धर्म पर हो रही राजनीति के ऊपर आप कुछ कहना चाहते हैं?...


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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

2:00

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने काफी अच्छा सवाल पूछा है और इसमें मैं थोड़ा संशोधन करके आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता हूं| सबसे पहला संशोधन तो यह करूंगा कि धर्म के नाम पर ही काफी सारी क्षेत्रीय पार्टियां उदित हुई थी| जैसे कि बहुजन समाज पार्टी तथा समाजवादी पार्टी काफी सारी पार्टियां कई कई क्षेत्रों में केवल धर्म, भाषा के अनुरूप ही पैदा हुई थी और इन पार्टियों ने अपने आप को स्टेबलाइजर करने के लिए केवल धर्म का ही सहारा लिया| इन्होंने कभी विकास की बात नहीं की, कभी डेवलपमेंट की बात नहीं की, पर कैपिटा इनकम की बात नहीं की, एफडीआई की बात नहीं की, कभी भी रोजगार बढ़ाने की बात नहीं की हमेशा एक ही नारा देते रहे कि हम बेरोजगारी कम करेंगे, रोजगार देंगे, गरीबी खत्म करेंगे और जातिवाद पर लड़ाते रहे ताकि आपको हर 5 साल बाद इस चिज पर वोट दिलाया जा सके| मुझे लगता है कि राजनीति में ही धर्म रह गया है और किस चीज में धर्म नहीं है| अगर आप किसी स्थान पर कार्य करते हैं और वहां पर किसी नए व्यक्ति से मिलते हैं तो आप उस को मुस्कुरा कर देखते हैं| उससे यह नहीं पूछते हैं आपका धर्म कौन सा है? आप उससे नाम पूछते हैं और अगर उसका नाम कुछ असलम या फिर जोसेफ भी होगा तो भी आप को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता, आप मित्रता पूर्वक उसकी तरफ हाथ बढ़ाते हैं तो ये आपकी समझदारी है उसकी समझदारी है| हम में बंधुत्व पहले से ही है और हमेशा था और हमेशा रहेगा| लेकिन राजनीतिक में वोट बैंक के नाम पर हमें लडवाया जाता है| इसके बारे में मेरा केवल यही विचार है कि आप उस व्यक्ति को वोट कतई ना दें जो व्यक्ति इस तरह का कार्य कर रहा हो चाहे वह कितना भी डेवलपमेंट की बात करें, चाहे वह कितना भी अच्छी बात करें, चाहे वह कितना लोभ लालच की बात करें आप उसे वोट ना दीजिए क्योंकि यही सबसे बड़ी पावर है जो हमारे स्वतंत्र सेनानियों ने हमें आजाद कराते समय दिलवाई थी| हर व्यक्ति को वोटिंग राइट है, उसका सही सदुपयोग करेंगे तो 5 वर्ष तक, कम से कम 5 वर्ष तक तो आपके पास ये आजादी रहेगी कि आपने जिस व्यक्ति को वोट दिया वह व्यक्ति ने कुछ ऐसा नहीं किया जो आप नहीं चाहते थे और अगर ऐसा नहीं भी होता है तो भी कम से कम आप राजनीति के बाहर निकलकर धर्म की बात राजनीति पर केवल विकास की बात हो धर्म की बात ना हो ऐसी कोशिश करे|

aapne kaafi accha sawaal poocha hai aur isme main thoda sanshodhan karke aapke saamne prastut karna chahta hoon sabse pehla sanshodhan toh yah karunga ki dharm ke naam par hi kaafi saree kshetriya partyian udit hui thi jaise ki bahujan samaj party tatha samajwadi party kaafi saree partyian kai kai kshetro mein keval dharm bhasha ke anurup hi paida hui thi aur in partiyon ne apne aap ko Stabilizer karne ke liye keval dharm ka hi sahara liya inhone kabhi vikas ki baat nahi ki kabhi development ki baat nahi ki par capita income ki baat nahi ki IFDI ki baat nahi ki kabhi bhi rojgar badhane ki baat nahi ki hamesha ek hi naara dete rahe ki hum berojgari kam karenge rojgar denge garibi khatam karenge aur jaatiwad par ladaate rahe taki aapko har 5 saal baad is cheez par vote dilaya ja sake mujhe lagta hai ki raajneeti mein hi dharm reh gaya hai aur kis cheez mein dharm nahi hai agar aap kisi sthan par karya karte hain aur wahan par kisi naye vyakti se milte hain toh aap us ko muskura kar dekhte hain usse yah nahi poochhte hain aapka dharm kaun sa hai aap usse naam poochhte hain aur agar uska naam kuch aslam ya phir joseph bhi hoga toh bhi aap ko is baat se koi fark nahi padta aap mitrata purvak uski taraf hath badhate hain toh ye aapki samajhdari hai uski samajhdari hai hum mein bandhutwa pehle se hi hai aur hamesha tha aur hamesha rahega lekin raajnitik mein vote bank ke naam par hamein ladvaya jata hai iske bare mein mera keval yahi vichar hai ki aap us vyakti ko vote katai na de jo vyakti is tarah ka karya kar raha ho chahen vaah kitna bhi development ki baat kare chahen vaah kitna bhi achi baat kare chahen vaah kitna lobh lalach ki baat kare aap use vote na dijiye kyonki yahi sabse badi power hai jo hamare swatantra senaniyon ne hamein azad karate samay dilvai thi har vyakti ko voting right hai uska sahi sadupyog karenge toh 5 varsh tak kam se kam 5 varsh tak toh aapke paas ye azadi rahegi ki aapne jis vyakti ko vote diya vaah vyakti ne kuch aisa nahi kiya jo aap nahi chahte the aur agar aisa nahi bhi hota hai toh bhi kam se kam aap raajneeti ke bahar nikalkar dharm ki baat raajneeti par keval vikas ki baat ho dharm ki baat na ho aisi koshish kare

आपने काफी अच्छा सवाल पूछा है और इसमें मैं थोड़ा संशोधन करके आपके सामने प्रस्तुत करना चाहता

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Shubham

Software Engineer in IBM

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी दोस्त आपने काफी अच्छा क्वेश्चन डाला है और आपने काफी सही बोला कि धर्म पर राजनीति हो रही है, अब लोग धर्म पर पॉलिटिक्स खेल रहे हैं| आप देखिए जहां पर हर जगह धर्म पर पॉलिटिक्स खेली जा रही है और वोटिंग भरने के लिए अपने वोटबैंक भरने के लिए लोग इस टॉपिक को सलूशन निकालने की बजाये इसको और फेमस कर रहे हैं| आप कोई सा भी मुद्दा उठा लीजिए चाहे कासगंज का मुद्दा ले लीजिए और चाहे कहीं का भी ले सकते हैं आप, लोग इस पर पॉलिटिक्स खेल रहे हैं वोट बैंक भर रहे हैं| हमारे न्यूज़ चैनल भी इसका पूरा-पूरा अपना योगदान दे रहे हैं और जातिवाद बढ़ा रहे हैं| कोई भी अगर कॉन्ट्रोवर्सी होती है तो आप सुनिए सबसे पहले यही बोला जाता है कि यहां पर जातिवाद हुआ यहां पर हिंदू और मुस्लिम बुक भिड़ गए और क्या किया जाता है अलग अलग धर्म के पॉलिटिकल लीडर्स को डिबेट करा दी जाती है न्यूज़ चैनल पर| जिससे उनकी टीआरपी बढ़ती है और ना ही उसका सलूशन निकलता है इतने बड़े डिबेट के बाद और कंट्रोवर्शियल बढ़ती है और जो को और जो कोई डिबेट को सुनता है बस एक जातिवाद की भावना आती है ना और उसके अलावा कुछ भी नहीं| तो हमें इससे यह पता चलता है कि आजकल जातिवाद काफी ज्यादा बढ़ चुकी है और लोग इस पर राजनीति कर रहे हैं| आप कहीं भी देखिए अगर कहीं एक किस जाति के साथ कुछ गलत व्यवहार होता है तो पोलिटिकल पार्टीज जो ऑपोजिट में है वह सीधे इस जाति का मुद्दा उठा लेती है ताकि उसको फ्यूचर में वोट बैंक भर जाए उसका| ओवर ओल बात ये है कि आज जातिवाद का मुद्दा भारत में काफी ज्यादा बढ़ चुका है और जैसे कासगंज में हिंदू मुस्लिम में लड़ाई और ऐसी कई जगह भारत में लड़ाई हो रही है| हमारी पॉलिटिकल पार्टी और राजनीति इसको कम करने की बजाये इसकोबढ़ावा दे रही है और कुछ नहीं| और इसमें TV और डिजिटल मीडिया का बहुत बड़ा योगदान है| और कुछ चैनल तो बिके हुए हैं बिल्कुल चाहे में ज़ी न्यूज़ की बात करु तो वो हमेशा बीजेपी का सपोर्ट करता है| तो हमें कोशिश करनी चाहिए कि जातिवाद को कम करें और राजनीति हर जगह नहीं खेलनी चाहिए ना ही धर्म पर, जिससे हमारे देश का भला हो सके| थैंक यू|

dekhi dost aapne kaafi accha question dala hai aur aapne kaafi sahi bola ki dharm par raajneeti ho rahi hai ab log dharm par politics khel rahe hain aap dekhiye jaha par har jagah dharm par politics kheli ja rahi hai aur voting bharne ke liye apne votbaink bharne ke liye log is topic ko salution nikalne ki bajaye isko aur famous kar rahe hain aap koi sa bhi mudda utha lijiye chahen kasganj ka mudda le lijiye aur chahen kahin ka bhi le sakte hain aap log is par politics khel rahe hain vote bank bhar rahe hain hamare news channel bhi iska pura pura apna yogdan de rahe hain aur jaatiwad badha rahe hain koi bhi agar controversy hoti hai toh aap suniye sabse pehle yahi bola jata hai ki yahan par jaatiwad hua yahan par hindu aur muslim book bhid gaye aur kya kiya jata hai alag alag dharm ke political leaders ko debate kara di jaati hai news channel par jisse unki trp badhti hai aur na hi uska salution nikalta hai itne bade debate ke baad aur kantrovarshiyal badhti hai aur jo ko aur jo koi debate ko sunta hai bus ek jaatiwad ki bhavna aati hai na aur uske alava kuch bhi nahi toh hamein isse yah pata chalta hai ki aajkal jaatiwad kaafi zyada badh chuki hai aur log is par raajneeti kar rahe hain aap kahin bhi dekhiye agar kahin ek kis jati ke saath kuch galat vyavhar hota hai toh political parties jo opposite mein hai vaah sidhe is jati ka mudda utha leti hai taki usko future mein vote bank bhar jaaye uska over ol baat ye hai ki aaj jaatiwad ka mudda bharat mein kaafi zyada badh chuka hai aur jaise kasganj mein hindu muslim mein ladai aur aisi kai jagah bharat mein ladai ho rahi hai hamari political party aur raajneeti isko kam karne ki bajaye isakobdhava de rahi hai aur kuch nahi aur isme TV aur digital media ka bahut bada yogdan hai aur kuch channel toh bikey hue hain bilkul chahen mein zea news ki baat karu toh vo hamesha bjp ka support karta hai toh hamein koshish karni chahiye ki jaatiwad ko kam kare aur raajneeti har jagah nahi khelni chahiye na hi dharm par jisse hamare desh ka bhala ho sake thank you

देखी दोस्त आपने काफी अच्छा क्वेश्चन डाला है और आपने काफी सही बोला कि धर्म पर राजनीति हो रह

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Ekta

Researcher and Writer

1:37
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कि मुझे आंखों की यह बात कुछ ठीक समझ में नहीं आती जब वह धर्म को हमारी पॉलिटिक्स के झट से जोड़ते हैं मेरे हिसाब से धर्म हमें नहीं बनाता हम धर्म को बनाते हैं धर्म हमारे हिसाब से चलता है ना कि हम हर बार धर्म के हिसाब से चलते हैं फिर भी खाने पर धर्म को भी बदलना पड़ता है ना कि हम चीजों को बदलने के अलावा स्थान पर बैठे रहे कि नहीं हम ऐसा नहीं करेंगे जो चीज गलत है वह गलत है हर हिसाब से वह गलत है वह चाहे भी धर्म या किसी में भी हूं पर धर्म को अगर आप राजनीति में अपनी बेनिफिट के लिए या किसी के लौट के लिए यूज कर रहे हैं तो वह सही नहीं है यह सब कुछ जानते हैं लेकिन फिर भी आप ऐसे काम करते हैं तुम धर्म को कभी भी राजनीति से कम पर नहीं करना चाहिए धर्म अलग है और राजनीति पूरी पूरी तरीके से अलग है धर्म वह है जो पूरी मेहंदी को चलाता है जबकि राजनीति सिर्फ एक पर्सन चलाता है यह हमें समझने की जरूरत है कि दोनों में असली में डिफरेंस क्या है कि हम इसे इसका सही उत्तर दे तू धर्म पर राजनीति करना बहुत गलत है और ऐसे लोग बस इसका फायदा उठाते हैं ना कि देश को इससे कोई भी बेनिफिट होता है कि फिट होता है तो बस उन्हीं होता है उनके पर्सनल चीजों के लिए होता है ना कि जनता की भलाई के लिए

ki mujhe aankho ki yah baat kuch theek samajh mein nahi aati jab vaah dharm ko hamari politics ke jhat se jodte hain mere hisab se dharm hamein nahi banata hum dharm ko banate hain dharm hamare hisab se chalta hai na ki hum har baar dharm ke hisab se chalte hain phir bhi khane par dharm ko bhi badalna padta hai na ki hum chijon ko badalne ke alava sthan par baithe rahe ki nahi hum aisa nahi karenge jo cheez galat hai vaah galat hai har hisab se vaah galat hai vaah chahen bhi dharm ya kisi mein bhi hoon par dharm ko agar aap raajneeti mein apni benefit ke liye ya kisi ke lot ke liye use kar rahe hain toh vaah sahi nahi hai yah sab kuch jante hain lekin phir bhi aap aise kaam karte hain tum dharm ko kabhi bhi raajneeti se kam par nahi karna chahiye dharm alag hai aur raajneeti puri puri tarike se alag hai dharm vaah hai jo puri mehendi ko chalata hai jabki raajneeti sirf ek person chalata hai yah hamein samjhne ki zarurat hai ki dono mein asli mein difference kya hai ki hum ise iska sahi uttar de tu dharm par raajneeti karna bahut galat hai aur aise log bus iska fayda uthate hain na ki desh ko isse koi bhi benefit hota hai ki fit hota hai toh bus unhi hota hai unke personal chijon ke liye hota hai na ki janta ki bhalai ke liye

कि मुझे आंखों की यह बात कुछ ठीक समझ में नहीं आती जब वह धर्म को हमारी पॉलिटिक्स के झट से जो

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

1:59
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वर्तमान समय में जातिवाद हमारे देश की एक गंभीर समस्या बन गया है| जातिवाद ने समाज को बुरी तरह से अपने पंजों में जकड़ लिया है| यह बीमारी समाज में बरसों से सदियों से फैली हुई तो थी लेकिन इतने गंभीर रूप में नहीं थी| आज के समय में यह एक नासूर बन गया है जिससे साफ करना, जिससे हटाना, जिसे खत्म करना बहुत जरूरी है और मुझे लगता है समाज के प्रबुद्ध जनों को समाज के लोगों को समाज के युवाओं को पढ़े-लिखे लोगों को इस बीमारी से इस नासूर से, इस जख्म से लड़ना होगा और इसे खत्म करना होगा तभी हमारा देश सही मायने में स्वतंत्र हो पाएगा खुशहाल हो पाएगा| यह सांप्रदायिक दंगे पहले भी होते थे लेकिन उनकी वजह बहुत छोटी छोटी सी होती थी और ज्यों ही वो वजह खत्म हो जाती थी दंगे खत्म हो जाते थे और लोग आपस में फिर से प्यार और स्नेह से रहने लगते थे| लेकिन आज वजह छोटी होती है लेकिन उसे बड़ा बना दिया जाता है| एक छोटी सी बात को लेकर झगड़ा शुरू होता है और वह दंगे-फसाद का रूप ले लेता है| दो समुदाय उसमें शामिल हो जाते हैं और भोली-भाली जनता उनके दंगों से प्रभावित ज्यादा होती है| उनके जो गंदे इरादे होते हैं बसों को जलाना, महिलाओं को परेशान करना, बच्चों को परेशान करना, आत ताइयों की तरह कत्लेआम करना, यह सब गलत है और इन सब को हवा देती है मुझे मानना पड़ेगा कि इन सब को हवा देती है राजनीतिक पार्टियां| लेकिन उन राजनीतिक पार्टियों को भी हम ही बनाते हैं| अगर हम मजबूत रहेंगे, अगर मजबूत रहना चाहते हैं, अगर हम उनकी बात नहीं सुनते हैं और अपने मन की बात सुनते हैं तो हम उनके कहने में नहीं आएंगे और अपने समाज को अच्छा और मजबूत बनाने के लिए हम यह सांप्रदायिक दंगे बंद करेंगे तभी हम सफल हो पाएंगे और प्यार और स्नेह से और शांति से भारत में रह पाएंगे|

vartmaan samay mein jaatiwad hamare desh ki ek gambhir samasya ban gaya hai jaatiwad ne samaj ko buri tarah se apne panjon mein jakad liya hai yah bimari samaj mein barson se sadiyon se faili hui toh thi lekin itne gambhir roop mein nahi thi aaj ke samay mein yah ek nasur ban gaya hai jisse saaf karna jisse hatana jise khatam karna bahut zaroori hai aur mujhe lagta hai samaj ke prabuddh jano ko samaj ke logo ko samaj ke yuvaon ko padhe likhe logo ko is bimari se is nasur se is jakhm se ladna hoga aur ise khatam karna hoga tabhi hamara desh sahi maayne mein swatantra ho payega khushahal ho payega yah sampradayik dange pehle bhi hote the lekin unki wajah bahut choti choti si hoti thi aur jio hi vo wajah khatam ho jaati thi dange khatam ho jaate the aur log aapas mein phir se pyar aur sneh se rehne lagte the lekin aaj wajah choti hoti hai lekin use bada bana diya jata hai ek choti si baat ko lekar jhagda shuru hota hai aur vaah dange fasad ka roop le leta hai do samuday usme shaamil ho jaate hain aur bholi bhali janta unke dango se prabhavit zyada hoti hai unke jo gande Irade hote hain bason ko jalaana mahilaon ko pareshan karna baccho ko pareshan karna at taiyon ki tarah katleam karna yah sab galat hai aur in sab ko hawa deti hai mujhe manana padega ki in sab ko hawa deti hai raajnitik partyian lekin un raajnitik partiyon ko bhi hum hi banate hain agar hum majboot rahenge agar majboot rehna chahte hain agar hum unki baat nahi sunte hain aur apne man ki baat sunte hain toh hum unke kehne mein nahi aayenge aur apne samaj ko accha aur majboot banane ke liye hum yah sampradayik dange band karenge tabhi hum safal ho payenge aur pyar aur sneh se aur shanti se bharat mein reh payenge

वर्तमान समय में जातिवाद हमारे देश की एक गंभीर समस्या बन गया है| जातिवाद ने समाज को बुरी तर

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