सोच क्या है, और यह मन से ही क्यों उत्तपन होता है?...


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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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सोच क्या है और यह मन से सोच कुछ नहीं मैं एक प्रकार की मानसिक समरी है जो हमारे दिमाग चंद्र तरंग चलती है जो किसी चीज को समझने जाने पर रखने का काम करते हैं और यह सिर्फ मनुष्य ही कर सकता इसके शेखर जानवरों की बात को लेकिन उसका सही ढंग से एनालाइज नहीं कर सकता डॉक्टर के पास जाते हो तो जगरनाथ बेस्ट के बारे में उसको एडिया होता है उसी तरह से हमारे दिमाग में जो आवे होता है जो जलता हुआ होता है जब हम मनुष्य इश्क समझते हैं जानते हैं और यह मन से नहीं कर्म होता जनाब कहां है मन मा मन किधर है आप बताइए मन कहीं किसी से में है कोई हिस्ट्री का अंक और दिमाग के अंदर होता अब हम दिमाग को दो हिस्सों में बांट के एक तो हमारा जो कहते हैं की आत्मा किसे कहते हैं दूसरे मंत्र मन में दो तरह के होते जो एक स्लोली स्लोली होती है जो हमेशा सच का सामना करती हैं और दूसरी होती है जो रेडीमेड चलती रहती काट दी और वह आवे मन के अंदर चलता है कुछ भी हम सोचते रहते हैं जैसा भी भेजते हैं सुन मन करता था लेकिन आवाज नहीं वाली के नैना ना मिला चलो मौज मस्ती करेंगे प्यार में उठाकर देखेगा नहीं भाई पूछ लेते आसपास दो आदमी पड़े हैं कैंसर तो नहीं है किसी और का

soch kya hai aur yah man se soch kuch nahi main ek prakar ki mansik summary hai jo hamare dimag chandra tarang chalti hai jo kisi cheez ko samjhne jaane par rakhne ka kaam karte hain aur yah sirf manushya hi kar sakta iske shekhar jaanvaro ki baat ko lekin uska sahi dhang se analyse nahi kar sakta doctor ke paas jaate ho toh Jagarnath best ke bare me usko ediya hota hai usi tarah se hamare dimag me jo aawe hota hai jo jalta hua hota hai jab hum manushya ishq samajhte hain jante hain aur yah man se nahi karm hota janab kaha hai man ma man kidhar hai aap bataiye man kahin kisi se me hai koi history ka ank aur dimag ke andar hota ab hum dimag ko do hisson me baant ke ek toh hamara jo kehte hain ki aatma kise kehte hain dusre mantra man me do tarah ke hote jo ek slowly slowly hoti hai jo hamesha sach ka samana karti hain aur dusri hoti hai jo ready made chalti rehti kaat di aur vaah aawe man ke andar chalta hai kuch bhi hum sochte rehte hain jaisa bhi bhejate hain sun man karta tha lekin awaaz nahi wali ke naina na mila chalo mauj masti karenge pyar me uthaakar dekhega nahi bhai puch lete aaspass do aadmi pade hain cancer toh nahi hai kisi aur ka

सोच क्या है और यह मन से सोच कुछ नहीं मैं एक प्रकार की मानसिक समरी है जो हमारे दिमाग चंद्र

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