क्या वह समय अब आ गया है कि हमारे संविधान में बदलाव होना चाहिए?...


user

Chandraprakash Joshi

Ex-AGM RBI & CEO@ixamBee.com

0:43
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तिथि परिवर्तन जो है वह प्रकृति का नियम है इंग्लिश में बोलते ना चेंज द यूनिवर्सल कांस्टेंट परिवर्तन तो आदत है वह तो होता ही रहेगा तू जैसे से परिवर्तन होता जाता है और उसी तरीके से हमारे रीति रिवाजों और संविधान में भी परिवर्तन होता है इसलिए 70 साल में हमारे संविधान में कितने संशोधन हो चुके हैं आप पढ़ लीजिए संविधान में कब परिवर्तन नहीं हुआ है तो ऐसे तो कोई बात नहीं किया आज कुछ अलग समय आ गया है आज ही परिवर्तन की जरूरत है हमारे संविधान में संशोधन होते रहें और आगे भी होते रहेंगे

tithi parivartan jo hai vaah prakriti ka niyam hai english mein bolte na change the universal constant parivartan toh aadat hai vaah toh hota hi rahega tu jaise se parivartan hota jata hai aur usi tarike se hamare riti rivajon aur samvidhan mein bhi parivartan hota hai isliye 70 saal mein hamare samvidhan mein kitne sanshodhan ho chuke hain aap padh lijiye samvidhan mein kab parivartan nahi hua hai toh aise toh koi baat nahi kiya aaj kuch alag samay aa gaya hai aaj hi parivartan ki zarurat hai hamare samvidhan mein sanshodhan hote rahein aur aage bhi hote rahenge

तिथि परिवर्तन जो है वह प्रकृति का नियम है इंग्लिश में बोलते ना चेंज द यूनिवर्सल कांस्टेंट

Romanized Version
Likes  11  Dislikes    views  353
WhatsApp_icon
8 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user

Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

1:45
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

संविधान में बदलाव से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि क्या सच में संविधान में इतनी ज्यादा बदलाव की जरूरत है या पूरे के पूरे संविधान में बदलाव की जरूरत है? आपको एक इंटरेस्टिंग फेक्ट बताता हूं जब से हमारा संविधान बना है इतनी सारी उसमें अनुच्छेद तथा भाग है इतना बड़ा संविधान पहली बात तो दुनिया किस देश का है ही नहीं और इतने सारे संविधानों को देखकर संविधान को बनाया गया है कि इसमें जो कभी-कभी जो परेशानी होती है उसको थोड़ी संशोधन के साथ सही कर लिया जाता है| इतनी सारी कंट्री जो है उनका पूरा का पूरा संविधान चेंज हो गया| लेकिन हमारी कंट्री एक ऐसी कंट्री है जिसका संविधान जब से बना है, तब से वैसा का वैसा ही है और हमारे देश में कभी कोई इतनी ज्यादा खराब परिस्थिति नहीं आई| हो सकता है कि आपातकाल की स्थिति या उसके पहले जब युद्ध छिड़ा था पाकिस्तान से उस समय की स्थिति थोड़ी खराब थी, लेकिन उसे संविधान पर कोई इफ़ेक्ट नहीं आया| मुझे लगता है कि जैसे कि नेपाल में भी संविधान परिवर्तित किया गया, यूरोपियन कंट्रीज में कुछ परिवर्तन किया गया, अफ्रीकन कंट्रीज में काफी संविधान चेंज किया गया तो मुझे लगता नहीं है कि भारत में संविधान परिवर्तन करने की कोई जरूरत है| भारत का संविधान अच्छा है और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में भारत को स्थापित करने में संविधान का बहुत बड़ा योगदान है| आखरी बात यही आ जाती है कि हमें लोकतंत्र होना चाहिए, संविधान हमें लोकतंत्र बनाता है, एक राइट देता है हमें इंसान होने के लिए, मानव अधिकार देता है| इसके अलावा उसमें सभी को समानता इक्वालिटी दी गई है तो संविधान में बदलने की आवश्यकता नहीं है| सम्मान करना चाहिए संविधान में दी हुई हर चीज का, संविधान का सम्मान करना चाहिए और अपनी सोच को थोड़ा डेवलप करना चाहिए| संविधान को परिवर्तित करने से अगर आप की नौकरी लग जाती है, तो मैं कहूंगा कि आज ही परिवर्तित कर दीजिए| लेकिन उसे नौकरी मिलेगी कि उससे आपका रोजगार नहीं मिलेगा उस से अब तक खाना नहीं भरेगा आप उन चीजों के बारे में सोचिए जो सच में देश के लिए एस्सेन्शिअल है धन्यवाद|

samvidhan mein badlav se pehle hamein yah sochna chahiye ki kya sach mein samvidhan mein itni zyada badlav ki zarurat hai ya poore ke poore samvidhan mein badlav ki zarurat hai aapko ek interesting fekt batata hoon jab se hamara samvidhan bana hai itni saree usme anuched tatha bhag hai itna bada samvidhan pehli baat toh duniya kis desh ka hai hi nahi aur itne saare sanvidhanon ko dekhkar samvidhan ko banaya gaya hai ki isme jo kabhi kabhi jo pareshani hoti hai usko thodi sanshodhan ke saath sahi kar liya jata hai itni saree country jo hai unka pura ka pura samvidhan change ho gaya lekin hamari country ek aisi country hai jiska samvidhan jab se bana hai tab se waisa ka waisa hi hai aur hamare desh mein kabhi koi itni zyada kharab paristithi nahi I ho sakta hai ki aapatkal ki sthiti ya uske pehle jab yudh chida tha pakistan se us samay ki sthiti thodi kharab thi lekin use samvidhan par koi effect nahi aaya mujhe lagta hai ki jaise ki nepal mein bhi samvidhan parivartit kiya gaya european countries mein kuch parivartan kiya gaya african countries mein kaafi samvidhan change kiya gaya toh mujhe lagta nahi hai ki bharat mein samvidhan parivartan karne ki koi zarurat hai bharat ka samvidhan accha hai aur loktantrik ganrajya ke roop mein bharat ko sthapit karne mein samvidhan ka bahut bada yogdan hai aakhri baat yahi aa jaati hai ki hamein loktantra hona chahiye samvidhan hamein loktantra banata hai ek right deta hai hamein insaan hone ke liye manav adhikaar deta hai iske alava usme sabhi ko samanata ikwaliti di gayi hai toh samvidhan mein badalne ki avashyakta nahi hai sammaan karna chahiye samvidhan mein di hui har cheez ka samvidhan ka sammaan karna chahiye aur apni soch ko thoda develop karna chahiye samvidhan ko parivartit karne se agar aap ki naukri lag jaati hai toh main kahunga ki aaj hi parivartit kar dijiye lekin use naukri milegi ki usse aapka rojgar nahi milega us se ab tak khana nahi bharega aap un chijon ke bare mein sochiye jo sach mein desh ke liye essenshial hai dhanyavad

संविधान में बदलाव से पहले हमें यह सोचना चाहिए कि क्या सच में संविधान में इतनी ज्यादा बदलाव

Romanized Version
Likes  14  Dislikes    views  267
WhatsApp_icon
play
user

Mehmood Alum

Law Student

0:18

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारे देश के संविधान में समय-समय पर बदलाव होते ही रहते हैं पहला संविधान संशोधन 1951 में किया गया था उसके बाद से अब तक सबसे ज्यादा संविधान संशोधन हो चुके हैं अतः यह कहा जा सकता है कि संविधान में संशोधन होना एक आम बात है

hamare desh ke samvidhan mein samay samay par badlav hote hi rehte hain pehla samvidhan sanshodhan 1951 mein kiya gaya tha uske baad se ab tak sabse zyada samvidhan sanshodhan ho chuke hain atah yah kaha ja sakta hai ki samvidhan mein sanshodhan hona ek aam baat hai

हमारे देश के संविधान में समय-समय पर बदलाव होते ही रहते हैं पहला संविधान संशोधन 1951 में कि

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  133
WhatsApp_icon
user

RAJU RAJPUT

Raj Mistari

3:50
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार दोस्तों मैं राजू राजू बताइए संविधान के बाद से कुछ समय और बदलाव वहां पर लगाओ मारे 1991 हुआ था लेकिन बात बदलाव करने से ही सब कुछ नहीं सहमत होते हैं जब लोग उस पर अमल भी कर क्या हमारा संविधान जो लिखा हुआ है उसके हिसाब से लोग चलते हैं नहीं सकते हमारे संविधान की स्वच्छता व्यक्ति हमारे देश के ना जवानी करते हैं हमारे देश में जो नेता हैं सबसे ज्यादा वही अपमान करते संविधान का थाने में जो पुलिस होती हैं वह भी सम्मान नहीं करते हैं घर सारे अपने सारा सामान कर दें हमारा देश तो नजरिया फिर बन जाएगा भाइयों संविधान के प्रति लिखा हुआ एक एक शब्द सही है अगर संविधान के हिसाब से अगर 50 प्रश्न भी हमारे देश की पुलिस चल जाएगा करता हूं हमारा देश सोने की चिड़िया बनने में देर नहीं लगेगा लेकिन हमारे देश में इतना भ्रष्टाचार लोग कर रहे हैं सब इधर को भूल जाते हैं जब नौकरी पाते पुलिस की नौकरी पाते हैं तब तो समझा दे कसमें खा गीता कुरान कसमें खाते हैं जो भी करेंगे शक करेंगे सच के सिवा कुछ नहीं करेंगे लेकिन उसके बाद जस्ट उल्टा कर देते हैं कि जो भी करेंगे छोड़ करेंगे सच कुछ नहीं करेंगे कोई क्राइम हुआ हजार 500 ले करके उसको छोड़ दिया कर्म खत्म क्यों भाई संविधान में लिखा है लोगों से पैसे ले लो छोड़ दो क्राइम मत छोड़ो मुजरिम को अगर उसने गलत किया है तो उसको सजा दीजिए संविधान में खुश नहीं लिखिए हमारे देश में खुश बहुत से लोगों ने ताले पुलिस वाली लेते हैं ऐसा होना चाहिए संविधान को बदलाव की बात करते हैं संविधान पर अमल करने की बात एक बार नहीं करते हो संविधान पर अमल भी करना चाहिए नहीं कर सकते हो क्योंकि आपके पापा ने गर्म होगी संविधान से चलोगे तो कर नहीं करोगी मैं पूरे देशवासी पुलिस वालों को अब क्या बताएं जोश बहुत जोर से आता कि फिर भी मैं सहमत हूं अगर हमारे देश की पुलिस पूरे देशवासियों को मैं बोल रहा हूं खुश लेना बंद कर दो जो क्राइम हो उसको सजा दीजिए तब आप संविधान पर अमल करोगे तभी तो समझेंगे संविधान को चाहते हो समझाने साहब से काम होता है तब आप संविधान में बदलाव की बात की थी मैंने इस पर अमल करके दिखाओ वह सब कर पाओगे तो मैं समझा बतंगड़ बात करना संविधान जिनको संविधान के 1 शब्द लिखने की औकात नहीं वह लोग संविधान बदलने की बात करते हैं घर में परिवार को चलाने की मुखिया औकात नहीं है जो बात करते धन्यवाद दोस्तों

namaskar doston main raju raju bataye samvidhan ke baad se kuch samay aur badlav wahan par lagao maare 1991 hua tha lekin baat badlav karne se hi sab kuch nahi sahmat hote hain jab log us par amal bhi kar kya hamara samvidhan jo likha hua hai uske hisab se log chalte hain nahi sakte hamare samvidhan ki swachhta vyakti hamare desh ke na jawaani karte hain hamare desh mein jo neta hain sabse zyada wahi apman karte samvidhan ka thane mein jo police hoti hain vaah bhi sammaan nahi karte hain ghar saare apne saara saamaan kar de hamara desh toh najariya phir ban jaega bhaiyo samvidhan ke prati likha hua ek ek shabd sahi hai agar samvidhan ke hisab se agar 50 prashna bhi hamare desh ki police chal jaega karta hoon hamara desh sone ki chidiya banne mein der nahi lagega lekin hamare desh mein itna bhrashtachar log kar rahe hain sab idhar ko bhool jaate hain jab naukri paate police ki naukri paate hain tab toh samjha de kasmein kha geeta quraan kasmein khate hain jo bhi karenge shak karenge sach ke siva kuch nahi karenge lekin uske baad just ulta kar dete hain ki jo bhi karenge chod karenge sach kuch nahi karenge koi crime hua hazaar 500 le karke usko chod diya karm khatam kyon bhai samvidhan mein likha hai logo se paise le lo chod do crime mat chodo mujarim ko agar usne galat kiya hai toh usko saza dijiye samvidhan mein khush nahi likhiye hamare desh mein khush bahut se logo ne tale police wali lete hain aisa hona chahiye samvidhan ko badlav ki baat karte hain samvidhan par amal karne ki baat ek baar nahi karte ho samvidhan par amal bhi karna chahiye nahi kar sakte ho kyonki aapke papa ne garam hogi samvidhan se chaloge toh kar nahi karogi main poore deshvasi police walon ko ab kya bataye josh bahut jor se aata ki phir bhi main sahmat hoon agar hamare desh ki police poore deshvasiyon ko main bol raha hoon khush lena band kar do jo crime ho usko saza dijiye tab aap samvidhan par amal karoge tabhi toh samjhenge samvidhan ko chahte ho samjhane saheb se kaam hota hai tab aap samvidhan mein badlav ki baat ki thi maine is par amal karke dikhaao vaah sab kar paoge toh main samjha batangad baat karna samvidhan jinako samvidhan ke 1 shabd likhne ki aukat nahi vaah log samvidhan badalne ki baat karte hain ghar mein parivar ko chalane ki mukhiya aukat nahi hai jo baat karte dhanyavad doston

नमस्कार दोस्तों मैं राजू राजू बताइए संविधान के बाद से कुछ समय और बदलाव वहां पर लगाओ मारे 1

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  107
WhatsApp_icon
user

BJ RAM

Bureaucrats

1:32
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जहां तक भारतीय संविधान में बदलाव का प्रश्न है अगर गंभीरता पूर्वक सोचा जाए तो आज तक जितने भी संविधान संशोधन हुए हैं यह सभी संविधान में बदलाव के ही सूचक है यह तो काफी दूरदर्शिता के साथ भारतीय संविधान को बनाया गया था और भारतीय समंदर जैसे मुद्दों पर हमेशा ही खरी उतरी है और देशकाल परिस्थितियों के अनुसार बदलाव होते ही रहता है तो यह जो संशोधन है संशोधन के माध्यम से बदलाव होते रहना चाहिए यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया और अपना न्यायिक प्रक्रिया भी है कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी कह दिया है कि संविधान के जो मूलभूत तत्व है उनमें परिवर्तन नहीं होना चाहिए केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य में जो निर्णय दिया गया था उसमें संविधान की मूल भावना को आहत किए हुए आप जितना भी संविधान संशोधन करना चाहे जो विदेश पर मत हो उसको किया जाता

jaha tak bharatiya samvidhan me badlav ka prashna hai agar gambhirta purvak socha jaaye toh aaj tak jitne bhi samvidhan sanshodhan hue hain yah sabhi samvidhan me badlav ke hi suchak hai yah toh kaafi duradarshita ke saath bharatiya samvidhan ko banaya gaya tha aur bharatiya samundar jaise muddon par hamesha hi khadi utari hai aur deshkal paristhitiyon ke anusaar badlav hote hi rehta hai toh yah jo sanshodhan hai sanshodhan ke madhyam se badlav hote rehna chahiye yah loktantrik prakriya aur apna nyayik prakriya bhi hai ki sarvoch nyayalaya ne bhi keh diya hai ki samvidhan ke jo mulbhut tatva hai unmen parivartan nahi hona chahiye keshvanand bharati banam kerala rajya me jo nirnay diya gaya tha usme samvidhan ki mul bhavna ko aahat kiye hue aap jitna bhi samvidhan sanshodhan karna chahen jo videsh par mat ho usko kiya jata

जहां तक भारतीय संविधान में बदलाव का प्रश्न है अगर गंभीरता पूर्वक सोचा जाए तो आज तक जितने

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  126
WhatsApp_icon
user
0:32
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी यह समय आ गया है कि हमारे संविधान में कुछ कुछ बदलाव किया जाए क्योंकि मैं नहीं मानता कि हमारे संविधान में अधिक बदलाव की जरूरत है क्योंकि हमारा संविधान विश्व का एक ऐसा एकमात्र संविधान है जहां पर समाधान ना तो अधिक अधूरे उन्ना ही अधिक लचीला है इसलिए ज्यादा संतुलन की आवश्यकता नहीं है हमारे संविधान में

ji yah samay aa gaya hai ki hamare samvidhan mein kuch kuch badlav kiya jaaye kyonki main nahi manata ki hamare samvidhan mein adhik badlav ki zarurat hai kyonki hamara samvidhan vishwa ka ek aisa ekmatra samvidhan hai jaha par samadhan na toh adhik adhure unna hi adhik lachila hai isliye zyada santulan ki avashyakta nahi hai hamare samvidhan mein

जी यह समय आ गया है कि हमारे संविधान में कुछ कुछ बदलाव किया जाए क्योंकि मैं नहीं मानता कि ह

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  137
WhatsApp_icon
user

Pragati

Aspiring Lawyer

1:21
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा नहीं है कि समय के साथ-साथ हमारे संविधान में बदलाव नहीं होते और बल्कि अब तक बहुत सारे अमेंडमेंट हो तुम हो चुके हैं कॉन्स्टिट्यूशन में और उनको पूरी तरह से फॉलो पेश किया जा रहा है यह बात बिल्कुल सच है कि समय के साथ बदलाव बहुत ज्यादा जरूरी चीज है और हमारे नेता और हमारे कॉन्स्टिट्यूशन मेकस विश्वास को बहुत अच्छे से जानते हैं और इसकी वजह से बहुत सारे बदलाव हो चुके हैं बहुत सारे अमेंडमेंट हमने देखे हैं और जैसे कुछ एग्जांपल हम ले सकते हैं कि सती पहले एक इल्लीगल नहीं माना जाता था बल्कि आप सभी को इल्लीगल कर दिया गया और उसके बाद अभी हम ट्रिपल तलाक को भी देखना ट्रिपल तलाक को भी अभी अभी निकल कर दिया गया है और उस समय की तकनीकी हिसाब से राइट टू प्राइवेसी बुलाया गया है और जो कि अभी अभी देश में आया है उसके अलावा और बहुत सी ऐसी चीज है जिसमें हमारा देश तरक्की कर रहा है संविधान में बदलाव हो रहे हैं तो मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि यह समय के साथ-साथ संविधान में बदलाव बहुत जरूरी है और वह देश के हित के लिए ही होने चाहिए लेकिन जो आप कह किस समय आ गया है कि हमारे संविधान में बदलाव होना चाहिए तो यह पूरी तरह से सच है कि बदलाव हो रहे हैं जितने होने चाहिए और जो तू जरूरी है तो मेरा मानना है कि बदलाव हो रहे हैं और आगे भी ऐसा जब भी जरूरत होगी तो मारेला में 10 उसको बिल्कुल बताएंगे और जो जनता के हित में होगा वही चीज़ की जाएगी

aisa nahi hai ki samay ke saath saath hamare samvidhan mein badlav nahi hote aur balki ab tak bahut saare Amendment ho tum ho chuke hain Constitution mein aur unko puri tarah se follow pesh kiya ja raha hai yah baat bilkul sach hai ki samay ke saath badlav bahut zyada zaroori cheez hai aur hamare neta aur hamare Constitution mekas vishwas ko bahut acche se jante hain aur iski wajah se bahut saare badlav ho chuke hain bahut saare Amendment humne dekhe hain aur jaise kuch example hum le sakte hain ki sati pehle ek illegal nahi mana jata tha balki aap sabhi ko illegal kar diya gaya aur uske baad abhi hum triple talak ko bhi dekhna triple talak ko bhi abhi abhi nikal kar diya gaya hai aur us samay ki takniki hisab se right to privacy bulaya gaya hai aur jo ki abhi abhi desh mein aaya hai uske alava aur bahut si aisi cheez hai jisme hamara desh tarakki kar raha hai samvidhan mein badlav ho rahe hain toh main is baat se puri tarah sahmat hoon ki yah samay ke saath saath samvidhan mein badlav bahut zaroori hai aur vaah desh ke hit ke liye hi hone chahiye lekin jo aap keh kis samay aa gaya hai ki hamare samvidhan mein badlav hona chahiye toh yah puri tarah se sach hai ki badlav ho rahe hain jitne hone chahiye aur jo tu zaroori hai toh mera manana hai ki badlav ho rahe hain aur aage bhi aisa jab bhi zarurat hogi toh marela mein 10 usko bilkul batayenge aur jo janta ke hit mein hoga wahi cheez ki jayegi

ऐसा नहीं है कि समय के साथ-साथ हमारे संविधान में बदलाव नहीं होते और बल्कि अब तक बहुत सारे अ

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  200
WhatsApp_icon
user

Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

1:39
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निखिल जरूर कंपनी फर्स्ट सेंचुरी में है और वक्त के साथ अच्छी तेजी से बदलनी चाहिए रूल रेगुलेशन बदलना चाहिए और इंप्रूवमेंट होनी चाहिए लिखिए और कुछ एग्जांपल के तौर पर समझाती हूं कि जो एलजीबीटी कम्युनिटी है उसको लेकर हमारा देश इतना ओपन हार्ट इन नहीं है ज्यादा वेलकम नहीं करता जो एलजीबीटी कम्युनिटी होती है उन लोगों को आपकी कंट्री में अभी से चलता है तो हमारे संविधान में अभी थोड़ी देर पहले बात भी हुई थी यह बात उठी थी कि जो बुद्ध आ रहा है उसमें चेंज सारे चाहिए उसे बंद कर देना चाहिए तो मुझे लगता है कि बिल्कुल क्योंकि देखी है जिसे जो एलजीबीटी कम्युनिटी का हिसाब से आपको दे रही हूं तू किसी के हाथ में नहीं है सारी चीजें अगर कोई बंदा ऐसा फील करता है कि वह असीम शक्ति तरफ अट्रैक्ट है तो क्यों नहीं उसे एक्सेप्ट किया जाए उसे जरुर एक्सेप्ट करना चाहिए सोसाइटी को एक्सेप्ट करना चाहिए तू इसी तरह से और भी बहुत सारे चेंजेस है जैसे कि रिजर्वेशन को लेकर बात कर लीजिए या फिर आप बात कर लीजिए कोई और चीज डेवलपमेंट को लेकर इसलिए ट्रिपल तलाक बिल अगर पास हो जाएगा तो एक नया चेंज होगा तो यह सब चीज की जरूरत हमें जरूरत है क्योंकि वक्त के साथ तेजी से बदलती है संविधान को बदलने की भी जरूरत है अगर संविधान नहीं बदलेगा तो जो मॉडल सिटी हम वेस्टर्न कल्चर वस वेस्टर्न कम्युनिटी से जो हम सीख रहे हैं आज के समय में वह सीख लेंगे लेकिन उसको मारने के लिए हमारे पास कोई नहीं होगा यानी कि उसका कोई दोष हमारे पास बैकग्राउंड नहीं होगा तो जरूर बदल जानी चाहिए

nikhil zaroor company first century mein hai aur waqt ke saath achi teji se badalni chahiye rule regulation badalna chahiye aur improvement honi chahiye likhiye aur kuch example ke taur par samjhati hoon ki jo LGBT community hai usko lekar hamara desh itna open heart in nahi hai zyada welcome nahi karta jo LGBT community hoti hai un logo ko aapki country mein abhi se chalta hai toh hamare samvidhan mein abhi thodi der pehle baat bhi hui thi yah baat uthi thi ki jo buddha aa raha hai usme change saare chahiye use band kar dena chahiye toh mujhe lagta hai ki bilkul kyonki dekhi hai jise jo LGBT community ka hisab se aapko de rahi hoon tu kisi ke hath mein nahi hai saree cheezen agar koi banda aisa feel karta hai ki vaah asim shakti taraf attract hai toh kyon nahi use except kiya jaaye use zaroor except karna chahiye society ko except karna chahiye tu isi tarah se aur bhi bahut saare changes hai jaise ki reservation ko lekar baat kar lijiye ya phir aap baat kar lijiye koi aur cheez development ko lekar isliye triple talak bill agar paas ho jaega toh ek naya change hoga toh yah sab cheez ki zarurat hamein zarurat hai kyonki waqt ke saath teji se badalti hai samvidhan ko badalne ki bhi zarurat hai agar samvidhan nahi badlega toh jo model city hum western culture vas western community se jo hum seekh rahe hai aaj ke samay mein vaah seekh lenge lekin usko maarne ke liye hamare paas koi nahi hoga yani ki uska koi dosh hamare paas background nahi hoga toh zaroor badal jani chahiye

निखिल जरूर कंपनी फर्स्ट सेंचुरी में है और वक्त के साथ अच्छी तेजी से बदलनी चाहिए रूल रेगुले

Romanized Version
Likes  1  Dislikes    views  193
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!