AICTE ने कहा है कि इंजीनियरिंग के छात्र नए पाठ्यक्रमों के तहत वेद, पुराण और योग का अध्ययन करेंगे, इंजीनियरिंग में इसकी आवश्यकता क्यों है?...


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Awdhesh Singh

Former IRS, Top Quora Writer, IAS Educator

0:37

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यह बहुत ही मूर्खता भरा कदम है जो सीटीसी ने अगर ऐसा कहा है कि इंजीनियरिंग के तहत जो वेद पुराण और योग का अध्ययन करें क्योंकि वेद पुराणों और योग में से कोई भी चीज जो है वह साइंस नहीं है और साइंटिफिक चीज़ों को ही जो है वह इंजीनियर कोर्सेस में स्टडी करना चाहिए l और इस तरीके की जो साहित्य है जो कि ज्यादा से ज्यादा हम उसको स्प्रिचुअल कर सकते हैं, रिलीजियस चीजें कर सकता है इसका इंजीनियरिंग क्लास्सेस में किसी भी तरीके से इंट्रोडक्शन नहीं होना चाहिए और मैं समझता हूं कि बहुत ही गलत कदम है अगर ऐसा सीटीसी उठाया नहीं जा रही है तो l

yeh bahut hi murkhta bhara kadam hai jo sitisi ne agar aisa kaha hai ki engineering ke tahat jo ved puran aur yog ka adhyayan kare chahiye kyonki ved puraanon aur yog mein se koi bhi cheez jo hai wah science nahi hai aur scientific chizon ko hi jo hai wah engineer course mein study karna chahiye l aur is tarike ki jo sahitya hai jo ki jyada se jyada hum usko sprichual kar sakte hain religious cheezen kar sakta hai iska engineering klasses mein kisi bhi tarike se introduction nahi hona chahiye aur main samajhata hoon ki bahut hi galat kadam hai agar aisa sitisi uthaya nahi ja rahi hai to l

यह बहुत ही मूर्खता भरा कदम है जो सीटीसी ने अगर ऐसा कहा है कि इंजीनियरिंग के तहत जो वेद पुर

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

2:23
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आपका प्रश्न है एआईसीटीई ने कहा है कि इंजीनियरिंग के छात्र नए पाठ्यक्रम के तहत वेद पुराण और योग का अध्ययन करेंगे इंजीनियरिंग में इसकी आवश्यकता क्यों है श्रीमान जी आईसीटी ने जो इंजीनियरिंग में वेद पुराण और योग को शामिल होने की बात कही है तो वेद और पुराण और योग यह कोई साधारण चीजें नहीं है अगर आप इंजीनियरिंग की ही दृष्टि से देखेंगे तो रामायण के समय में जो पुष्पक विमान था जो बिना किसी इनन के उड़ सकता था वह चीजें वेद और पुराण के माध्यम से आपको जानने को मिल सकती हैं शायद ऐसा मेरा मत है और विज्ञान हमारा अभी तक नहीं पहुंच पाया है जहां हमारे पूर्वज वेद और पुराण के अध्ययन करके जहां तक पहुंच चुके थे जितनी अगर आपने देखा हो पुराने युद्ध हुए हैं अगर आपने पढ़ा है तो जितने भी युद्ध हुए हैं तो ऐसे ऐसे तीन और ऐसे ऐसे हथियार थे जो शब्द सुनकर ही जा सकते थे आवाज सुनकर ही वहां तक पहुंच सकते थे जो आज हमारे विज्ञान में मसालों का रूप लिया है तो इस तरह से बहुत सारे ऐसे गूढ़ रहस्य वेद और पुराणों में छुपे हुए हैं उनके अध्ययन से शायद हम लोग कहीं शिखर पर पहुंच सकते हैं तो यह एक अच्छा निर्णय लिया है या ec3a और जहां तक योग विषय का प्रश्न है तो श्रीमान जी योग्य है आज दोनों के क्षेत्र में चिकित्सा विज्ञान में अपने आप को मजबूती से स्थापित कर चुका है दूसरा आज मनुष्य भले ही कितनी तरक्की करनी हो इतना ही भौतिक जगत में जी रहा हो लेकिन वह कहीं ना कहीं तनाव का कहीं ना कहीं अवसाद का शिकार है और अक्सर पेपर में पढ़ने को मिल जाता है कि बहुत सारे अधिकारी बहुत बड़े बिजनेसमैन उन्होंने आत्महत्या कर ली तो यह अवसाद के कारण ही होता है और इन सब का इलाज सिर्फ योग में ही है अगर कोई प्रतिदिन आप योगाभ्यास करते हैं तो आपका मन शांत रहता है मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है और अब 7:00 से बसते हैं डिप्रेशन से बसते हैं धन्यवाद

aapka prashna hai AICTE ne kaha hai ki Engineering ke chatra naye pathyakram ke tahat ved puran aur yog ka adhyayan karenge Engineering mein iski avashyakta kyon hai shriman ji ICT ne jo Engineering mein ved puran aur yog ko shaamil hone ki baat kahi hai toh ved aur puran aur yog yah koi sadhaaran cheezen nahi hai agar aap Engineering ki hi drishti se dekhenge toh ramayana ke samay mein jo Pushpak Vimaan tha jo bina kisi inan ke ud sakta tha vaah cheezen ved aur puran ke madhyam se aapko jaanne ko mil sakti hain shayad aisa mera mat hai aur vigyan hamara abhi tak nahi pohch paya hai jaha hamare purvaj ved aur puran ke adhyayan karke jaha tak pohch chuke the jitni agar aapne dekha ho purane yudh hue hain agar aapne padha hai toh jitne bhi yudh hue hain toh aise aise teen aur aise aise hathiyar the jo shabd sunkar hi ja sakte the awaaz sunkar hi wahan tak pohch sakte the jo aaj hamare vigyan mein masalo ka roop liya hai toh is tarah se bahut saare aise gurh rahasya ved aur purano mein chhupe hue hain unke adhyayan se shayad hum log kahin shikhar par pohch sakte hain toh yah ek accha nirnay liya hai ya ec3a aur jaha tak yog vishay ka prashna hai toh shriman ji yogya hai aaj dono ke kshetra mein chikitsa vigyan mein apne aap ko majbuti se sthapit kar chuka hai doosra aaj manushya bhale hi kitni tarakki karni ho itna hi bhautik jagat mein ji raha ho lekin vaah kahin na kahin tanaav ka kahin na kahin avsad ka shikaar hai aur aksar paper mein padhne ko mil jata hai ki bahut saare adhikari bahut bade bussinessmen unhone atmahatya kar li toh yah avsad ke karan hi hota hai aur in sab ka ilaj sirf yog mein hi hai agar koi pratidin aap yogabhayas karte hain toh aapka man shaant rehta hai mastishk ki karyakshamata badhti hai aur ab 7 00 se baste hain depression se baste hain dhanyavad

आपका प्रश्न है एआईसीटीई ने कहा है कि इंजीनियरिंग के छात्र नए पाठ्यक्रम के तहत वेद पुराण और

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Awanish Kumar

Yoga Instructor

3:52
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अजीत इंजीनियरिंग में वेद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन किस लिए लाभकारी है कि जिस तकनीक का लाभ हम लोग ले रहे हैं आज इस तकनीक को हम लोग अभी सामने देख रहे हैं उससे कई गुना विस्तृत तकनीक का पुराने जमाने में थी अभी तो अच्छा खासा रिसर्च हो रहा है जो वैदिक मैथमेटिक्स का जिसमें कई सारे वैसे गौतम जी हो रही है मैथ के भेद और उसके बारे में चर्चा की गई है और इसके अलावा आज भी हम नॉर्मल रूप में देखें तो खास करके अपना क्या बोलते हैं एयरोनॉटिक्स इंजरिंग जो हमारी थी वह जबरदस्त थी आप सोचिए कि अभी हम लोग वॉइस कमांड के बारे में सोचते हैं उसके चर्चा करते हैं और इतने प्राचीन समय में पुष्पक विमान वॉइस कमांड पर चलता था आदेश मिला कि हैप्पी मानना प्रकट हो जाएं आप आ जाएगी वहां चले आते थे आदेश दिया गया कि अभिमान आप विस्तार लेले आप निश्चित हो जाए यानि कि उसकी और वह विमान सिर्फ वॉइस कमांड सिर्फ कहने मात्र अपना भी अपना आकार बड़ा देता था अब सोचिए कि आज के डेट में नार्मल हेलीकॉप्टर का एरोप्लेन का हवा में काफी देर तक टिके रहना मुश्किल हो पाता है पर जो पुष्पक विमान था वह काफी देर तक एक ही स्थान पर खड़े रह सकता था इतना ही नहीं उसने कई सारे स्टोरीज से कई सारे तन कई सारे 6782 मल्टीस्टोरी एरोप्लेन तो आज तक कहीं भी नहीं है कि पहले था ऐसा उस पर सर्च करने के लिए वहीं दूसरी ओर देखें तो अभी आज हैं जो भारत के सारे कौरवों का जन्म हुआ था दुर्योधन सहित उन सारे कौरवों का जन्म में मां के गर्भ से केवल नहीं हुआ था बल्कि उससे जून के टुकड़े को 100 भागों में विभक्त कर के मटके में रखा गया था और यज्ञ कुंड पर यह उनका मत था यहां पर था कि एक शर्ट एंड टेंपरेचर के मतलब एक कंट्रोल कंडीशन रखा गया था और उसे सारे गौरव पैदा हुए थे वहीं रावन अपने आप में पूर्ण ज्ञान एक था उसने भी जो खाया था कि कई लाख उसके उसके पीछे कारण हुआ पीपल के बरगद के पेड़ के नीचे समुद्र के धागे का यूज़ करते हुए और कुछ किया था मतलब पहले कभी ज्ञानाचे बहुत फास्ट था बहुत मस्त था आज हम लोग जब एम एम एस की बात करते हैं तो लोग यह लेकिन आप सोचिए कि कालिदास निस का चित्रण किया था जब बस्तर भुजा के पर्वत को पर बैठा हुआ वह अपने प्रेमिका के लिए नेपाल में के माध्यम से और वह चित्रण किया करता था कि ऐसे ऐसे हो रहा होगा तू यह कहीं न कहीं क्या है बादलों के माध्यम से संदेश भेजता था मेघदूतम में इसका वर्णन था लिखना शुरु कर दिए कि पाश्चात्य वाले जो कर रहे हो बहुत बढ़िया और जो हमारा अपना स्वदेशी है झूमर अपना भारतीय तकनीकी हो सके तो जल्दी ऐसा भारत सरकार कर रही है वह बहुत कुछ करता है ताकि हम अपने आंगन को देखें जो बहुत ही समृद्ध है जो सोने की चिड़िया कहे जाने वाला गण है उसकी और झांकियां उसमें छिपे हुए जान को तलाशते तो निसंदेह यह भारत के लिए बहुत ही बढ़िया कदम उठा रही है

ajit Engineering mein ved puran jaise prachin granthon ka adhyayan kis liye labhakari hai ki jis taknik ka labh hum log le rahe hai aaj is taknik ko hum log abhi saamne dekh rahe hai usse kai guna vistrit taknik ka purane jamane mein thi abhi toh accha khasa research ho raha hai jo vaidik mathematics ka jisme kai saare waise gautam ji ho rahi hai math ke bhed aur uske bare mein charcha ki gayi hai aur iske alava aaj bhi hum normal roop mein dekhen toh khaas karke apna kya bolte hai aeronautics injaring jo hamari thi vaah jabardast thi aap sochiye ki abhi hum log voice command ke bare mein sochte hai uske charcha karte hai aur itne prachin samay mein Pushpak Vimaan voice command par chalta tha aadesh mila ki happy manana prakat ho jayen aap aa jayegi wahan chale aate the aadesh diya gaya ki abhimaan aap vistaar lele aap nishchit ho jaaye yani ki uski aur vaah Vimaan sirf voice command sirf kehne matra apna bhi apna aakaar bada deta tha ab sochiye ki aaj ke date mein normal helicopter ka aeroplane ka hawa mein kaafi der tak tike rehna mushkil ho pata hai par jo Pushpak Vimaan tha vaah kaafi der tak ek hi sthan par khade reh sakta tha itna hi nahi usne kai saare stories se kai saare tan kai saare 6782 maltistori aeroplane toh aaj tak kahin bhi nahi hai ki pehle tha aisa us par search karne ke liye wahi dusri aur dekhen toh abhi aaj hai jo bharat ke saare kauravon ka janam hua tha duryodhan sahit un saare kauravon ka janam mein maa ke garbh se keval nahi hua tha balki usse june ke tukde ko 100 bhaagon mein vibhakt kar ke matke mein rakha gaya tha aur yagya kund par yah unka mat tha yahan par tha ki ek shirt and temperature ke matlab ek control condition rakha gaya tha aur use saare gaurav paida hue the wahi raavan apne aap mein purn gyaan ek tha usne bhi jo khaya tha ki kai lakh uske uske peeche karan hua pipal ke bargad ke ped ke niche samudra ke dhaage ka use karte hue aur kuch kiya tha matlab pehle kabhi gyanache bahut fast tha bahut mast tha aaj hum log jab M imei s ki baat karte hai toh log yah lekin aap sochiye ki kalidas nis ka chitran kiya tha jab bastar bhuja ke parvat ko par baitha hua vaah apne premika ke liye nepal mein ke madhyam se aur vaah chitran kiya karta tha ki aise aise ho raha hoga tu yah kahin na kahin kya hai badalon ke madhyam se sandesh bhejta tha meghdutam mein iska varnan tha likhna shuru kar diye ki pashchayat waale jo kar rahe ho bahut badhiya aur jo hamara apna swadeshi hai jhumar apna bharatiya takniki ho sake toh jaldi aisa bharat sarkar kar rahi hai vaah bahut kuch karta hai taki hum apne aangan ko dekhen jo bahut hi samriddh hai jo sone ki chidiya kahe jaane vala gan hai uski aur jhankiyan usme chipe hue jaan ko talashate toh nisandeh yah bharat ke liye bahut hi badhiya kadam utha rahi hai

अजीत इंजीनियरिंग में वेद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन किस लिए लाभकारी है कि जिस तक

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Ishita Seth

Obstinate Programmer

1:28
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देखिए मेरे हिसाब से ही जो एआईसीजीए ने यह जो निर्णय लिया है यह जो फैसला लिया है कि उन्होंने ऐसा कहा है कि इंजीनियरिंग के छात्र नई पाठकर्म के तहत वेद, पुराण और योग का अध्ययन करेंगे| यह मेरे हिसाब से यह फैसला बिल्कुल सही है क्योंकि जो हमारा भारत देश है वह उसके लिए वेद, पुराण और योग यह भारत देश के तीन स्तम्भ है| अपना भारत देश इन्हीं के बेसिसी पर चल रहा है| और इवन मोदी जी ने योग को पूरी दुनिया के सामने इतना ज्यादा आगे लाए हैं| उन्होंने 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया है| और जो वेद और पुराण जैसी चीजें हैं यह हर एक इंसान में आनी चाहिए पर लेकिन आजकल के युवकों में अगर हम देखें तो वेद, पुराण, योग ऐसे तीनों ही चीज़े नहीं है| अपना भारत वर्ष है, जो अपना भारत देश है, वह वेस्टर्न कल्चर की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहा है| नए युग के सामान जिमिंग पर जादा कंसन्ट्रेट कर रहे है, वेद और पुराण की जगह जो वेस्टर्न नॉलेज है उसकी तरफ ज्यादा अट्रैक्ट हो रहे हैं तो इसको कम करने के लिए और अपने भारत देश को आगे बढ़ता हुआ देखने के लिए यह एआईसीजीए ने यह जो निर्णय लिया है, मेरे हिसाब से बिल्कुल सही निर्णय लिया है|

dekhie chahiye mere hisab se hi jo eaaisijiye ne yeh jo nirnay liya hai yeh jo faisla liya hai ki unhone aisa kaha hai ki engineering ke chatra nayi pathakarm ke tahat ved puran aur yog ka adhyayan karenge yeh mere hisab se yeh faisla bilkul sahi hai kyonki jo hamara bharat desh hai wah uske liye ved puran aur yog yeh bharat desh ke teen stambha hai apna bharat desh inhin ke besisi par chal raha hai aur even modi ji ne yog ko puri duniya ke samane itna jyada aage laye hain unhone 21 june ko vishwa yog divas ghoshit kiya hai aur jo ved aur puran jaisi cheezen hain yeh har ek insaan mein aani chahiye chahiye par lekin aajkal ke yuvakon mein agar hum dekhen to ved puran yog aise tatvo hi chizey nahi hai apna bharat varsh hai jo apna bharat desh hai wah western culture ki oar jyada aakarshit ho raha hai naye yug ke saamaan jiming par jada concentrate kar rahe hai ved aur puran ki jagah jo western knowledge hai uski taraf jyada attract ho rahe hain to isko kum karne ke liye aur apne bharat desh ko aage badhta hua dekhne ke liye yeh eaaisijiye ne yeh jo nirnay liya hai mere hisab se bilkul sahi nirnay liya hai

देखिए मेरे हिसाब से ही जो एआईसीजीए ने यह जो निर्णय लिया है यह जो फैसला लिया है कि उन्होंने

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Hhhgnbhh

1:32
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिये जैसे एआईसीटी ने कहा है कि इंजीनियरिंग के छात्र नए पाठ्यक्रम की तरह वेद पुराण योग के अध्ययन करेंगे| तो इसमें इंजीनियरिंग की आवश्यकता है| अगर देखा जाए तो योग से हमें काफी फायदे होते हैं, बीमारियों का हल निकलता है| ऐसी जो वेद है इनके अंदर साइंस मिली नहीं हुई है अभी तो भी ये जादा इम्पोर्टेन्ट और स्ट्रोंग विषय है कि इससे हम काफी कुछ सीखते है जैसे हमने देखा है कि जो भारत का पास्ट रहा है वह काफी ज्यादा मजबूत रहा है जो यह चीजें थी कि जो रथ है वह हवा में उड़ रहा है| और आज तक अगर देखा जाए तो हमने अब जाकर एरोप्लेन बनाए हैं| तो पास्ट हमारा यह सारी तकनीके जानता था तो अगर हम भारत के ही पास्ट में खुरेदना शुरू करेंगे तो मैं काफी ज्यादा साइंस मिल सकता है, जैसे एक तीर कमान से दस तीर कमान निकलना| इसका साइंस हम आज तक नहीं निकाल पाए| तो मुझे ऐसा लगता है कि अगर हम पुराना हिस्ट्री भी पड़ेंगे और उसमे अगर हम साइंस को मिला देंगे तो इस से अच्छी चीज़ और कोई हो ही नहीं सकती| तो जो इंजीनियरिंग स्टूडेंट है जब वे इन चीजों के बारे में पड़ेंगे वेद और योग अगर आप सोचें योग से कितनी बीमारियों का हल होता है अगर उसके साथ साइंस भी मिल जाए और हमें इस तरीके से उस योग से हम कुछ और बेटर चीज़ बना सके, तो इससे ज्यादा और क्या एक अच्छी चीज हो सकती है| तो मुझे ऐसा लगता है कि इंजीनियरिंग स्टूडेंट यह पढा कर इससे साइंस को लिंक करना बहुत आवश्यक है | ताकि हो सकता है कि जो लोग योग नहीं कर सकते हम उनके लिए कोई मशीन बना सके, ताकी और यह एसी नई-नई चीजें भी लोगों के दिमाग में आ सकती है तो मेरे हिसाब से बहुत अच्छा स्टेप है|

dekhiye jaise eaaisiti ne kaha hai ki engineering ke chatra naye pathyakram ki tarah ved puran yog ke adhyayan karenge to isme engineering ki avashyakta hai agar dekha jaye to yog se hume kaafi fayde hote hain bimariyon ka hal nikalta hai aisi jo ved hai inke andar science mili nahi hui hai abhi to bhi ye jada important aur strong vishay hai ki isse hum kaafi kuch sikhate hai jaise humne dekha hai ki jo bharat ka past raha hai wah kaafi jyada majboot raha hai jo yeh cheezen thi ki jo rath hai wah hawa mein ud raha hai aur aaj tak agar dekha jaye to humne ab jaakar aeroplane banaye hain to past hamara yeh saree takanike jaanta tha to agar hum bharat ke hi past mein khuredana shuru karenge to main kaafi jyada science mil sakta hai jaise ek teer kamaan se das teer kamaan nikalna iska science hum aaj tak nahi nikal chahiye paye to mujhe aisa lagta hai ki agar hum purana history bhi padenge aur usme agar hum science ko mila denge to is se acchi cheez aur koi ho hi nahi sakti chahiye to jo engineering student hai jab ve in chijon ke baare mein padenge ved aur yog agar aap sochen yog se kitni bimariyon ka hal hota hai agar uske saath science bhi mil jaye aur hume is tarike se us yog se hum kuch aur better cheez bana sake to isse jyada aur kya ek acchi cheez ho sakti hai to mujhe aisa lagta hai ki engineering student chahiye yeh padha kar isse science ko link karna bahut aavashyak hai | taki ho sakta hai ki jo log yog nahi kar sakte hum unke liye koi machine bana sake taaki aur yeh ac nayi nayi cheezen bhi logo chahiye ke dimag mein aa sakti hai to mere hisab se bahut accha step hai

देखिये जैसे एआईसीटी ने कहा है कि इंजीनियरिंग के छात्र नए पाठ्यक्रम की तरह वेद पुराण योग के

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वेद, पुराण और योग हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति के आधार स्तंभ है| योग को तो अभी प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व के सामने रखकर उस 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित करवाया है| और वह वेद और पुराण को जानना मुझे लगता है आज की युवा पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है कि वह समझे कि हमारी भारतीय सभ्यता में वेद पुराण का क्या महत्व था? और योग किस तरह से काम करता था? मुझे लगता है कि आज की जो भाग दौड़ भरी जिंदगी है, जो अशांति है, लोगों में जो काम के प्रति उनका जुनून है, उसे नियंत्रित करने के लिए योग होना बहुत आवश्यक है| योग के बारे में समझना, जानना अति आवश्यक है, शायद इसीलिए इसे चालू करने की कोशिश की जा रही है| आज के बच्चों को, आज की पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि योग से कितना कुछ आप कर सकते हैं| योग से आपको शक्ति मिलती है, आप को ऊर्जा मिलती है, अगर आप उसको रोज की दिनचर्या में शामिल कर लेते हैं तो आप एक नई शक्ति से, नई उर्जा से भर जाते हैं| योग आपको शांति प्रदान करता है, योग आपको कार्य करने की ताकत देता है, योग आपके सोचने समझने की शक्ति को बढ़ा देता है, आपको शारीरिक रूप से भी वह समर्थ करता है| कई बीमारियों का योग से इलाज हो जाता है, इंसान को शांति मिलती है और मुझे लगता है, अपने वेद पुराणों से भी जो पुराना साहित्य है, जो पुरानी सभ्यता है, उसके बारे में आज की पीढ़ी को जानना चाहिए कि किस तरह से पुरानी सभ्यता में जीवन शैली होती थी और कैसे वह लोग शांति से जीवन व्यतीत करते थे? आज की इस भाग दौड़ की जिंदगी में योग का बहुत महत्व है, अगर योग को, यह योग की जीवन शैली को आधुनिक बच्चे अपना लेते हैं, तो उन्हें बहुत अच्छा लगेगा वह शांति महसूस करेंगे|

ved puran aur yog hamari bhartiya sabhyata aur sanskriti ke aadhar stambh hai yog ko to abhi pradhanmantri modi ne vishwa ke samane rakhakar us 21 june ko vishwa yog divas ghoshit karvaya hai aur wah ved aur puran ko janana mujhe lagta hai aaj ki yuva pidhi ke liye bahut zaroori hai ki wah samjhe ki hamari bhartiya sabhyata mein ved puran ka kya mahatva tha aur yog kis tarah se kaam karta tha chahiye mujhe lagta hai ki aaj ki jo bhag daudh bhari zindagi hai jo ashanti hai logo chahiye mein jo kaam ke prati unka junuun hai use niyantrit karne ke liye yog hona bahut aavashyak hai yog ke baare mein samajhna janana ati aavashyak hai shayad isliye ise chalu karne ki koshish ki ja rahi hai aaj ke baccho ko aaj ki pidhi ko yeh janana chahiye ki yog se kitna kuch aap kar sakte hain yog se aapko shakti milti hai aap ko urja milti hai agar aap usko roj ki dinacharya chahiye mein shamil kar lete hain to aap ek nayi shakti se nayi urja se bhar jaate hain yog aapko shanti pradan karta hai yog aapko karya karne ki takat chahiye deta hai yog aapke sochne samjhne ki shakti ko badha deta hai aapko shaaririk roop se bhi wah samarth karta hai kai bimariyon ka yog se ilaj ho jata hai insaan ko shanti milti hai aur mujhe lagta hai apne ved puraanon se bhi jo purana sahitya hai jo purani sabhyata hai uske baare mein aaj ki pidhi ko janana chahiye ki kis tarah se purani sabhyata mein jeevan shaili hoti thi aur kaise wah log shanti se jeevan vyatit karte the aaj ki is bhag daudh ki zindagi mein yog ka bahut mahatva hai agar yog ko yeh yog ki jeevan shaili ko aadhunik bacche apna lete hain to unhen chahiye bahut accha lagega wah shanti mehsus karenge

वेद, पुराण और योग हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कृति के आधार स्तंभ है| योग को तो अभी प्रधानमं

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