नास्तिक लोग अपराधियों होने की कितनी संभावना है? कृपया अपने उत्तर को सही ठहराएँ ..?...


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सबसे पहले तो आपको यह बात समझ लेनी चाहिए कि नास्तिक इंसान कौन होते हैं या कैसे होते हैं उनकी विचारधारा कैसी होती है और वह लोग नास्तिक क्यों बने लोग नास्तिक होने पर यह न सोचे कि वह इंसान गलत है या प्रोग्राम कर सकता है या फिर उन लोगों के अपराधी होने की संभावना जाता है नास्तिक इंसान बनना बहुत कठिन काम है क्योंकि नास्तिक इंसान तर्क बुद्धि के साथ अपनी जान को बढ़ाता है और हर प्रश्न जवाब का उत्तर देना वह जानता है हर धर्म और ईश्वर और जो मान्यताएं हैं उनके को गलत है रहता है वह है जो आडंबर पाखंड जैसी जो चीजें होती हैं उनको गलत मानता है इसलिए वह नाचते कहलाता है और नास्तिक बन्ना मेरे हिसाब से बहुत ही कठिन काम है क्योंकि हर इंसान अपने आप को नास्तिक नहीं बोल सकता है क्योंकि नास्तिक होने के लिए बहुत ही ज्ञान की जरूरत होती है उसको बहुत कुछ पढ़ना पड़ता है हर विषय में जानना पड़ता है और हर इंसान के जवाब का उसको उत्तर देना होता है और मेरे ख्याल से तो नास्तिक लोग बहुत ही अच्छे होते हैं और उनकी अपराधी होने की संभावनाएं बहुत कम होती है हम अभी तक देखते आए हैं कि जितने धार्मिक लोग हैं वह अपना चेहरा तो धार्मिकता जैसे दिखाते हैं लेकिन अंदर से वह कुछ और होते हैं कोई भी धर्म का कोई भी इंसान जो धार्मिक है किसी भी धर्म का हो वह दूसरे धर्म की बुराई करता है दूसरे धर्म को गलत ठहरा था तो किसी चीज को किसी धर्म या किसी इंसान मतलबी इंसान को गलत ठहराना ठीक नहीं होता है और गलत नहीं होता है वैसे तो धार्मिकता में जो कट्टरता रहती है उसके कारण अपराध सबसे ज्यादा होते हैं अधिकतर जो धार्मिक के कट्टरवादी लोग होते हैं अपराध को सबसे ज्यादा करते हैं

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सबसे पहले तो आपको यह बात समझ लेनी चाहिए कि नास्तिक इंसान कौन होते हैं या कैसे होते हैं उनक

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Ishita Seth

Obstinate Programmer

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चलिए सबसे पहले तो हम यह जानते हैं कि नाश्ते कौन होता है नास्तिक वह लोग होते हैं जो भगवान में नहीं मानते जो रिलीज इन हिंदू कल्चर है और जूही रिलीजियस बुक है बुक सेंटर राहुल ई बुक्स होती हैं गीता और बाइबल वगैरा-वगैरा जो नास्तिक होते हैं वह लोग इन सब में नहीं मानते हैं और नास्तिक लोगों की अपराधी होने की संभावना बहुत ही ज्यादा होती है मेरे हिसाब से क्योंकि जो लोग नास्तिक होते हैं उन्हें लाइव स्कोर सहित है और सही तरह से जीने का ज्ञान नहीं मिलता क्योंकि मैं भगवान में नहीं मानते और कभी बड़ी नहीं होती है कभी इस जो हमें ज्ञान मिलता है उसे की लाइफ को जीने का सही तरीका क्या है कौन सा काम गलत है कौन सा काम सही है यह सामने नहीं पता होता जो लोग कंप्यूटर वाले लोग जो आज तक होते हैं जिन्हें पता होता है कि यह गलत है हमें ऐसा नहीं करना चाहिए अपराध है और यह से किसी को हानि पहुंच सकती है हमको हॉट हो सकते हैं तो अगर हम इन दोनों चीजों में कंपैरिजन करें तो मेरे हिसाब से जिस इंसान को ज्ञान होगा कि क्या सही है क्या गलत है और जो ज्ञान हमें इनबॉक्स में पड़ता है या मैं बचपन से मिलता है यह बचपन से सिखाया जाता है वह भी इनबॉक्स के सहारे ही सिखाया जाता है और भगवान में ही मानते हैं तो फिर अगर हम गम था जिनका कुल जोड़ नास्तिक होते हैं उन्हें ऐसा कुछ ज्ञान नहीं होता तो उनका अपराध करने की जो संभावना है वह जो प्राइम करते हैं वह तो संभावना है तो पॉसिबिलिटी है वह बहुत ज्यादा पड़ जाती है

chaliye sabse pehle toh hum yah jante hai ki naste kaun hota hai nastik vaah log hote hai jo bhagwan mein nahi maante jo release in hindu culture hai aur juhi rilijiyas book hai book center rahul ee books hoti hai geeta aur bible vagaira vagaira jo nastik hote hai vaah log in sab mein nahi maante hai aur nastik logo ki apradhi hone ki sambhavna bahut hi zyada hoti hai mere hisab se kyonki jo log nastik hote hai unhe live score sahit hai aur sahi tarah se jeene ka gyaan nahi milta kyonki main bhagwan mein nahi maante aur kabhi baadi nahi hoti hai kabhi is jo hamein gyaan milta hai use ki life ko jeene ka sahi tarika kya hai kaun sa kaam galat hai kaun sa kaam sahi hai yah saamne nahi pata hota jo log computer waale log jo aaj tak hote hai jinhen pata hota hai ki yah galat hai hamein aisa nahi karna chahiye apradh hai aur yah se kisi ko hani pohch sakti hai hamko hot ho sakte hai toh agar hum in dono chijon mein kampairijan kare toh mere hisab se jis insaan ko gyaan hoga ki kya sahi hai kya galat hai aur jo gyaan hamein inbox mein padta hai ya main bachpan se milta hai yah bachpan se sikhaya jata hai vaah bhi inbox ke sahare hi sikhaya jata hai aur bhagwan mein hi maante hai toh phir agar hum gum tha jinka kul jod nastik hote hai unhe aisa kuch gyaan nahi hota toh unka apradh karne ki jo sambhavna hai vaah jo prime karte hai vaah toh sambhavna hai toh possibility hai vaah bahut zyada pad jaati hai

चलिए सबसे पहले तो हम यह जानते हैं कि नाश्ते कौन होता है नास्तिक वह लोग होते हैं जो भगवान म

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Kunjansinh Rajput

Aspiring Journalist

1:28

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देखिए अगर हम नास्तिक लोग के उपरांत उनकी बात करें अपराधी है इस चीज की बात करें तो पिछले साल से गर्म देखी तो 2017 में जितनी भी क्रिमिनल वारदात हुआ तो लव कुश में लगभग एक प्रसंग जो है क्राइम जो है एक भी नहीं पॉइंट 7:00 5% शुक्राणु जो है उसमें नास्तिक लोग ने किया नास्तिक लोग जब अपराधी रह चुके हैं किंतु गरम 2017 की बात करें तो सबसे ज्यादा 2017 मैंने देखा के सबसे ज्यादा जो मुझे बनाता के खिलाफ हुए हैं तो का नाका पर नास्तिक लोगों के होने की संभावना जो है कि नहीं है जितने भी भारत में पिछले वर्ष घायल हुए थे तो उसमें 10 पॉइंट 1% लोग ही नाश्ता करते हैं किंतु हैं आप इनमे से कुछ प्रतिशत लोग प्यार करते हैं लेकिन यह कहना कि ना तेरे को पता नहीं है और मेरे खिलाफ जो सबसे ज्यादा अपराध हुआ है यह सच्चाई है और आधी होते हैं उससे ज्यादा अभी तक हमने देखा है

dekhiye agar hum nastik log ke uprant unki baat kare apradhi hai is cheez ki baat kare toh pichle saal se garam dekhi toh 2017 mein jitni bhi criminal vaardaat hua toh love kush mein lagbhag ek prasang jo hai crime jo hai ek bhi nahi point 7 00 5 shukraanu jo hai usme nastik log ne kiya nastik log jab apradhi reh chuke hai kintu garam 2017 ki baat kare toh sabse zyada 2017 maine dekha ke sabse zyada jo mujhe banata ke khilaf hue hai toh ka naka par nastik logo ke hone ki sambhavna jo hai ki nahi hai jitne bhi bharat mein pichle varsh ghayal hue the toh usme 10 point 1 log hi nashta karte hai kintu hai aap inme se kuch pratishat log pyar karte hai lekin yah kehna ki na tere ko pata nahi hai aur mere khilaf jo sabse zyada apradh hua hai yah sacchai hai aur aadhi hote hai usse zyada abhi tak humne dekha hai

देखिए अगर हम नास्तिक लोग के उपरांत उनकी बात करें अपराधी है इस चीज की बात करें तो पिछले साल

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Hhhgnbhh

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देखिए मुझे मेरी इस चीज में सोच बहुत ज्यादा अलग है मुझे नहीं होती लगता कि नास्तिक होने से कहीं आपका प्रार्थी होने पर कोई भी लिंक है नास्तिक मतलब यह होता है कि आप यह नहीं मानते कि कोई भगवान है इसका मतलब यह नहीं है कि आप यह नहीं मानने की अच्छे और बुरे में फर्क क्या है आप अच्छा और बुरे में कहां पर आपको कुछ राह पर चलना आप यह नहीं जानते अपराधी नास्तिक नहीं हो सकता और सो सकता कि मैं भगवान में माने भी तुम मेरा मेरे को नहीं लगता कि नास्तिक लोग अगर वह है तो उनका अपराधी होने की संभावना बहुत ज्यादा हो जाएगी और इसका यह भी रीजन है कि आप अगर हो सके तो भगवान में नहीं मानते पर आपको यह आपका दिमाग तो यह आपको हमेशा ही बताएगा कि क्या सही है और क्या गलत और जिस व्यक्ति ने कुछ गलत काम करना होता है उसको नाश्ता किया उसको भगवान में मारने की जरूरत नहीं है उसकी बुद्धि उस समय इतनी भ्रष्ट हो जाती है कि मैं गलत करके ही रहता है और देखा जाए तो भगवान एक मूर्ति है जिन्हें हम पूछ दिन में बिलीव करते हैं तो मुझे लगता है कि काफी नास्तिक लोग ऐसे होते हैं जो उनकी जगह अपने दोस्तों की सुने सही लगती है मैं उसको पूछता और उस में बिलीव करते हैं तो मेरे हिसाब से यह सोच बिल्कुल गलत है कि अगर आप नाश्ते क्या तू ही आप अपराध करेंगे मैं यह नहीं मना कर रही कि नास्तिक लोग अपराध नहीं करते नास्तिक लोग भी अपराध करते हैं पर वहीं दूसरी ओर जो लोग भगवान में मानते हैं बेबी अपराध कर लेते हैं इंसान की बुद्धि पर और इंसान की गलत और सही निर्णय करने पर निर्भर करता है ना कि उस के नाश्ते के भगवान को मानने पर

dekhiye mujhe meri is cheez mein soch bahut zyada alag hai mujhe nahi hoti lagta ki nastik hone se kahin aapka prarthi hone par koi bhi link hai nastik matlab yah hota hai ki aap yah nahi maante ki koi bhagwan hai iska matlab yah nahi hai ki aap yah nahi manne ki acche aur bure mein fark kya hai aap accha aur bure mein kahaan par aapko kuch raah par chalna aap yah nahi jante apradhi nastik nahi ho sakta aur so sakta ki main bhagwan mein maane bhi tum mera mere ko nahi lagta ki nastik log agar vaah hai toh unka apradhi hone ki sambhavna bahut zyada ho jayegi aur iska yah bhi reason hai ki aap agar ho sake toh bhagwan mein nahi maante par aapko yah aapka dimag toh yah aapko hamesha hi batayega ki kya sahi hai aur kya galat aur jis vyakti ne kuch galat kaam karna hota hai usko nashta kiya usko bhagwan mein maarne ki zarurat nahi hai uski buddhi us samay itni bhrasht ho jaati hai ki main galat karke hi rehta hai aur dekha jaaye toh bhagwan ek murti hai jinhen hum puch din mein believe karte hai toh mujhe lagta hai ki kaafi nastik log aise hote hai jo unki jagah apne doston ki sune sahi lagti hai usko poochta aur us mein believe karte hai toh mere hisab se yah soch bilkul galat hai ki agar aap naste kya tu hi aap apradh karenge main yah nahi mana kar rahi ki nastik log apradh nahi karte nastik log bhi apradh karte hai par wahi dusri aur jo log bhagwan mein maante hai baby apradh kar lete hai insaan ki buddhi par aur insaan ki galat aur sahi nirnay karne par nirbhar karta hai na ki us ke naste ke bhagwan ko manne par

देखिए मुझे मेरी इस चीज में सोच बहुत ज्यादा अलग है मुझे नहीं होती लगता कि नास्तिक होने से क

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Apurva D

Optimistic Coder

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मुझे नहीं लगता कि ऐसा नहीं करते इसलिए क्योंकि मेरे साथ काम करता है अच्छा करता है अपने बलबूते पर करता है उस को मालूम है कि उसको क्या आता है और उसमें क्या-क्या करना है और खुद में क्या अंतर मतलब उसकी न्यूज़ लिए रोते हैं और कभी-कभी क्या कुछ काम हो गया गलत हो गया बहुत परेशान है झूठ बोलते हो फिर भगवान की मूर्ति को अपने ऊपर होना बहुत जरूरी होता है - 1 लोग अपराधी होने की संभावना कम है क्योंकि हम हमेशा ऐसा नहीं कर सकते

mujhe nahi lagta ki aisa nahi karte isliye kyonki mere saath kaam karta hai accha karta hai apne balbute par karta hai us ko maloom hai ki usko kya aata hai aur usme kya kya karna hai aur khud mein kya antar matlab uski news liye rote hain aur kabhi kabhi kya kuch kaam ho gaya galat ho gaya bahut pareshan hai jhuth bolte ho phir bhagwan ki murti ko apne upar hona bahut zaroori hota hai 1 log apradhi hone ki sambhavna kam hai kyonki hum hamesha aisa nahi kar sakte

मुझे नहीं लगता कि ऐसा नहीं करते इसलिए क्योंकि मेरे साथ काम करता है अच्छा करता है अपने बलबू

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Pragati

Aspiring Lawyer

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किसी भी इंसान के आस्तिक या नास्तिक होने पर उसके अपराधियों ने की बिल्कुल भी संभावनाएं नहीं है क्योंकि एक इंसान नास्तिक या आस्तिक इस तरह से होता है कि वह भगवान को मानता है कि नहीं मानता तू जो इंसान भगवान को नहीं मानता है तो वह हो सकता है किसी और तरह की चीज में अपना सुकून पाता हूं चाहे वह उसका काम हो या कोई और चीज हो तो यह जरूरी नहीं है कि आस्था जैसे इंसान में है भगवान के प्रति वह इंसान अच्छा होता है और उसी के पास हर चीज सही होती है जो लोग भगवान में नहीं मानते हैं तो हो सकता है उनका कुछ और जरिया हो और वह किसी और तरह से सुकून पाऊं जैसे कि आपको हम ले सकते हैं कि कोई इंसान अगर अपना काम को अपना भगवान मानता है और उसी में पूरे दिन लगा रहता है तो यह भी तरीका हो सकता है कि वह अपने आगे बढ़ सके अच्छा काम कर सके तो वह यह हम यह नहीं कि अपराधी है और कोई और भी चीज है और इसके अलावा में एक और चीज आपको बताना चाहूंगी कि हाल ही में सविनय जन देखा कि जो बाबा राम रहीम थे वह बहुत ही आस्तिक थे और बहुत ही अच्छे अच्छे लोगों के लिए काम करा करते थे परंतु आखिर में क्या निकला वह एक अपराधी निकले तो क्या आप यह नहीं कहेंगे कि काश इंसान भी अपराधियों सकता है तो ऐसा कुछ भी नहीं है नास्तिक अपराधी होगा और बाकी बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो नास्तिक होते हैं और उन लोगों को नहीं लगता कि जो मूर्ति है या किसी तरह से हाथ जोड़कर या भगवान की पूजा कर कर आस्था प्रकट करना एक अच्छा काम है तू हम लोगों को नाश्ते कह देते हैं परंतु यह नहीं कह सकते कि वह आस्तिक नास्तिक नहीं है और नास्तिक है तो वह अपराधी है वह किसी तरह से अपराधी नहीं हो हर किसी को पूरा हक है कि वह अपनी जिंदगी जैसे जीना चाहते हैं वह चाहिए और जो लोग आर्थिक नहीं होते इसका मतलब यह इसका मतलब यह नहीं होता कि वह लोग गलत होते हैं या उनके पास कुछ अच्छा नहीं होता किसी बोलो कि बहुत आगे बढ़ चढ़कर चीजें प्राप्त कर सकते हैं अपनी मेहनत के साथ अपनी लगन के साथ और जो इंसान एक अच्छा इंसान बनकर रह सकता है इस देश में आस्तिक या नास्तिक से कोई भी फर्क नहीं पड़ता

kisi bhi insaan ke astik ya nastik hone par uske apradhiyon ne ki bilkul bhi sambhavnayen nahi hai kyonki ek insaan nastik ya astik is tarah se hota hai ki vaah bhagwan ko manata hai ki nahi manata tu jo insaan bhagwan ko nahi manata hai toh vaah ho sakta hai kisi aur tarah ki cheez mein apna sukoon pata hoon chahen vaah uska ho ya koi aur cheez ho toh yah zaroori nahi hai ki astha jaise insaan mein hai bhagwan ke prati vaah insaan accha hota hai aur usi ke paas har cheez sahi hoti hai jo log bhagwan mein nahi maante hai toh ho sakta hai unka kuch aur zariya ho aur vaah kisi aur tarah se sukoon paun jaise ki aapko hum le sakte hai ki koi insaan agar apna kaam ko apna bhagwan manata hai aur usi mein poore din laga rehta hai toh yah bhi tarika ho sakta hai ki vaah apne aage badh sake accha kaam kar sake toh vaah yah hum yah nahi ki apradhi hai aur koi aur bhi cheez hai aur iske alava mein ek aur cheez aapko bataana chahungi ki haal hi mein savinay jan dekha ki jo baba ram rahim the vaah bahut hi astik the aur bahut hi acche acche logo ke liye kaam kara karte the parantu aakhir mein kya nikala vaah ek apradhi nikle toh kya aap yah nahi kahenge ki kash insaan bhi apradhiyon sakta hai toh aisa kuch bhi nahi hai nastik apradhi hoga aur baki bahut saare log aise hai jo nastik hote hai aur un logo ko nahi lagta ki jo murti hai ya kisi tarah se hath jodkar ya bhagwan ki puja kar kar astha prakat karna ek accha kaam hai tu hum logo ko naste keh dete hai parantu yah nahi keh sakte ki vaah astik nastik nahi hai aur nastik hai toh vaah apradhi hai vaah kisi tarah se apradhi nahi ho har kisi ko pura haq hai ki vaah apni zindagi jaise jeena chahte hai vaah chahiye aur jo log aarthik nahi hote iska matlab yah iska matlab yah nahi hota ki vaah log galat hote hai ya unke paas kuch accha nahi hota kisi bolo ki bahut aage badh chadhakar cheezen prapt kar sakte hai apni mehnat ke saath apni lagan ke saath aur jo insaan ek accha insaan bankar reh sakta hai is desh mein astik ya nastik se koi bhi fark nahi padta

किसी भी इंसान के आस्तिक या नास्तिक होने पर उसके अपराधियों ने की बिल्कुल भी संभावनाएं नहीं

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