viksit hogi aur uske hath ki taraf sunta adhik hogi aur phir apna jo result dekhna aap jo bhi kaam karte ho usme aap perfect rahoge yah mera aapko aap logo ke liye yah sandesh hai aur jo yah hai ki hamein gussa bahut aata hai aur har baat prasiddh hoti hai toh hamein kya karna chahiye jo maine batein bataye unko aap dhyan se sunana aur phir us par chintan aur manan karna uske baad mein agar aapka gussa shaant nahi hota hai toh mere liye jo comment hai us par likhna ki sir ji aapne jo batein hamein batai hai usse toh hamara na toh gussa kam hua

सबसे पहले तो हम बात करते हैं कि गुस्सा बहुत इसके पीछे एक अहम कारण करेंगे कि आपको गुस्सा कि

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Ramesh Prajapati

||....Be....Legendary......||

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देखिए अगर आपको गुस्सा आता है तो छोटी-छोटी बात पर अगर आप चले जाते हैं तो आपको क्या करने से आप अपने आप को समझा यह देखिए यह सारी चीजें जो है ना यह हमें नुकसान देती है तो कोशिश कोशिश यह कीजिए कि आप एक अच्छे विचार अपने मन में रखे थोड़ा अपने आप को समझाएं अपने आप से बातें भी करें कि नहीं नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए जैसे कि लोग मेरा मजाक उड़ाएंगे उल्टा सीधा डायरेक्ट जाऊंगा उनको डायरेक्टली समझा लूंगा मैं बाहर से उनको उनके मल्हारी उनको समझा दूंगा कि भाई नहीं ऐसा नहीं चलेगा आप गलत हो आपको बार-बार मजाक नहीं करना चाहिए तो सुबह से क्या होता ना कि गुस्सा भी आता है और ए क्या कहते हैं तो वह बात तो है भारी छोड़ देनी चाहिए कृपया के उसको रिपीट ना करें इससे क्या होता है ना माता माता खराब होता है उसे बताता है इंसान तो यही चाहूंगा कि बात का गुस्सा तो उस को कंट्रोल करने की कोशिश कर चले जाते हैं दिमाग दिमाग दिमाग के लिए बहुत हानिकारक ना तो मैं तो यही कहूंगा कि आप सुबह मॉर्निंग वॉक पर जाए अच्छे विचार करें पूजा पाठ पर ध्यान दें यह सब करें आप और अच्छी में 1 दिन पड़े और टीवी से बगैरा देखिए स्टडीज पेपर आपके पास कोई भी मटेरियल पढ़ने के लिए उसको आप पढ़ सकते हैं धन्यवाद

dekhiye agar aapko gussa aata hai toh choti choti baat par agar aap chale jaate hain toh aapko kya karne se aap apne aap ko samjha yah dekhiye yah saree cheezen jo hai na yah hamein nuksan deti hai toh koshish koshish yah kijiye ki aap ek acche vichar apne man mein rakhe thoda apne aap ko samjhayen apne aap se batein bhi kare ki nahi nahi aisa nahi hona chahiye jaise ki log mera mazak udaenge ulta seedha direct jaunga unko directly samjha lunga main bahar se unko unke malhari unko samjha dunga ki bhai nahi aisa nahi chalega aap galat ho aapko baar baar mazak nahi karna chahiye toh subah se kya hota na ki gussa bhi aata hai aur a kya kehte hain toh vaah baat toh hai bhari chod deni chahiye kripya ke usko repeat na kare isse kya hota hai na mata mata kharab hota hai use batata hai insaan toh yahi chahunga ki baat ka gussa toh us ko control karne ki koshish kar chale jaate hain dimag dimag dimag ke liye bahut haanikarak na toh main toh yahi kahunga ki aap subah morning walk par jaaye acche vichar kare puja path par dhyan de yah sab kare aap aur achi mein 1 din pade aur TV se bagaira dekhiye studies paper aapke paas koi bhi material padhne ke liye usko aap padh sakte hain dhanyavad

देखिए अगर आपको गुस्सा आता है तो छोटी-छोटी बात पर अगर आप चले जाते हैं तो आपको क्या करने से

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देखिए दोस्तों ओशो ध्यान नहीं देना चाहिए और आपको उसके उपाय करना चाहिए जैसे कि उस और मान जाएं और अच्छी पोस्टिंग पढ़ाई अपने काम में लगे रहे हैं यह फालतू समय ना बताएं धन्यवाद

dekhiye doston osho dhyan nahi dena chahiye aur aapko uske upay karna chahiye jaise ki us aur maan jayen aur achi posting padhai apne kaam mein lage rahe hain yah faltu samay na batayen dhanyavad

देखिए दोस्तों ओशो ध्यान नहीं देना चाहिए और आपको उसके उपाय करना चाहिए जैसे कि उस और मान जाए

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हमें अच्छी तरह से से अच्छी तरह से सोना चुप चुप चुप होना चाहिए बाकी जो लोगे हमें कुछ भी कहे शाम को कुछ कुछ ना कहना और चुपचाप बैठे थे

hamein achi tarah se se achi tarah se sona chup chup chup hona chahiye baki jo loge hamein kuch bhi kahe shaam ko kuch kuch na kehna aur chupchap baithe the

हमें अच्छी तरह से से अच्छी तरह से सोना चुप चुप चुप होना चाहिए बाकी जो लोगे हमें कुछ भी कहे

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Kriti

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यदि आपको गुस्सा बहुत आता है और आपको बहुत चिढ़ होती है हर बात का कुछ रोते देखिए यह बहुत सारे लोगों के साथ में होता है कभी-कभी समझ में भी नहीं आता कि ऐसा क्यों हो रहा है तो इसके लिए आप मेडिटेशन शुरू कीजिए मेडिटेशन आप अगर शुरू कर तो आपके हेल्थ के लिए काफी ज्यादा बेहतर होगा क्योंकि हमेशा गुस्सा करना है चिड़चिड़ापन दिखाना अच्छी बात नहीं होती है अब ऐसे इस तरह से बहुत सारे लोगों को अपने लोगों को अपनी लाइफ में खो देते हैं और यह चीज अच्छी नहीं लगती है तो इसको मेडिटेशन शुरू करना चाहिए ध्यान लगाना चाहिए अपने मन को शांत करने की कोशिश करना चाहिए

yadi aapko gussa bahut aata hai aur aapko bahut chidh hoti hai har baat ka kuch rote dekhiye yah bahut saare logo ke saath mein hota hai kabhi kabhi samajh mein bhi nahi aata ki aisa kyon ho raha hai toh iske liye aap meditation shuru kijiye meditation aap agar shuru kar toh aapke health ke liye kaafi zyada behtar hoga kyonki hamesha gussa karna hai chidchidapan dikhana achi baat nahi hoti hai ab aise is tarah se bahut saare logo ko apne logo ko apni life mein kho dete hain aur yah cheez achi nahi lagti hai toh isko meditation shuru karna chahiye dhyan lagana chahiye apne man ko shaant karne ki koshish karna chahiye

यदि आपको गुस्सा बहुत आता है और आपको बहुत चिढ़ होती है हर बात का कुछ रोते देखिए यह बहुत सार

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