हम अपनी भारतीय संस्कृति भूलते जा रहे हैं क्या इसके दुष्परिणाम होंगे?...


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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

2:38
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नए हम अपनी भारतीय संस्कृति जा रहे क्या इसके दुष्परिणाम बताने से पहले मैं आपको क्या होती है संस्कृत विभाग का विभाग के लोगों का खानपान रीति रिवाज उठना बैठना धर्म इन सबको मिलाकर जो समग्र रूप बनता है उसको कहते हैं संस्कृत संस्कृत में लिखिए अपना खाना पीना आता है तो हम लोग इतना खाना पीना भूल गए पाश्चात्य संस्कृति का खाना खा रहे हैं अपना शाकाहारी खाना छोड़कर पिज्जा बर्गर इस तरह की दृष्टि से खा रही किसी आदमी का पेट भी खराब होता है शेयर भी खराब होती है दूसरे पश्चात संस्कृति वह हम लोग जो अलार्म संस्कृत को पढ़ा रहे थे कि हमारी संस्कृत में क्या है सादा जीवन उच्च विचार हम लोगों के यहां क्या है हम लोगों की संस्कृत में बहुत ज्यादा खुलापन नहीं है क्योंकि हमारी संस्कृति रमंते तत्र देवता स्त्रियों को महिलाओं को बहुत ज्यादा खुलापन नहीं दिया गया भारतीय संस्कृत संस्कृत के प्रभाव में आकर लड़की लड़की एक्शन बिना शादी की रहती है जैसे कितने लिविंग टुगेदर यह एक वेश्यावृत्ति का रूप है बिना पैसे के यह कोई अच्छी बात नहीं है यह आशा संस्कृत के अनुकरण में जो हिंदू कर रहे उसे क्या है हम अपने रीति रिवाज भूलते जा रहे हैं हम अपने धर्म को बोलती जा रही भाषा संस्कृत के प्रभाव में आकर हम लोग तरह-तरह की गलत आपने डालने नशा नशा का हमारी संस्कृत में विरोध है लेकिन पार्षद संस्कृत की अंधकार में आकर लोग नशा पानी करने लगते हैं अपना स्वास्थ्य विभाग भर्ती आपके प्रश्न का मेरी समझ में कोई दरवाजा

naye hum apni bharatiya sanskriti ja rahe kya iske dushparinaam batane se pehle main aapko kya hoti hai sanskrit vibhag ka vibhag ke logo ka khanpan riti rivaaj uthna baithana dharm in sabko milakar jo samagra roop banta hai usko kehte hain sanskrit sanskrit me likhiye apna khana peena aata hai toh hum log itna khana peena bhool gaye pashchayat sanskriti ka khana kha rahe hain apna shakahari khana chhodkar pizza burger is tarah ki drishti se kha rahi kisi aadmi ka pet bhi kharab hota hai share bhi kharab hoti hai dusre pashchat sanskriti vaah hum log jo alarm sanskrit ko padha rahe the ki hamari sanskrit me kya hai saada jeevan ucch vichar hum logo ke yahan kya hai hum logo ki sanskrit me bahut zyada khulapan nahi hai kyonki hamari sanskriti ramante tatra devta sthreeyon ko mahilaon ko bahut zyada khulapan nahi diya gaya bharatiya sanskrit sanskrit ke prabhav me aakar ladki ladki action bina shaadi ki rehti hai jaise kitne living together yah ek vaishyavriti ka roop hai bina paise ke yah koi achi baat nahi hai yah asha sanskrit ke anukaran me jo hindu kar rahe use kya hai hum apne riti rivaaj bhulte ja rahe hain hum apne dharm ko bolti ja rahi bhasha sanskrit ke prabhav me aakar hum log tarah tarah ki galat aapne dalne nasha nasha ka hamari sanskrit me virodh hai lekin parshad sanskrit ki andhakar me aakar log nasha paani karne lagte hain apna swasthya vibhag bharti aapke prashna ka meri samajh me koi darwaja

नए हम अपनी भारतीय संस्कृति जा रहे क्या इसके दुष्परिणाम बताने से पहले मैं आपको क्या होती है

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मोहम्मद संस्कृति भूलते जा रहे हैं तो उसके कुछ दुष्परिणाम नहीं है संस्कृति बोलना या फिर संस्कृति को अलग तरीके से अपनाना यह इसके कोई दुष्परिणाम नहीं हो सकते लोग अपनी अपनी जिंदगी में आगे पढ़ता और विकास के लिए संस्कृति को जगाए रखना इतना महत्वपूर्ण नहीं है अगर विकास हो रहा है तो हमारे संस्कृति को एक अपनी जगह पर रखे हम आगे की तरफ बढ़ सकते हैं

muhammad sanskriti bhulte ja rahe hain toh uske kuch dushparinaam nahi hai sanskriti bolna ya phir sanskriti ko alag tarike se apnana yah iske koi dushparinaam nahi ho sakte log apni apni zindagi mein aage padhata aur vikas ke liye sanskriti ko jagae rakhna itna mahatvapurna nahi hai agar vikas ho raha hai toh hamare sanskriti ko ek apni jagah par rakhe hum aage ki taraf badh sakte hain

मोहम्मद संस्कृति भूलते जा रहे हैं तो उसके कुछ दुष्परिणाम नहीं है संस्कृति बोलना या फिर संस

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यह बात बिल्कुल सत्य है कि हम अपनी संस्कृतियों को भूलते जा रहे हैं अक्सर देखा जाता है कि समाज में महिलाओं तथा बालिकाओं के प्रति एक अलग ही नजरिए से देखा जाता है

yah baat bilkul satya hai ki hum apni sanskritiyon ko bhulte ja rahe hain aksar dekha jata hai ki samaaj mein mahilaon tatha balikaon ke prati ek alag hi nazariye se dekha jata hai

यह बात बिल्कुल सत्य है कि हम अपनी संस्कृतियों को भूलते जा रहे हैं अक्सर देखा जाता है कि सम

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