पढ़ लिखकर इतने बड़े बड़े अफसर बनते हैं पर एक बिना पढ़े लिखे मंत्री के अंदर काम करते हैं, ऐसा क्यों?...


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Kuldeep Singh

Career Counselor

1:56
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

तो मैं आपको बताना चाहूंगा आप थोड़ा चीजों को हेलो ब्रेड करें और थोड़ा समझने का प्रयास करें आप एक एग्जांपल लीजिए जैसे मैं एक लड़का एकदम कर लेता हूं उस पेड़ को मैं तो पास में डिवाइड करता हूं जड़ जड़ से ऊपर वाला भाग तो आप ऐसे समझ सकते हैं कि जो पढ़े लिखे लोग हैं जो अफसर बनकर जाते हैं वह जड़ हैं और जो पेड़ के ऊपर वाला भाई के ऊपर वाला भाग है वह हमारे पॉलीटिशियंस देखता तो है लेकिन असल में वह उसी जगह पर टिका हुआ है जो जड़ देख नहीं रही है वापस ऐसे ही आप अपने प्रश्न को समझ सकते हैं उसका उत्तर जान सकते हैं कि जो सिविल सर्वेंट्स हैं जो भी सर्च हैं वह सिस्टम कीचड़ है और जो पॉलीटिशियंस है वह उस पेड़ के उस सिस्टम के तना पत्ती और शाखाएं हैं तो देख तो रही है लेकिन अगर जड़ कमजोर होगी अगर जड़ों में सपोर्ट नहीं करेगी तो वह पेड़ नहीं चल पाएगा उसी तरह से अगर ऑफिसर अगर सिस्टम को सपोर्ट नहीं करेंगे और पढ़ लिखकर लोग आगे नहीं जाएंगे आंसर नहीं बनेगे सुन पॉलीटिशियंस को सही दिशा निर्देश कौन देगा और पॉलिटिशन तो सिर्फ सिस्टम कुछ लोगों को दिखाने के लिए उस सिस्टम में बैठे हुए हैं असल में सिस्टम को चला कौन रहा है आप इसको समझने का प्रयास करें सिस्टम को चलाने वाले सिर्फ और सिर्फ वह पढ़े लिखे लोग हैं वह अफसर हैं जो कि उनके नीचे काम कर रहे हैं और कहीं निकल पर्दे के पीछे काम कर रहे हैं दिखाई नहीं दे रहे हैं और सिस्टम को अच्छे से चला रहे हैं

toh main aapko batana chahunga aap thoda chijon ko hello bread kare aur thoda samjhne ka prayas kare aap ek example lijiye jaise main ek ladka ekdam kar leta hoon us ped ko main toh paas me divide karta hoon jad jad se upar vala bhag toh aap aise samajh sakte hain ki jo padhe likhe log hain jo officer bankar jaate hain vaah jad hain aur jo ped ke upar vala bhai ke upar vala bhag hai vaah hamare politicians dekhta toh hai lekin asal me vaah usi jagah par tika hua hai jo jad dekh nahi rahi hai wapas aise hi aap apne prashna ko samajh sakte hain uska uttar jaan sakte hain ki jo civil servants hain jo bhi search hain vaah system kichad hai aur jo politicians hai vaah us ped ke us system ke tana patti aur sakhayen hain toh dekh toh rahi hai lekin agar jad kamjor hogi agar jadon me support nahi karegi toh vaah ped nahi chal payega usi tarah se agar officer agar system ko support nahi karenge aur padh likhkar log aage nahi jaenge answer nahi banege sun politicians ko sahi disha nirdesh kaun dega aur politician toh sirf system kuch logo ko dikhane ke liye us system me baithe hue hain asal me system ko chala kaun raha hai aap isko samjhne ka prayas kare system ko chalane waale sirf aur sirf vaah padhe likhe log hain vaah officer hain jo ki unke niche kaam kar rahe hain aur kahin nikal parde ke peeche kaam kar rahe hain dikhai nahi de rahe hain aur system ko acche se chala rahe hain

तो मैं आपको बताना चाहूंगा आप थोड़ा चीजों को हेलो ब्रेड करें और थोड़ा समझने का प्रयास करें

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Dr.Ravi Atroliya

रिटायर्डडीएसपी

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह एक संवैधानिक व्यवस्था है प्रशासन और सत्ता का साथ साथ चलने का इसमें हम इस बात को ना सोचे बल्कि कल्याणकारी राज्य की योजनाओं को मूर्त रूप देने में हम लगे रहे

yah ek samvaidhanik vyavastha hai prashasan aur satta ka saath saath chalne ka isme hum is baat ko na soche balki kalyaankari rajya ki yojnao ko murt roop dene me hum lage rahe

यह एक संवैधानिक व्यवस्था है प्रशासन और सत्ता का साथ साथ चलने का इसमें हम इस बात को ना सोचे

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Mahesh Tilsiram

Financial Expert

2:31
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भाई पढ़ लिखकर अगर किसी मंत्री के अंडर में काम करते हैं अधिकारी बनकर उसके पीछे कारण यही है कि जो आम जनता होती है वह अपना नेता चुनती हैं हमारे देश में तो जो नेता होता है उसके लिए किसी विशेष क्वालिफिकेशन की जरूरत नहीं होती है उसकी सोने की विशेष क्वालिफिकेशन होना चाहिए वह लोगों के बीच में प्रसिद्ध होना चाहिए उसकी छवि दमदार होने चाहिए या उसकी छवि ऐसी होनी चाहिए कि जो लोगों की मदद करता हो या लोगों से डरते हो तो जब आप उस मंत्री को पूरा अपना एक प्रतिनिधि तो दे देते हो तो वह जो मंत्री है वह मंत्री ताकतवर हो जाता है भारत के संविधान के अनुसार वह ऊपर में बैठा नियम बनाने वाला व्यक्ति हो जाता है तो आप इतने प्रसिद्ध नहीं होते हैं पढ़ लिखकर क्योंकि भाई जो ताले हैं वह वह खुलते हैं चाबी उसे जिनके पास चाबी नहीं है वह हथौड़ी सही खोलते हैं तो जो पढ़े लिखे होते हैं वह चाबी से खोलने वाले लोग हैं जो प्रॉपर कानून और नियम और कायदे पढ़ लेते हैं आप जितने ज्यादा ज्ञानवान होंगे जितना ज्यादा पढ़े लिखे होंगे उतनी ज्यादा याद कि वर्जन आए होंगे उतनी ज्यादा आपकी बंदिश आऊंगी उसे ज्यादा आपकी बॉन्डिंग होंगी उतने आपके दिमाग में होगी क्या करें क्या न करें क्या सही और क्या गलत की मात्राएं आपके दिमाग में चलती रहेगी परंतु एक अनपढ़ देहाती गवार जो मंत्री बन चुका होता है नेता बन चुका होता है उसके पास ऑलरेडी पहले से ही उसके पास धन बल होता है और धनबल होता है तभी वह समर्थ होता है वह समर्थ और समर्थन प्राप्त करता है और नेता बनता है जो नियम बनाते हैं हमारे संविधान में हमारे गणतंत्र में एक प्रक्रिया है तो यही है और यह सभी से ऐसा नहीं है यह भारत जैसे गणपतए देश में ही सही है बाकी और जगह पर आपके लिए एक मिनिमम क्वालिफिकेशन चाहिए आपको पढ़ा लिखा होना चाहिए आपके बुद्धि बुद्धि बुद्धिमान होना चाहिए वहीं होना चाहिए आपके अपने विषय पर पकड़ होनी चाहिए

bhai padh likhkar agar kisi mantri ke under me kaam karte hain adhikari bankar uske peeche karan yahi hai ki jo aam janta hoti hai vaah apna neta chunati hain hamare desh me toh jo neta hota hai uske liye kisi vishesh qualification ki zarurat nahi hoti hai uski sone ki vishesh qualification hona chahiye vaah logo ke beech me prasiddh hona chahiye uski chhavi dumdaar hone chahiye ya uski chhavi aisi honi chahiye ki jo logo ki madad karta ho ya logo se darte ho toh jab aap us mantri ko pura apna ek pratinidhi toh de dete ho toh vaah jo mantri hai vaah mantri takatwar ho jata hai bharat ke samvidhan ke anusaar vaah upar me baitha niyam banane vala vyakti ho jata hai toh aap itne prasiddh nahi hote hain padh likhkar kyonki bhai jo tale hain vaah vaah khulte hain chabi use jinke paas chabi nahi hai vaah hathodi sahi kholte hain toh jo padhe likhe hote hain vaah chabi se kholne waale log hain jo proper kanoon aur niyam aur kayade padh lete hain aap jitne zyada gyaanvaan honge jitna zyada padhe likhe honge utani zyada yaad ki version aaye honge utani zyada aapki bandish aaungi use zyada aapki bonding hongi utne aapke dimag me hogi kya kare kya na kare kya sahi aur kya galat ki matraen aapke dimag me chalti rahegi parantu ek anpad dehati gavar jo mantri ban chuka hota hai neta ban chuka hota hai uske paas already pehle se hi uske paas dhan bal hota hai aur dhanabal hota hai tabhi vaah samarth hota hai vaah samarth aur samarthan prapt karta hai aur neta banta hai jo niyam banate hain hamare samvidhan me hamare gantantra me ek prakriya hai toh yahi hai aur yah sabhi se aisa nahi hai yah bharat jaise ganapatye desh me hi sahi hai baki aur jagah par aapke liye ek minimum qualification chahiye aapko padha likha hona chahiye aapke buddhi buddhi buddhiman hona chahiye wahi hona chahiye aapke apne vishay par pakad honi chahiye

भाई पढ़ लिखकर अगर किसी मंत्री के अंडर में काम करते हैं अधिकारी बनकर उसके पीछे कारण यही है

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Himanshu Kr Lodhi

Yoga Trainer

0:50
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल मन नहीं आपको ऐसा मानना जैसे कि कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां पर जनप्रतिनिधि के लिए इस तरह के कोई योग्यता मापदंड नहीं है लेकिन नहीं जो सरकारी अधिकारी होते हैं उनके लिए उस तरह का मामला और परीक्षाएं आयोजित की जाती है फिर जो बीमारी जनपद नाजायज नहीं होगा कि सरकारी विभाग कर रही है उसके ऊपर के आए ऐसा कोई मापदंड तैयार किया जाए जिससे जनप्रतिनिधि चुनने के लिए योग्यता न्यूनतम होनी आवश्यक

bilkul man nahi aapko aisa manana jaise ki ki bharat ek loktantrik desh hai jaha par janapratinidhi ke liye is tarah ke koi yogyata maapdand nahi hai lekin nahi jo sarkari adhikari hote hain unke liye us tarah ka maamla aur parikshaen ayojit ki jaati hai phir jo bimari janpad najayaj nahi hoga ki sarkari vibhag kar rahi hai uske upar ke aaye aisa koi maapdand taiyar kiya jaaye jisse janapratinidhi chunane ke liye yogyata nyuntam honi aavashyak

बिल्कुल मन नहीं आपको ऐसा मानना जैसे कि कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां पर जनप्रतिनिधि क

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राकेश

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारतीय संविधान के अनुसार अधिकारी हमेशा मंत्री के नीचे भी काम करता है यही कारण है कि पढ़े पढ़े जो काफी पढ़े लिखे आईएएस अफसर होते हैं और भी बहुत से अधिकारी वह सब उनके अंडर में काम करते हैं कई बार यह सवाल भी उठते हैं कि मंत्री को पढ़े लिखे नहीं हैं फिर उन्हें क्यों दिया जाता है यह भारतीय संविधान की एक विशेषता ही मान्य किया आप उसे तनमानिया की जो हमारा विधायक पाली विधायिका है उसको ऊंचा दर्जा दिया गया है यानी कि जो जनता से चुनकर जाता है जनता की बातों को रखने के लिए जनता द्वारा चुना जाता है उसका महत्व ज्यादा है हमारे देश में या हमारी संविधान की व्यवस्था के तहत

bharatiya samvidhan ke anusaar adhikari hamesha mantri ke niche bhi kaam karta hai yahi karan hai ki padhe padhe jo kaafi padhe likhe IAS officer hote hain aur bhi bahut se adhikari vaah sab unke under me kaam karte hain kai baar yah sawaal bhi uthte hain ki mantri ko padhe likhe nahi hain phir unhe kyon diya jata hai yah bharatiya samvidhan ki ek visheshata hi manya kiya aap use tanamaniya ki jo hamara vidhayak paali vidhayika hai usko uncha darja diya gaya hai yani ki jo janta se chunkar jata hai janta ki baaton ko rakhne ke liye janta dwara chuna jata hai uska mahatva zyada hai hamare desh me ya hamari samvidhan ki vyavastha ke tahat

भारतीय संविधान के अनुसार अधिकारी हमेशा मंत्री के नीचे भी काम करता है यही कारण है कि पढ़े प

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Mohan Solanki

Civil Engineer .selfe Employment

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पढ़ लिख कर इतने बड़े अफसर बनते हैं पर एक बिना पढ़े लिखे मंत्री के अंदर काम करते हैं यह बिल्कुल गलत है इस दुनिया में कहा जाता है कि जो भी है मतलब पढ़ने वाला और पढ़ाई को ही जान जान सकता है पढ़े पढ़े लिखे पढ़े लिखो को ही मान मायने होता है और अदर में जो एक पढ़ा-लिखा और एक अनपढ़ अनपढ़ के अनपढ़ के बीच में जो भी कुछ वार्तालाप होती हर एक चीज का मैटर हो एनिवर्सरी जैसे इस वर्ल्ड में जो भी एक्स वाई ज़ेड मैटर है उसका सलूशन और अमेजिंग एलआईसी करने में प्रॉब्लम होती है इसलिए हमें इस पढ़ लिखकर पढ़ लिखकर ही अफसर बनते हैं जो भी अधिकारी जॉब पर्सनल जोगी अपना इंडिया में बट मंत्री नहीं मंत्री को यह ऑप्शन नहीं देना चाहिए अनपढ़ को नहीं बनाना चाहिए और उन्हें भी एक पल पल लिखकर ही मंत्री का बनने का ऑप्शन देना चाहिए यह सरारी हम उसका फोटो नहीं करते हैं यह गलत है इस इस मैटर पर हम लोग को यही करना चाहिए कि एनालिसिस तभी हो सकता है कि जब आप आप दोनों लिखे पढ़े हो तो आप दोनों में के बीच में कोई चीज का एक पक्ष मैटर पर उसका वेरीफाई कर के अलावा इसे हर चीज का मुद्दे का आगे उसका रिजल्ट फाइंड देख सकते हैं और जब आप पढ़े हैं एक पड़ा है एक अनपढ़ है उसके अंडर में काम वर्क करता है तो उस चीज को गहनता किस प्रकार उसे समझाएगा लेकर सकता है हम तो उसे पूरी टोटली रॉन्ग कहते हैं और जो भी शिक्षा का जिस तरह से जो मैटर बनाया वह अपने लोग भारत एक लोकतंत्र देश है तू यह इस तरह का नहीं होना चाहिए कि इसमें एक पढ़े लिखे और अनपढ़ एजुकेटेड एजुकेटेड को ही जानता है हर चीजें कि किस तरह का होता है कौन सा पॉइंट क्या है क्या नहीं है यह अच्छी तरह इस पर सोचना चाहिए और कोई नया विधान में जो भी कुछ मैटर एनी वर्क पर्स बनाना चाहिए और जानता हूं के बीच में जो भी है तो ताकि उनके बीच में एक अनेक अनेक प्रॉब्लम खड़ी हो जाती है और पढ़े-लिखे के बीच में ताकि वह सेटिस्फाई नहीं होता वह सेटिस्फाया दोनों एक दूसरे को सेटिस्फाई नहीं कर पाते हैं कोई भी वर्गों को और करते भी हैं तो एक दबाव और एक दबा होने लगता है एक दूसरे पर अपना एक दबाव बनने लगता है फिर से काफी मतभेद और कहीं प्रॉब्लम है नहीं बनने लगती है तुम लोग यह सोचते हैं कहते हैं कि सब लोग का जहां तक हो पढ़े-लिखे कोई हर कोई भीख वर्क में पढ़ा लिखा होना जरूरी चाहिए मैसेज सरिए ऐसा नहीं है कि कहीं चीजें मैं नहीं था कि वह कैसा समझेगा किसी को कैसा डिनोटिफाइड करवाएगा करेगा वह सामने वाले को सेटिस्फाई करवाएगा इतने बड़ा नेता मंत्री बना देते हैं जो भी है 11 उसको भट्ट एक एक सिंपल सा वोटिंग के वोटिंग के चलो उसका वर्क देख के सुपर ली और लेकिन उसकी गहन उसका ध्यान उसका मेंटली दिमाग किस तरह का भाव हो धार्मिक हो सब चीजें को देखते हुए उसका बैनर देखते हुए इस जनता कुश कुश सिलेक्ट करती है लेकिन उतना नहीं करती है टोटली ऊपर का वर्क होता है कुछ युवकों उसका देखने से उसे बड़े नेता लोग हैं मंत्री लोग बना देते हैं अनपढ़ को यह गलत है पढ़ा लिखा वही होना चाहिए मंत्री भी ग्रेजुएशन वाला चाहिए ताकि हर स्टेप बाय स्टेप को होगी समस्त समस्त जान सके

padh likh kar itne bade officer bante hain par ek bina padhe likhe mantri ke andar kaam karte hain yah bilkul galat hai is duniya me kaha jata hai ki jo bhi hai matlab padhne vala aur padhai ko hi jaan jaan sakta hai padhe padhe likhe padhe likho ko hi maan maayne hota hai aur other me jo ek padha likha aur ek anpad anpad ke anpad ke beech me jo bhi kuch vartalaap hoti har ek cheez ka matter ho enivarsari jaise is world me jo bhi x why zed matter hai uska salution aur amazing lic karne me problem hoti hai isliye hamein is padh likhkar padh likhkar hi officer bante hain jo bhi adhikari job personal jogi apna india me but mantri nahi mantri ko yah option nahi dena chahiye anpad ko nahi banana chahiye aur unhe bhi ek pal pal likhkar hi mantri ka banne ka option dena chahiye yah sarari hum uska photo nahi karte hain yah galat hai is is matter par hum log ko yahi karna chahiye ki analysis tabhi ho sakta hai ki jab aap aap dono likhe padhe ho toh aap dono me ke beech me koi cheez ka ek paksh matter par uska verify kar ke alava ise har cheez ka mudde ka aage uska result find dekh sakte hain aur jab aap padhe hain ek pada hai ek anpad hai uske under me kaam work karta hai toh us cheez ko gahanata kis prakar use samajhaega lekar sakta hai hum toh use puri totally wrong kehte hain aur jo bhi shiksha ka jis tarah se jo matter banaya vaah apne log bharat ek loktantra desh hai tu yah is tarah ka nahi hona chahiye ki isme ek padhe likhe aur anpad educated educated ko hi jaanta hai har cheezen ki kis tarah ka hota hai kaun sa point kya hai kya nahi hai yah achi tarah is par sochna chahiye aur koi naya vidhan me jo bhi kuch matter any work purse banana chahiye aur jaanta hoon ke beech me jo bhi hai toh taki unke beech me ek anek anek problem khadi ho jaati hai aur padhe likhe ke beech me taki vaah satisfy nahi hota vaah setisfaya dono ek dusre ko satisfy nahi kar paate hain koi bhi vargon ko aur karte bhi hain toh ek dabaav aur ek daba hone lagta hai ek dusre par apna ek dabaav banne lagta hai phir se kaafi matbhed aur kahin problem hai nahi banne lagti hai tum log yah sochte hain kehte hain ki sab log ka jaha tak ho padhe likhe koi har koi bhik work me padha likha hona zaroori chahiye massage sariye aisa nahi hai ki kahin cheezen main nahi tha ki vaah kaisa samjhega kisi ko kaisa dinotifaid karwaega karega vaah saamne waale ko satisfy karwaega itne bada neta mantri bana dete hain jo bhi hai 11 usko bhatt ek ek simple sa voting ke voting ke chalo uska work dekh ke super li aur lekin uski gahan uska dhyan uska mentally dimag kis tarah ka bhav ho dharmik ho sab cheezen ko dekhte hue uska banner dekhte hue is janta kush kush select karti hai lekin utana nahi karti hai totally upar ka work hota hai kuch yuvakon uska dekhne se use bade neta log hain mantri log bana dete hain anpad ko yah galat hai padha likha wahi hona chahiye mantri bhi graduation vala chahiye taki har step bye step ko hogi samast samast jaan sake

पढ़ लिख कर इतने बड़े अफसर बनते हैं पर एक बिना पढ़े लिखे मंत्री के अंदर काम करते हैं यह बिल

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bbbb

Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्योंकि भारत की सर्वोच्च विधि तथा भारतीय संविधान में ऐसा प्रावधान है एक मंत्री बनने के लिए भारतीय नागरिक को पढ़ा लिखा होना अनिवार्य नहीं है बस उसका स्वस्थ दिमाग हो दिवाली आना हो एक निश्चित उम्र सीमा से कम ना हो और यहां तक कि मंत्री बनने के लिए विधानमंडल लिए संसद का सदस्य होना भी जरूरी नहीं है 6 महीने तक बिना एमएलए एमपी हुए भी कोई व्यक्ति मंत्री रह सकता है प्रधानमंत्री की इच्छा से लेकिन उसके बाद उसे विधायिका में निर्वाचित होकर आना होगा अन्यथा पद छोड़ना होगा मुझे लगता है ऐसा प्रावधान संविधान में इसलिए क्या होगा काफी विचार विमर्श किया गया था संविधान बनाते वक्त यह हमारे यहां अनपढ़ लोगों की संख्या बहुत अधिक और उन सभी का नेतृत्व एक विधायक सांसद करता है उनकी भावनाओं का उनके जीवन का जोड़ उसके साथ होता है एक नेता के साथ होता है तो लोकतंत्र में भी जरूरी था उस वक्त तत्कालीन परिस्थितियों में मूलभूत का अच्छा काम करना है हम देखते हैं कि पढ़े-लिखे लोग भ्रष्टाचार में अधिक सम्मिलित होते हैं चाहे वे नेता मंत्री हो या ब्यूरोक्रेट सॉन्ग अफसरों कर्मचारियों तो पढ़े लिखे हो ना कोई भ्रष्टाचार से दूर रहने की गारंटी नहीं है इसलिए यह महत्वपूर्ण में नहीं है फोन बात यह है कि वह ईमानदार हो उसके लिए साफ हो और वह देश हित में मानवता के हित में नागरिकों के बेहतरी के हित में कार्य करें और कराए अधिकारियों का पढ़ा लिखा होना इसलिए जरूरी है कि जो नीतियां मंत्री का कैबिनेट बनाती है उनको ठीक से क्रियान्वित करें यह काम कार्यपालिका अधिकारियों का है इसलिए उनका पढ़ा लिखा होना जरूरी है धन्यवाद

kyonki bharat ki sarvoch vidhi tatha bharatiya samvidhan me aisa pravadhan hai ek mantri banne ke liye bharatiya nagarik ko padha likha hona anivarya nahi hai bus uska swasth dimag ho diwali aana ho ek nishchit umar seema se kam na ho aur yahan tak ki mantri banne ke liye vidhanmandal liye sansad ka sadasya hona bhi zaroori nahi hai 6 mahine tak bina mla MP hue bhi koi vyakti mantri reh sakta hai pradhanmantri ki iccha se lekin uske baad use vidhayika me nirvachit hokar aana hoga anyatha pad chhodna hoga mujhe lagta hai aisa pravadhan samvidhan me isliye kya hoga kaafi vichar vimarsh kiya gaya tha samvidhan banate waqt yah hamare yahan anpad logo ki sankhya bahut adhik aur un sabhi ka netritva ek vidhayak saansad karta hai unki bhavnao ka unke jeevan ka jod uske saath hota hai ek neta ke saath hota hai toh loktantra me bhi zaroori tha us waqt tatkalin paristhitiyon me mulbhut ka accha kaam karna hai hum dekhte hain ki padhe likhe log bhrashtachar me adhik sammilit hote hain chahen ve neta mantri ho ya Bureaucrat song afsaron karmachariyon toh padhe likhe ho na koi bhrashtachar se dur rehne ki guarantee nahi hai isliye yah mahatvapurna me nahi hai phone baat yah hai ki vaah imaandaar ho uske liye saaf ho aur vaah desh hit me manavta ke hit me nagriko ke behatari ke hit me karya kare aur karae adhikaariyo ka padha likha hona isliye zaroori hai ki jo nitiyan mantri ka cabinet banati hai unko theek se kriyanwit kare yah kaam karyapalika adhikaariyo ka hai isliye unka padha likha hona zaroori hai dhanyavad

क्योंकि भारत की सर्वोच्च विधि तथा भारतीय संविधान में ऐसा प्रावधान है एक मंत्री बनने के लि

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Anand Kumar

EVANGELIST

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह सोच बिल्कुल गलत है कि अब पढ़ लिख कर इतने बड़े अफसर बनते हैं और बिना पढ़े लिखे मंत्री के अंदर हम लोग काम करते हैं पहली बात तो हमेशा इस बात को ध्यान रखें कि बुद्धि का बुद्धिमत्ता का एजुकेशन से कोई लेना देना नहीं है कुछ लोग पढ़ लिख कर भी बेवकूफ हो सकते हैं और कुछ लोग बिना पढ़े लिखे भी बुद्धिमान हो सकते हैं अगर आप इतिहास देखें तो इतिहास में बहुत जानी मानी हस्ती पर्सनैलिटी आपको मिलेगी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे उन्होंने समाज को देश को राष्ट्र को बहुत बड़ा योगदान दिया तो यह मत सोचिए कि पढ़ लिखकर बड़े अफसर बनने पर एक अशिक्षित या कम पढ़े लिखे मंत्री के अंदर में काम करना पड़ता है यह निर्भर करता है कि मंत्री किस तरह का है ऐसे मंत्री होंगे उनके अंदर लीडरशिप क्वालिटी होती है और कैसी का काम है कि जो लोग हैं जो उनके पॉलिसी है उनको सही तरीके से और इसका सिंपल सा उदाहरण यह है कि आप अमेरिका और यूरोप में जो बहुत ही बड़ी बड़ी कंपनी है इस कंपनी के तो होश में है वह ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है लेकिन बड़ी ही सफलता के साथ कुशलता के साथ उन्होंने उस कंपनी को मुकाम पर पहुंचाया है ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं की बुद्धि ने इंटेलिजेंस में और बाकी चीजों में वह पढ़े लिखों से बहुत आगे रहे तो केवल पढ़ लिख पढ़ने लिखने से ही कोई बुद्धिमान नहीं हो जाता बिना पढ़े लिखे भी बुद्धिमान बना जा सकता है

yah soch bilkul galat hai ki ab padh likh kar itne bade officer bante hain aur bina padhe likhe mantri ke andar hum log kaam karte hain pehli baat toh hamesha is baat ko dhyan rakhen ki buddhi ka buddhimatta ka education se koi lena dena nahi hai kuch log padh likh kar bhi bewakoof ho sakte hain aur kuch log bina padhe likhe bhi buddhiman ho sakte hain agar aap itihas dekhen toh itihas me bahut jani maani hasti personality aapko milegi zyada padhe likhe nahi the unhone samaj ko desh ko rashtra ko bahut bada yogdan diya toh yah mat sochiye ki padh likhkar bade officer banne par ek ashikshit ya kam padhe likhe mantri ke andar me kaam karna padta hai yah nirbhar karta hai ki mantri kis tarah ka hai aise mantri honge unke andar leadership quality hoti hai aur kaisi ka kaam hai ki jo log hain jo unke policy hai unko sahi tarike se aur iska simple sa udaharan yah hai ki aap america aur europe me jo bahut hi badi badi company hai is company ke toh hosh me hai vaah zyada padhe likhe nahi hai lekin badi hi safalta ke saath kushalata ke saath unhone us company ko mukam par pahunchaya hai aise log hain jinhone apni college ki padhai puri nahi ki school ki padhai puri nahi ki buddhi ne intelligence me aur baki chijon me vaah padhe likhon se bahut aage rahe toh keval padh likh padhne likhne se hi koi buddhiman nahi ho jata bina padhe likhe bhi buddhiman bana ja sakta hai

यह सोच बिल्कुल गलत है कि अब पढ़ लिख कर इतने बड़े अफसर बनते हैं और बिना पढ़े लिखे मंत्री के

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Vijay Lakshmi

Lecturer In English

1:41
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह आप पर निर्भर करता है कि आप राजनीति में जाना जाते हैं जो राजनीति में जाना चाहते हैं उसके लिए जैसा छोटे से बड़े होते उसके लिए अपना पीस तैयार करते हैं पढ़े-लिखे लोग मंत्री के अधीन काम करते हैं इसमें कोई बुराई नहीं है एक अच्छे नेता के लिए बहुत डिक्रीज की जरूरत नहीं उसके लिए एक जज्बा स्थान देने की योग्यता होनी चाहिए वह लोगों को कैसे प्रभावित कर सकें कैसे एक अच्छे भाषण से तुमको अपने प्रभाव में ले आए और वह किसी ऐसे कार्य से भलाई के कार्य से जुड़ा है कि उसे बहुत सारे लोग उसको फॉलो करना चाहते हैं पढ़े लिखे लोग नीचे के अधीन काम करते हैं ऐसा नहीं है हम सब अपना कार्य आ रही हैं अपना कार्य कर रही हैं उसमें कोई काम छोटा या बड़ा नहीं है जो हम प्लान करते हैं जिस तरह से हम उसके सारे रूपरेखा बनाते हैं पर लिखकर मंत्री उसको पेश भी कर रहा है तो उसके पीछे यह सारे दिमाग काम कर रहे हैं और यह एक पिलर है पढ़े लिखे लोगों का पढ़े-लिखे अधिकारियों का तर्क था कि वह उस मंत्री को सपोर्ट करें कोई भी अलग-थलग आइसोलेशन में नहीं रह सकता है तो काम नीचे नहीं कर रहे हैं काम मिलकर करें पहली बात यह समझ लिया

yah aap par nirbhar karta hai ki aap raajneeti me jana jaate hain jo raajneeti me jana chahte hain uske liye jaisa chote se bade hote uske liye apna peace taiyar karte hain padhe likhe log mantri ke adheen kaam karte hain isme koi burayi nahi hai ek acche neta ke liye bahut dikrij ki zarurat nahi uske liye ek jajba sthan dene ki yogyata honi chahiye vaah logo ko kaise prabhavit kar sake kaise ek acche bhashan se tumko apne prabhav me le aaye aur vaah kisi aise karya se bhalai ke karya se juda hai ki use bahut saare log usko follow karna chahte hain padhe likhe log niche ke adheen kaam karte hain aisa nahi hai hum sab apna karya aa rahi hain apna karya kar rahi hain usme koi kaam chota ya bada nahi hai jo hum plan karte hain jis tarah se hum uske saare rooprekha banate hain par likhkar mantri usko pesh bhi kar raha hai toh uske peeche yah saare dimag kaam kar rahe hain aur yah ek pillar hai padhe likhe logo ka padhe likhe adhikaariyo ka tark tha ki vaah us mantri ko support kare koi bhi alag thalag aisoleshan me nahi reh sakta hai toh kaam niche nahi kar rahe hain kaam milkar kare pehli baat yah samajh liya

यह आप पर निर्भर करता है कि आप राजनीति में जाना जाते हैं जो राजनीति में जाना चाहते हैं उसके

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Suresh

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Atul Patne

IAS, Maharashtra

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पढ़ लिख कर आप अपने मैसेज के हिसाब से कोई जॉब प्राप्त करते हैं उसके बाद आपके पिता के अनुरूप आपको पोस्ट प्राप्त करते हैं और जिन्हें आप रिपोर्ट करते हैं उस वरिष्ठ पद पर वह व्यक्ति का चयन हो जाना उपयोगिता को दर्शाता है होलिका पढ़ा नहीं है लेकिन अगर उसने वो क्षमता है और वह वहां तक पहुंच गया है तो आप को मानना होगा कि किसी योग्यता के कारण ही वह वहां पहुंचा है अन्यथा करके दो आप सुनिश्चित हैं कि आप भी पढ़ाई लिखाई करने के बजाय राजनीति में उतरते लाखों लोगों को इतना जरूर आपकी बुद्धिमत्ता से प्रभावित करते तो आपको चुनाव में जीता दे और आप पर इतना भरोसा करें कि वह आपके ऊपर अपने विकास के लिए विश्वास दर्शा सकें तो आपकी योग्यता जो है वह आपने अपने जनता के बीच में जो अपनी प्रतिभा निखारने के लिए जो व्याख्या कौशल का विकास किया गया मंत्री है वह वहां तक पहुंच गया है अब उसकी शैक्षिक योग्यता के आधार पर आप उसे मंत्री पद से करने निकाल सकते हो तो मंत्री पद की योग्यता तो उसे ज्यादा हुई यह बात का को समझना चाहिए

padh likh kar aap apne massage ke hisab se koi job prapt karte hain uske baad aapke pita ke anurup aapko post prapt karte hain aur jinhen aap report karte hain us varishtha pad par vaah vyakti ka chayan ho jana upayogita ko darshata hai holika padha nahi hai lekin agar usne vo kshamta hai aur vaah wahan tak pohch gaya hai toh aap ko manana hoga ki kisi yogyata ke karan hi vaah wahan pohcha hai anyatha karke do aap sunishchit hain ki aap bhi padhai likhai karne ke bajay raajneeti mein utarate laakhon logo ko itna zaroor aapki buddhimatta se prabhavit karte toh aapko chunav mein jita de aur aap par itna bharosa kare ki vaah aapke upar apne vikas ke liye vishwas darsha sake toh aapki yogyata jo hai vaah aapne apne janta ke beech mein jo apni pratibha nikharne ke liye jo vyakhya kaushal ka vikas kiya gaya mantri hai vaah wahan tak pohch gaya hai ab uski shaikshik yogyata ke aadhaar par aap use mantri pad se karne nikaal sakte ho toh mantri pad ki yogyata toh use zyada hui yah baat ka ko samajhna chahiye

पढ़ लिख कर आप अपने मैसेज के हिसाब से कोई जॉब प्राप्त करते हैं उसके बाद आपके पिता के अनुरूप

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

3:36

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखे हमारे जो संविधान है वो एक मंत्री की जो क्राइटेरिया है उस पर यह नहीं बोलता कि आपके पास यह डिग्री होने चाहिए यह डिप्लोमा होना चाहिए सर्टिफिकेशन वगैरा-वगैरा यह सारी चीजें नहीं बोलता इसलिए आपको दिखेगा कि हमारे जो मंत्री लोग हैं वह बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है या उन्होंने इस चीज में महारत हासिल नहीं की है क्योंकि हमारा जो एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया होता है एक मंत्री बनने का वह ऐसा नहीं होता है वही मंत्री वह बनता है जिनके पीछे समर्थन होता है जिनके साथ लोग खड़े हो जाते हैं और उसको चीता देते हैं चुनाव में क्यों क्योंकि लोगों को विश्वास होता है कि ऐसे इंसान हैं जो कुछ काम करवा सकते हैं हमारे समाज को हमारे और वर्ग को या उसे रिया को उस शाम को जस्टिस कर पाएंगे अगर यह उस जगह पर पहुंच जाएं तो लोग अगर उनको योग्य समझते हैं कि भाई यह हमारे हित में ही फैसले और काम करेंगे तो इसीलिए कोई इंसान मंत्री बन जाता है मंत्री बनने के लिए कोई ऐसी अयोग्यता नहीं चाहिए अलग से कि आपको ऐसा होना चाहिए आपको वैसा होना चाहिए वगैरा-वगैरा तो इसीलिए आप देखेंगे कि भाई ऑफिशल्स जो कि मंत्री के अंदर काम करते हैं वह योग्य होते हैं वह इसलिए योग्य होते हैं कि ऑफिस असी तो होते हैं चाहे वह आईएएस आईएफएस आईपीएस जो भी ऑफिस एसओएस का डर के ऑफिस है यह बहुत योग्य होते हैं इनको पता होता है देश-दुनिया के बारे में इनको पता होता है कि यहां पर क्या चला कैसे काम करना है क्या करना है कैसे ले जाना चाहे वो इंश्योरेंस सुरक्षा की बात हो जाए तो नार्मल इकॉनमी की बात आ जाए वह सेफ्टी सिक्योरिटी की बातों से कोई मतलब यह सारे लोग हैं जो अपने सब्जेक्ट एरिया में निपुण होते हैं और यह गाइड करते हैं मिनिस्टर को तो मिनिस्टर के अपने आइडियाज होते हैं थॉट्स ओं थे जो इन से सलाह मशवरा लेते हैं और इनको इंप्लीमेंट जाने के लिए बोलते हैं एग्जीक्यूट करने के लिए बोलते हैं साथ में यह लो पर मिनिस्टर्स को गाइड करते हैं कि देखे हैं ऐसा करना चाहिए ऐसा नहीं करना चाहिए यह करने से ऐसा होगा वह करने से पैसा होगा तो इसमें दोनों का माला है दोनों का भला ऐसा है कि वह इंसान जो पर बैठा है जिस पर लोगों ने विश्वास जताया कि वह उनके काम करवा सकता है उस मिनिस्टर के पास एक बहुत ही काबिल वह खुश है इन ऑफिस के रूप में जो एक आम को इंप्लीमेंट करते हैं को अंजाम देते हैं कई बार तो उनके दिमाग ही होते हैं किसी ने पारी को शुरू करने में तो इसीलिए यह जो यह जुकाम भी नहीं नहीं रिकांबिनेशन ठीक-ठाक है हां लेकिन मैं यह जरूर मानता हूं कि फिर भी हमारी जो नेता लोग हैं उनको कुछ पढ़ा लिखा जरूर होना चाहिए पहली बात दूसरी बात उनका बैकग्राउंड जो है वह कोई ऐसा नहीं होना चाहिए कि वह जेल में जा चुके हैं या उनके ऊपर कोई मुकदमा चल रहा है वगैरा-वगैरा ऐसा नहीं होना चाहिए यह मेरा बहुत सॉन्ग गोपी ने ने उनका भी हिसाब-किताब बहुत आया रिकॉर्ड बहुत साफ होना चाहिए जिस तरीके से अगर आप और कहीं जॉब करने जाते हैं किसी बिजनेस में काम करने जाते हैं तो वहां पर जिस तरीके से हमारे एजुकेशन क्वालिफिकेशन देखा जाता है हमारा बैकग्राउंड चेक कराया जाता है देखा जाता है कि भाई मैंने कोई गलत काम तो नहीं किया मेरा कोई जेल बेल का हसीन तो नहीं है अगर ऐसा कुछ होता है तो मुझे नौकरी नहीं मिलती इसी तरीके से एक मंत्री को नौकरी नहीं मिली थी क्योंकि वह जनता की सेवा करने जा रहे हैं अगर वह ईमानदार नहीं है उसके ऊपर कोर्ट केस चल रहा है कोई सही बात नहीं होगी फिलहाल तो ऐसा है लेकिन आगे चलकर शायद हो सकता यह चीजें बदल जाए तो बस मैं इतना ही कहूंगा

dekhe hamare jo samvidhan hai vo ek mantri ki jo criteria hai us par yah nahi bolta ki aapke paas yah degree hone chahiye yah diploma hona chahiye certification vagaira vagaira yah saree cheezen nahi bolta isliye aapko dikhega ki hamare jo mantri log hain vaah bahut zyada padhe likhe nahi hai ya unhone is cheez mein maharat hasil nahi ki hai kyonki hamara jo eligibility criteria hota hai ek mantri banne ka vaah aisa nahi hota hai wahi mantri vaah baata hai jinke peeche samarthan hota hai jinke saath log khade ho jaate hain aur usko chita dete hain chunav mein kyon kyonki logo ko vishwas hota hai ki aise insaan hain jo kuch kaam karva sakte hain hamare samaj ko hamare aur varg ko ya use riya ko us shaam ko justice kar payenge agar yah us jagah par pohch jayen toh log agar unko yogya samajhte hain ki bhai yah hamare hit mein hi faisle aur kaam karenge toh isliye koi insaan mantri ban jata hai mantri banne ke liye koi aisi ayogyata nahi chahiye alag se ki aapko aisa hona chahiye aapko waisa hona chahiye vagaira vagaira toh isliye aap dekhenge ki bhai afishals jo ki mantri ke andar kaam karte hain vaah yogya hote hain vaah isliye yogya hote hain ki office asi toh hote hain chahen vaah IAS IFS ips jo bhi office SOS ka dar ke office hai yah bahut yogya hote hain inko pata hota hai desh duniya ke bare mein inko pata hota hai ki yahan par kya chala kaise kaam karna hai kya karna hai kaise le jana chahen vo insurance suraksha ki baat ho jaaye toh normal economy ki baat aa jaaye vaah safety Security ki baaton se koi matlab yah saare log hain jo apne subject area mein nipun hote hain aur yah guide karte hain minister ko toh minister ke apne ideas hote hain thoughts on the jo in se salah mashwara lete hain aur inko implement jaane ke liye bolte hain egjikyut karne ke liye bolte hain saath mein yah lo par ministers ko guide karte hain ki dekhe hain aisa karna chahiye aisa nahi karna chahiye yah karne se aisa hoga vaah karne se paisa hoga toh isme dono ka mala hai dono ka bhala aisa hai ki vaah insaan jo par baitha hai jis par logo ne vishwas jataya ki vaah unke kaam karva sakta hai us minister ke paas ek bahut hi kaabil vaah khush hai in office ke roop mein jo ek aam ko implement karte hain ko anjaam dete hain kai baar toh unke dimag hi hote hain kisi ne paari ko shuru karne mein toh isliye yah jo yah zukam bhi nahi nahi rikambineshan theek thak hai haan lekin main yah zaroor manata hoon ki phir bhi hamari jo neta log hain unko kuch padha likha zaroor hona chahiye pehli baat dusri baat unka background jo hai vaah koi aisa nahi hona chahiye ki vaah jail mein ja chuke hain ya unke upar koi mukadma chal raha hai vagaira vagaira aisa nahi hona chahiye yah mera bahut song gopi ne ne unka bhi hisab kitab bahut aaya record bahut saaf hona chahiye jis tarike se agar aap aur kahin job karne jaate hain kisi business mein kaam karne jaate hain toh wahan par jis tarike se hamare education qualification dekha jata hai hamara background check raya jata hai dekha jata hai ki bhai maine koi galat kaam toh nahi kiya mera koi jail bell ka Haseen toh nahi hai agar aisa kuch hota hai toh mujhe naukri nahi milti isi tarike se ek mantri ko naukri nahi mili thi kyonki vaah janta ki seva karne ja rahe hain agar vaah imaandaar nahi hai uske upar court case chal raha hai koi sahi baat nahi hogi filhal toh aisa hai lekin aage chalkar shayad ho sakta yah cheezen badal jaaye toh bus main itna hi kahunga

देखे हमारे जो संविधान है वो एक मंत्री की जो क्राइटेरिया है उस पर यह नहीं बोलता कि आपके पास

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यह विडंबना है इस देश की जहां एक चपरासी की नौकरी के लिए एक्सएक्सन्नी की योग्यता अनिवार्य कर रखी है लेकिन इस देश की नीति निर्धारण करने वालों के लिए ना कोई उम्र का बंधन ना कोई शिक्षक योग्यता यह हमारे देश की विडंबना है

yah widambana hai is desh ki jaha ek chaprasi ki naukri ke liye eksaeksanni ki yogyata anivarya kar rakhi hai lekin is desh ki niti nirdharan karne walon ke liye na koi umr ka bandhan na koi shikshak yogyata yah hamare desh ki widambana hai

यह विडंबना है इस देश की जहां एक चपरासी की नौकरी के लिए एक्सएक्सन्नी की योग्यता अनिवार्य

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Abhay Pratap

Advocate | Social Welfare Activist

0:44
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इन दोनों का अर्थ श्रेष्ठ है कोई स्कूल में पढ़ता है और कोई समाज में पड़ता है तो दोनों का महत्व श्रेष्ठ है और दोनों की विषय पर टकराव की विचारधाराएं ना उत्पन्न हो कोई ज्ञान की गरिमा है और कोई मान की गरिमा है मान का गरमा गरिमा नेता के पास होता है जिसे जनता चुनती है अतः सारी जनता के लिए अधिकारी बनता है तो सारी नियम समझने के बाद किसी की की छाया किसी पर गलत विचार करें लो मैं किसी को दोस्त नहीं दूंगा

in dono ka arth shreshtha hai koi school mein padhata hai aur koi samaj mein padta hai toh dono ka mahatva shreshtha hai aur dono ki vishay par takraav ki vichardharaen na utpann ho koi gyaan ki garima hai aur koi maan ki garima hai maan ka grma garima neta ke paas hota hai jise janta chunati hai atah saari janta ke liye adhikari banta hai toh saari niyam samjhne ke baad kisi ki ki chhaya kisi par galat vichar kare lo main kisi ko dost nahi dunga

इन दोनों का अर्थ श्रेष्ठ है कोई स्कूल में पढ़ता है और कोई समाज में पड़ता है तो दोनों का मह

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भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि अनपढ़ आदमी भी मालिक हो सकता और पढ़ा लिखा नौकर हो सकता है लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं हमारा एजुकेशन हमारे संस्कार हमारे संस्कृति कभी हमें छोटा नहीं बनाती अनपढ़ मंत्रियों की स्थिति क्या होती है बड़े-बड़े अफसरों के सामने वह हमसे छुपी हुई नहीं है उनको आप चलाते हैं आपको भी नहीं चलाते कहने मात्र को आपके के मालिक हैं सच में आप ही उनके मालिक होते हैं धन्यवाद

bharatiya loktantra ki khoobsoorti yahi hai ki anpad aadmi bhi malik ho sakta aur padha likha naukar ho sakta hai lekin isse ghabrane ki avashyakta nahi hamara education hamare sanskar hamare sanskriti kabhi hamein chota nahi banati anpad mantriyo ki sthiti kya hoti hai bade bade afsaron ke saamne vaah humse chhupee hui nahi hai unko aap chalte hain aapko bhi nahi chalte kehne matra ko aapke ke malik hain sach mein aap hi unke malik hote hain dhanyavad

भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि अनपढ़ आदमी भी मालिक हो सकता और पढ़ा लिखा नौकर हो सकत

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Shashikant Mani Tripathi

Yoga Expert | Life Coach

1:49
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किसी भी व्यक्ति की योग्यता का आधार सिर्फ पढ़ा लिखा होना नहीं है अगर यह बात सही है तो संत कबीरदास जो भारत के बहुत बड़े समाज सुधारक रहे हैं और आज भी उनकी बातों का समाज में बहुत ही प्रासंगिक हैं और बहुत ही उपयोगिता उनकी बातों की है परंतु उन्होंने कहा मसि कागद छुयो नहीं कलम धरो नहीं हाथ कागज कलम कभी हमने छुआ ही नहीं पढ़ा लिखा सुप्रभात पढ़ी लिखी हर बात नहीं आंखों देखी बात कही सुनी और पढ़ी लिखी बातें नहीं है आंखों देखी हैं जो देखने की दोस्ती है वह व्यक्ति को काम करके आता है जो नेता है वह बहुत सारे लोगों का प्रतिनिधि है और बहुत सारे लोगों को वह समझता है और लोग उसे समझ के पढ़ा लिखा व्यक्ति है वह किसी विषय का विशेषज्ञ हो सकता है और अंततः कोई भी काम आप लोगों के लिए ही करते हैं तो लोगों की समझ जो नेता को होती है वह निश्चित ही पढ़े-लिखे लोग क्योंकि वह लोगों में नहीं है वह किताबों में हैं तो जिंदगी जो है किताबों में पढ़ कर भी सीखी जा सकती है और जिंदगी लोगों के बीच भी सीखी जा सकती है नेता निश्चित ही लोगों के बीच से गया हुआ व्यक्ति है तो यह परंपरा गलत नहीं है लेकिन हां यह कह सकते हैं कि एक जो नेता है अगर उसकी दृष्टि लोकसेवा ना हो वैसे ही अगर एक अधिकारी है उसकी लिस्ट लोकसेवा ना हो तो यह विसंगति का सामना करना पड़ता है नेता के अंडर में काम करना पढ़े लिखे व्यक्ति के लिए मैं समझता हूं यह पूरी तरह दोनों काम कर सकते हैं एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं क्योंकि समाज की बहुत अच्छी समझने तक होती है और पढ़े लिखे व्यक्ति को बहुत अच्छी समझ एजुकेशन की होती है यह दोनों मिलकर काम करें तो एक्सिस्ट काम हो सकता है इसलिए ऐसा करना पड़ता है

kisi bhi vyakti ki yogyata ka aadhar sirf padha likha hona nahi hai agar yah baat sahi hai toh sant kabirdas jo bharat ke bahut bade samaj sudharak rahe hain aur aaj bhi unki baaton ka samaj mein bahut hi prasangik hain aur bahut hi upayogita unki baaton ki hai parantu unhone kaha masi kagad chuyo nahi kalam dharo nahi hath kagaz kalam kabhi humne chhua hi nahi padha likha suprabhat padhi likhi har baat nahi aankho dekhi baat kahi suni aur padhi likhi batein nahi hai aankho dekhi hain jo dekhne ki dosti hai vaah vyakti ko kaam karke aata hai jo neta hai vaah bahut saare logo ka pratinidhi hai aur bahut saare logo ko vaah samajhata hai aur log use samajh ke padha likha vyakti hai vaah kisi vishay ka visheshagya ho sakta hai aur antatah koi bhi kaam aap logo ke liye hi karte hain toh logo ki samajh jo neta ko hoti hai vaah nishchit hi padhe likhe log kyonki vaah logo mein nahi hai vaah kitabon mein hain toh zindagi jo hai kitabon mein padh kar bhi sikhi ja sakti hai aur zindagi logo ke beech bhi sikhi ja sakti hai neta nishchit hi logo ke beech se gaya hua vyakti hai toh yah parampara galat nahi hai lekin haan yah keh sakte hain ki ek jo neta hai agar uski drishti lokseva na ho waise hi agar ek adhikari hai uski list lokseva na ho toh yah visangati ka samana karna padta hai neta ke under mein kaam karna padhe likhe vyakti ke liye main samajhata hoon yah puri tarah dono kaam kar sakte hain ek dusre ke purak ho sakte hain kyonki samaj ki bahut achi samjhne tak hoti hai aur padhe likhe vyakti ko bahut achi samajh education ki hoti hai yah dono milkar kaam kare toh eksist kaam ho sakta hai isliye aisa karna padta hai

किसी भी व्यक्ति की योग्यता का आधार सिर्फ पढ़ा लिखा होना नहीं है अगर यह बात सही है तो संत क

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dr sakshi singh

skin Treatment Dietician All Body Problem Solution Normal Physician

5:29
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ऐसा क्यों सुखी भारत देश का जो शुरू से इतिहास राणा वजनदार है सब सत्ता के लोभ लालच में जिस तरह नेहरु जी ने किया गांधी जी का जो भी कहा कोई भी ऐसा कानून मुझे नहीं लगा इंडिया का जो संयोजन का अनपढ़ मंत्री अनपढ़ लोग मंत्री बनते हैं कानून बिजली का राजा की प्रणाली कद दे जो टाइमर लूंगी मंत्री बन सकते हैं कहते हैं कि भीमराव अंबेडकर ने संविधान बनाया था यह बनाया तो बनाया था इतिहास कितनी गंदी कानून है कि पाकिस्तान को बांध दिया वैसे ही भारत को भी बदतर हिंदुओं के लिए जाना छोड़ देता किसानों के लिए पाकिस्तान मुस्लिमों का रहता है जो दंगा हो रहे मुस्लिम अंधा कानून स्टेज का है इतने पढ़े लिखे आदमी हो चाह कर भी आपके देश के लिए कुछ नहीं कर सकते क्योंकि जो आपके सत्ता पर बैठे हैं अनपढ़ लोग वह लोग उसको कर ले नहीं देंगे अच्छे पढ़े-लिखे आदमी या तो नौकरी करता है मैं तो पैसे की प्रॉब्लम रहती है उसके बाद वह भी सी सी एस टी 20 एयरटेल एंड और ईमानदार है उनके पास आज भी जवाब नहीं है पैसे पैसों के लिए कहां-कहां माथापच्ची करते हैं बिजनेस करते करते हो वह करते जब पैसे किस रूट से आते हैं तब जाकर वह कुछ कुछ और सोचेंगे ना देश के लिए सोचेंगे ना तो यह सबसे बड़ी गलती है संविधान में nanokey2 ने जिन्होंने संविधान बनाया उनकी बहुत बड़ी फोल्डर आज हिंदू मुस्लिम दलित मारामारी काटा कटी हो रहे क्या देश में क्या हो रहा है अगर वह सही में कानून बनता है मैंने बहुत सारे कंट्री में दुबई में विदाई नंबर ने श्याम रे मस्कत मेरे मेरा कानून बनने के बाद फिर बोलते हिंदू मुस्लिम अक्सर समाज के जो युवा पीढ़ी है और हम जैसे जनरेशन है हम ऑफिसर बनने के चक्कर में क्यों रहते हैं ईमानदार नेता बनने के चक्कर में क्यों नहीं रहते अजब जितने लोग नौकरी के चक्कर में पढ़ेंगे आज देश की इस वजह से बर्बाद है अगर देश के यूथ लोग अगर आज मीटर होते हैं कुछ भी होता नेतृत्व इमानदार होता पढ़े लिखे होते तो आज देश की दुर्दशा नहीं होती जनसंख्या कितनी बड़ी हुई है उसके बाद जब कहां से मिले इतने करोड़ आबादी में आपको क्या लगता है आपको जॉब मिलेगा नहीं टैक्स भरने वाले 50 करोड़ में खाने वाले 50 करोड़ अलग से फ्री के खाने वाले ऐसे देश नहीं चलता है जब भी कोई नया कानून करो लागू तो हंगामा देश में शुरू हो जाता है एनआरसीटी क्यों वह क्यों कोई भी बंगलादेशी घुसपैठ किया किस देश में रहकर पैसे कमा के लोगों की गर्दन काट के चला जाता है सनी की इंडियन मुस्लिम बदमाश है या हिंदू बदमाश जो बाहरी लोग आते हैं वह आपको या कांड करके जाते हैं पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी लोगों को पढ़ने के लिए बैठ जाते लोगों को लेकर पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी क्या है तो मैं यह नौकरी करूंगा गवर्नमेंट जॉब सबको चाहिए किसी को अपनी दुनिया बनाने में इंटरेस्ट नहीं है यह नहीं सोचते कि मैं जॉब करूंगा मैं अगर कुछ करूं तो 10 नौकरी दुनिया चलती है बाहर देशों की इंडिया में संबंधित यही नहीं पढ़ाई लिखाई करना है तो गवर्नमेंट जॉब लग जाए ईमानदारी कहां है दूसरों के लिए लागू होती है सब कानून अपने घर के नहीं रहते अपनी बात नीचे नीचे मंत्री अपने अंदर में पढ़े लिखे लोगों को जब आती है कुछ भी करती है पुरुष के हाथ हाथ लगा देते आइटीबीपुलिस को मार देती है मैं किसी मजबूर पुलिस कॉम को समझती हो ना इस देश के लोगों को लोगों की बदकिस्मती है तुमको क्या बचाने जो खुद बिचारे दंगा में मर जाते हैं पुलिस गृह मंत्रालय को डर लगता कि बाईपास बंदूक मत करो आप जो दंगा करें हजारों लोग पुलिस को मार दे चलेगा अनपढ़ लोग सत्ता में बैठे हैं और पढ़े-लिखे लोग उनकी जी हुजूरी करते हैं इसके लिए देश बर्बाद है जिस दिन पढ़े-लिखे लोग सत्ता में आ जाएंगे इस देश का कायाकल्प हो जाएगा कोई भी कोई भी कास्ट ऑफ मैं किसी का सपोर्ट नहीं करती लेकिन मुझे कोई भी बंदा अगर इसमें बुद्धिजीवी पटेल के लिए ताजा गए समाज में नौकरी छोड़कर करो सोचे कि नहीं मुझे पॉलिटिक्स में आकर देश की रक्षा करनी है या सच पर चलना है आज देश की तस्वीर अलग होती यह दुर्दशा का दिन हम लोग इसके कारण है हम और आप सब इस के गानों में हम लोगों की सोच खाओ पियो और पैसा ₹5 दे बस बहुत है आजू बाजू का समाज में कोई कमी है अपनी दुर्दशा का खुद जिम्मेवार इंडियन रुपीस तक बातें पढ़ लिख के ऑफिसर बनना पढ़ ली के करना पढ़ने क्यों करना पढ़ ली के समाज को ठीक नहीं करना है मिली सोते कि मैं पढ़ ली के दूसरे अनपढ़ों को पढ़ा दूं मैं जाकर सप्ताह में इलेक्शन में राजनीति को को वोट कौन देता है हमारा आप देते हैं ना अनपढ़ लोगों को जीत आते कौन है तुम्हारा यह बेवकूफी वाला क्वेश्चन पूछने की जरूरत ही क्या है कि पढ़े-लिखे लोग नौकरी करते हैं और बंद कर लो सबसे बड़ा देश का गद्दार तो ना कि पब्लिक है जो सपोर्ट करके किसी को भी कहां तक पहुंचा देती है वेरी बेड इंडियन कानून को बहिष्कार करते हो

aisa kyon sukhi bharat desh ka jo shuru se itihas rana vazandar hai sab satta ke lobh lalach mein jis tarah nehru ji ne kiya gandhi ji ka jo bhi kaha koi bhi aisa kanoon mujhe nahi laga india ka jo sanyojan ka anpad mantri anpad log mantri bante hain kanoon bijli ka raja ki pranali kad de jo timer lungi mantri ban sakte hain kehte hain ki bhimrao ambedkar ne samvidhan banaya tha yah banaya toh banaya tha itihas kitni gandi kanoon hai ki pakistan ko bandh diya waise hi bharat ko bhi badataar hinduon ke liye jana chod deta kisano ke liye pakistan muslimo ka rehta hai jo danga ho rahe muslim andha kanoon stage ka hai itne padhe likhe aadmi ho chah kar bhi aapke desh ke liye kuch nahi kar sakte kyonki jo aapke satta par baithe hain anpad log vaah log usko kar le nahi denge acche padhe likhe aadmi ya toh naukri karta hai toh paise ki problem rehti hai uske baad vaah bhi si si s T 20 airtel and aur imaandaar hai unke paas aaj bhi jawab nahi hai paise paison ke liye kahan kahan mathapachchi karte hain business karte karte ho vaah karte jab paise kis root se aate hain tab jaakar vaah kuch kuch aur sochenge na desh ke liye sochenge na toh yah sabse badi galti hai samvidhan mein nanokey2 ne jinhone samvidhan banaya unki bahut badi folder aaj hindu muslim dalit maramari kaata katee ho rahe kya desh mein kya ho raha hai agar vaah sahi mein kanoon baata hai maine bahut saare country mein dubai mein vidai number ne shyam ray maskat mere mera kanoon banne ke baad phir bolte hindu muslim aksar samaj ke jo yuva peedhi hai aur hum jaise generation hai hum officer banne ke chakkar mein kyon rehte hain imaandaar neta banne ke chakkar mein kyon nahi rehte ajab jitne log naukri ke chakkar mein padhenge aaj desh ki is wajah se barbad hai agar desh ke youth log agar aaj meter hote hain kuch bhi hota netritva imaandaar hota padhe likhe hote toh aaj desh ki durdasha nahi hoti jansankhya kitni badi hui hai uske baad jab kahan se mile itne crore aabadi mein aapko kya lagta hai aapko job milega nahi tax bharne waale 50 crore mein khane waale 50 crore alag se free ke khane waale aise desh nahi chalta hai jab bhi koi naya kanoon karo laagu toh hungama desh mein shuru ho jata hai NRCT kyon vaah kyon koi bhi chahiye ghuspaith kiya kis desh mein rahkar paise kama ke logo ki gardan kaat ke chala jata hai sunny ki indian muslim badamash hai ya hindu badamash jo bahri log aate hain vaah aapko ya kaand karke jaate hain padhe likhe buddhijeevi logo ko padhne ke liye baith jaate logo ko lekar padhe likhe buddhijeevi kya hai toh main yah naukri karunga government sabko chahiye kisi ko apni duniya banane mein interest nahi hai yah nahi sochte ki main job karunga main agar kuch karu toh 10 naukri duniya chalti hai bahar deshon ki india mein sambandhit yahi nahi padhai likhai karna hai toh government lag jaaye imaandaari kaha dusro ke liye laagu hoti hai sab kanoon apne ghar ke nahi rehte apni baat niche neeche mantri apne andar mein padhe likhe logo ko jab aati hai kuch bhi karti hai purush ke hath hath laga dete aitibipulis ko maar deti hai kisi majboor police com ko samajhti ho na is desh ke logo ko logo ki badakismati hai tumko kya bachane jo khud bichare danga mein mar jaate hain police grah mantralay ko dar lagta ki bypaas bandook mat karo aap jo danga kare hazaro log police ko maar de chalega anpad log satta mein baithe hain aur padhe likhe log unki ji hujuri karte hain iske liye desh barbad hai jis din padhe likhe log satta mein aa jaenge is desh ka kayakalp ho jaega koi bhi koi bhi caste of main kisi ka support nahi karti lekin mujhe koi bhi banda agar isme buddhijeevi patel ke liye taaza gaye samaj mein naukri chhodkar karo soche ki nahi mujhe politics mein aakar desh ki raksha karni hai ya sach par chalna hai aaj desh ki tasveer alag hoti yah durdasha ka din hum log iske karan hai hum aur aap sab is ke gaano mein hum logo ki soch khao piyo aur paisa Rs de bus bahut hai aju baju ka samaj mein koi kami hai apni durdasha ka khud jimmewar indian rupees tak batein padh likh ke officer bana padh li ke karna padhne kyon karna padh li ke samaj ko theek nahi karna hai mili sote ki main padh li ke dusre anapdhon ko padha doon main jaakar saptah mein election mein raajneeti ko ko vote kaun deta hai hamara aap dete hain na anpad logo ko jeet aate kaun hai tumhara yah bewakoofi vala question poochne ki zarurat hi kya hai ki padhe likhe log naukri karte hain aur band kar lo sabse bada desh ka gaddar toh na ki public hai jo support karke kisi ko bhi kahan tak pohcha deti hai very bed indian kanoon ko bahishkar karte ho

ऐसा क्यों सुखी भारत देश का जो शुरू से इतिहास राणा वजनदार है सब सत्ता के लोभ लालच में जिस त

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Dr Anil Shalwa

Life Coach, Past Life Regression Therapist

2:08
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आइए बहुत ही अच्छा प्रश्न पूछा गया है कि पढ़ लिख कर इतने बड़े अफसर बनते हैं पर एक बिना पढ़े लिखे मंत्री के अंडर में काम करते हैं ऐसा क्यों हैं तो दी इन दोनों चीजों कंपनी किया जा सकता पढ़ लिख जाते हैं पढ़ने लिखने से अपनी ए कैपेसिटी डिवेलप होती है लेकिन जो मंत्री बना है उसकी अपनी एक अलग क्वालिटी है जो मंत्री बनने के लिए रिक्वायर्ड है तो वह जो क्वालिटी मंत्री के अंदर है वह क्वॉलिटी एक पढ़े-लिखे इंसान के अंदर नहीं है मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हर पढ़ा लिखा इंसान मंत्री नहीं बन सकता यहां पर मेरा बोलने का मतलब यह है कि पढ़ लिखकर आपने जो अपनी क्वालिटी को इंप्रूव कर अपनी क्वालिटी को बैठक आ रहा है वह उस इस टीम में है जिससे मैं अपने पढ़ाई करी अगर आपने इंजरिंग करी है तो आप एक एक्सेल एंड बेस्ट इंजीनियर हो सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बेस्ट मंत्री भी हो सकते हैं अगर आपने यूपीएससी का एग्जाम निकाला है आपने आप आईएस ऑफिसर बन गए तो आप बहुत पढ़े-लिखे ऑफिसर हैं पर इसका मतलब यह नहीं है कि आपके अंदर यह क्वॉलिटी है कि आप जनता का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं और 1000 लोग आपको फॉलो करेंगे और आपके शाम को सुनेंगे और आपके अंदर वह कम्युनिकेशन पावर होगा कि आप खड़े होकर स्टेज पर भाषण दे और हजारों लोग आपको सुने तो यह डिपेंड करता है अब से टॉप क्वालिटी पर कि किस तरह की क्वालिटी आपके अंदर है और वहां पर पहुंच जाते हैं तो यह बहुत ज्यादा पॉसिबल है कि एक पढ़ा लिखा इंसान मिनिस्टर बन जाए और उसके अंदर में बहुत सारी बहुत तो अनपढ़ इंसान कोई मिनिस्टर बन जाए और उसके अंदर में बहुत पढ़े-लिखे आईएएस आईपीएस लेवल पर लोग काम करें तो इसमें बहुत ज्यादा कोई समझता परेशानी या डिफिकल्टी हमको नहीं लगना चाहिए या बहुत और नहीं लगना चाहिए कि मिनिस्टर होने के लिए जो क्वालिटीज चाहिए वह मिनिस्टर के अंदर है और वह मिनिस्टर बन जाता है और आइए सोने के लिए जो क्वॉलिटी आईपीएस होने के लिए जो क्वॉलिटी या दूसरा कोई वीडियो ग्रेट होने के लिए जो क्वालिटी आपके अंदर है वह बन जाते हैं तो इनको कंपेयर नहीं किया जा सकता कि अपने आप में इंडिविजुअल क्वॉलिटी थे और इन क्वालिटीज के हिसाब से लोग बनते हैं और हरेक पोलूशन का अपना एक इंपॉर्टेंट से अपनी एक ब्यूटी है तो सभी जगह सभी कि हमें रिस्पेक्ट करना चाहिए मंत्री की अपनी जगह रिस्पेक्ट है ब्यूरोक्रेट की अपनी जगह रिस्पेक्ट है थैंक यू थैंक यू वेरी मच

aaiye bahut hi accha prashna poocha gaya hai ki padh likh kar itne bade officer bante hain par ek bina padhe likhe mantri ke under mein kaam karte hain aisa kyon hain toh di in dono chijon company kiya ja sakta padh likh jaate hain padhne likhne se apni a capacity develop hoti hai lekin jo mantri bana hai uski apni ek alag quality hai jo mantri banne ke liye required hai toh vaah jo quality mantri ke andar hai vaah quality ek padhe likhe insaan ke andar nahi hai yah nahi keh raha hoon ki har padha likha insaan mantri nahi ban sakta yahan par mera bolne ka matlab yah hai ki padh likhkar aapne jo apni quality ko improve kar apni quality ko baithak aa raha hai vaah us is team mein hai jisse main apne padhai kari agar aapne injaring kari hai toh aap ek excel and best engineer ho sakte hain lekin iska matlab yah nahi ki aap best mantri bhi ho sakte hain agar aapne upsc ka exam nikaala hai aapne aap ias officer ban gaye toh aap bahut padhe likhe officer hain par iska matlab yah nahi hai ki aapke andar yah quality hai ki aap janta ka pratinidhitva kar sakte hain aur 1000 log aapko follow karenge aur aapke shaam ko sunenge aur aapke andar vaah communication power hoga ki aap khade hokar stage par bhashan de aur hazaro log aapko sune toh yah depend karta hai ab se top quality par ki kis tarah ki quality aapke andar hai aur wahan par pohch jaate hain toh yah bahut zyada possible hai ki ek padha likha insaan minister ban jaaye aur uske andar mein bahut saree bahut toh anpad insaan koi minister ban jaaye aur uske andar mein bahut padhe likhe IAS ips level par log kaam kare toh isme bahut zyada koi samajhata pareshani ya difficulty hamko nahi lagna chahiye ya bahut aur nahi lagna chahiye ki minister hone ke liye jo kwalitij chahiye vaah minister ke andar hai aur vaah minister ban jata hai aur aaiye sone ke liye jo quality ips hone ke liye jo quality ya doosra koi video great hone ke liye jo quality aapke andar hai vaah ban jaate hain toh inko compare nahi kiya ja sakta ki apne aap mein individual quality the aur in kwalitij ke hisab se log bante hain aur harek pollution ka apna ek important se apni ek beauty hai toh sabhi jagah sabhi ki hamein respect karna chahiye mantri ki apni jagah respect hai Bureaucrat ki apni jagah respect hai thank you thank you very match

आइए बहुत ही अच्छा प्रश्न पूछा गया है कि पढ़ लिख कर इतने बड़े अफसर बनते हैं पर एक बिना पढ़े

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यह तो हमारी सिस्टम के ऊपर डिपेंड करता है कि मंत्री बनने के लिए पढ़ा लिखा है कि कोई केकसिटी well-lit नंबर नहीं है योग्यता और मंत्रियों का कामकाज संभालने के लिए अफसरों को काम करना पड़ता है

yah toh hamari system ke upar depend karta hai ki mantri banne ke liye padha likha hai ki koi keksiti well lit number nahi hai yogyata aur mantriyo ka kaamkaaj sambhalne ke liye afsaron ko kaam karna padta hai

यह तो हमारी सिस्टम के ऊपर डिपेंड करता है कि मंत्री बनने के लिए पढ़ा लिखा है कि कोई केकसिटी

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भाई साहब यह तो दुर्भाग्य है इस देश का के क्या पढ़ा लिखा व्यक्ति के अंडर में काम करता है फिर भी वह जो आने पर है अभी पढ़े लिखे की बराबरी नहीं कर सकता 1 ग्राम प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक भले पर एक सचिव के बिना जो कि एक आईएएस अधिकारी होता है कई तरीके होते होते हैं काम नहीं कर सकता उसे पता ही नहीं था क्या होता है ठीक है तो यह पॉजिटिव पॉइंट है तो बस यही अपने मन में लेकर चलिए सोचा तो बहुत है आपको पॉजिटिव पूछना कोई टिप्स हो तो भाई उसके मुख कुछ भी नहीं है यार तुम जब चाहो जैसे उसे बेवकूफ बना सकते हो तो कुछ नहीं आता नहीं पढ़े लिखे की वैल्यू होती कुछ भी कर सकता है ज्ञान

bhai saheb yah toh durbhagya hai is desh ka ke kya padha likha vyakti ke under mein kaam karta hai phir bhi vaah jo aane par hai abhi padhe likhe ki barabari nahi kar sakta 1 gram pradhan se lekar pradhanmantri tak bhale par ek sachiv ke bina jo ki ek IAS adhikari hota hai kai tarike hote hote hain kaam nahi kar sakta use pata hi nahi tha kya hota hai theek hai toh yah positive point hai toh bus yahi apne man mein lekar chaliye socha toh bahut hai aapko positive poochna koi tips ho toh bhai uske mukh kuch bhi nahi hai yaar tum jab chaho jaise use bewakoof bana sakte ho toh kuch nahi aata nahi padhe likhe ki value hoti kuch bhi kar sakta hai gyaan

भाई साहब यह तो दुर्भाग्य है इस देश का के क्या पढ़ा लिखा व्यक्ति के अंडर में काम करता है फि

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मनोज राम

सामाजिक कार्यकर्ता

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Nana Lal

Law Student

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मंत्री जी इसलिए बन जाते हैं महामंत्री बनने के लिए पढ़ाई नहीं 5 घंटे चाहिए उत्तर पब्लिक लेकर बैठ जाएंगे बोलेंगे हम इस पार्टी का है वह पार्टी क्या है मंत्री जी का पढ़ने का काम ही नहीं है मंत्री जी का पढ़ने वाला कोई और होता है नाता कोई और है और मंत्री जी पढ़ते नहीं इसलिए उनको अच्छा बोले जाता है मंत्री जी अपने काम में बहुत सफाई देते हैं हमें काम कर दिए वह काम कर दिए कि मंत्री जी के अंदर अंदर सारा कब होगा प्रणाली क्या सोचता है हम कौन सा काम करें क्या करें सोच अपने नसीब पर छोड़ देता है

mantri ji isliye ban jaate hain mahamantri banne ke liye padhai nahi 5 ghante chahiye uttar public lekar baith jaenge bolenge hum is party ka hai vaah party kya hai mantri ji ka padhne ka kaam hi nahi hai mantri ji ka padhne vala koi aur hota hai nataa koi aur hai aur mantri ji padhte nahi isliye unko accha bole jata hai mantri ji apne kaam me bahut safaai dete hain hamein kaam kar diye vaah kaam kar diye ki mantri ji ke andar andar saara kab hoga pranali kya sochta hai hum kaun sa kaam kare kya kare soch apne nasib par chhod deta hai

मंत्री जी इसलिए बन जाते हैं महामंत्री बनने के लिए पढ़ाई नहीं 5 घंटे चाहिए उत्तर पब्लिक लेक

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आपने बहुत ही शानदार सवाल किया है कि इतना पढ़ लिखकर के भेजो लोग काम करते हैं वह एक नेता मंत्री यानी एक अनपढ़ नेता मंत्री के अंडर में हो सके कम देखी आपने एक शब्द एक चीज सुना होगा कि संघे शक्ति युगे युगे आपने यह लोगों की सुनी सुनी होगी संघे शक्ति युगे हुई इसका क्या मतलब होता है अब इसका मतलब यह निकाल सकते हैं इससे पहले क्या होता था कि एक रास्ता ही शासन होता था यानी राजा का शासन होता था राजा जो होता था वह क्या होता था जनता का प्रतिनिधि होता था कि वह एक संघ का प्रतिनिधि होता था ठीक है वैसे ही यह जो नेता होता है ना वह एक संघ का प्रतिनिधि होता है संघ का मतलब एक बहुत बहुत बड़ी जनता का एक चेहरा होता है उसका उसका इटावा होता है ठीक है तो जो शासन प्रशासन या जो सरकार चलाई जाती है वह किस के लिए चलाई जाती है जनता के लिए चलाई और खासकर लोकतंत्र में राजतंत्र में भी सरकार को जो राजा होता है वह जनता का ही प्रतिनिधि होता है और उसको पढ़ाई लिखाई है और चीजों से कोई मतलब नहीं होता है कि वह कितना पढ़ा-लिखा बस वह एक जनता का शुभचिंतक हो जनता का चेहरा बने जनता का चहेता बने जनता के जिस को पसंद करें वह ऐसा राजा होना चाहिए नहीं तो उस राज्य में ही गद्दारी हो जाएगी उस राज्य में ही विद्रोह हो जाएगा जनता उसके खिलाफ किसी काम का नहीं होगा जिससे क्या हो कि जनता उससे खुश रह जनता उसके अंदर में रह सके जनता उसकी बातों को माने अधिकारी जो होता है वह कहीं न कहीं जनता के ऊपर थोपा जाता है वह पढ़ लिख कर के उसको पढ़ लिख कर के एक तरफ से वह पहले से पहले के समय में जो बहुत बहुत सारे लोग होते थे जैसे कायस्थों को माना जाता था कि यह मुनि मी का काम करते हैं यह लिखाई पढ़ाई का काम करते हैं या जो बनी बनी कहिया व्यवसाई समग्र समाज से थे उनको ऐसा माना जाता था वह व्यवसाय से हैं लेकिन आज प्रजातंत्र में सब को मौका दिया गया राजा बनने का कैसा होगा चाहे वह बढ़िया हूं चाहे वह किसी और समाज से हो चाहे किसी और परिवार से हो लेकिन वह जनता का सेवक होना चाहिए जनता का प्रतिनिधि वास्तविक प्रतिनिधि होना चाहिए और जनता जिस को पसंद करती है वह वह ऐसा चेहरा होना चाहिए ऐसा व्यक्ति होना चाहिए इस नाते जनता जनता कैसे चलने वाली सरकार किस को चलाने के लिए बनती है सरकार जो बनती है वह आमजन को चलाने के लिए आमजन की समस्याओं के निदान के लिए बनती है तो मेरा यह मानना है विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि इसी वजह से आप पढ़ लिख करके सरकार नहीं चला सकते हैं आप पढ़ लिखकर के सरकार के कामकाज को देख सकते हैं इस नाते जो सरकार जो सरकार चलाना है जिसको वह जनता का प्रतिनिधि होना चाहिए और जिसको सरकार चलाने के लिए सरकार का काम करना है वह एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति होना चाहिए उसको कहीं न कहीं अर्थात समाजशास्त्रीय और अन्य चीजों की जानकारी होनी चाहिए तभी वह जो है वह सरकार के कामकाज में उसका मदद कर पाएगा विश यू ऑल द बेस्ट थैंक्यू जय हिंद

aapne bahut hi shandar sawaal kiya hai ki itna padh likhkar ke bhejo log kaam karte hain vaah ek neta mantri yani ek anpad neta mantri ke under me ho sake kam dekhi aapne ek shabd ek cheez suna hoga ki sanghe shakti yuge yuge aapne yah logo ki suni suni hogi sanghe shakti yuge hui iska kya matlab hota hai ab iska matlab yah nikaal sakte hain isse pehle kya hota tha ki ek rasta hi shasan hota tha yani raja ka shasan hota tha raja jo hota tha vaah kya hota tha janta ka pratinidhi hota tha ki vaah ek sangh ka pratinidhi hota tha theek hai waise hi yah jo neta hota hai na vaah ek sangh ka pratinidhi hota hai sangh ka matlab ek bahut bahut badi janta ka ek chehra hota hai uska uska itawa hota hai theek hai toh jo shasan prashasan ya jo sarkar chalai jaati hai vaah kis ke liye chalai jaati hai janta ke liye chalai aur khaskar loktantra me rajtantra me bhi sarkar ko jo raja hota hai vaah janta ka hi pratinidhi hota hai aur usko padhai likhai hai aur chijon se koi matlab nahi hota hai ki vaah kitna padha likha bus vaah ek janta ka shubhchintak ho janta ka chehra bane janta ka chaheta bane janta ke jis ko pasand kare vaah aisa raja hona chahiye nahi toh us rajya me hi gaddari ho jayegi us rajya me hi vidroh ho jaega janta uske khilaf kisi kaam ka nahi hoga jisse kya ho ki janta usse khush reh janta uske andar me reh sake janta uski baaton ko maane adhikari jo hota hai vaah kahin na kahin janta ke upar thopa jata hai vaah padh likh kar ke usko padh likh kar ke ek taraf se vaah pehle se pehle ke samay me jo bahut bahut saare log hote the jaise kayasthon ko mana jata tha ki yah muni me ka kaam karte hain yah likhai padhai ka kaam karte hain ya jo bani bani kahiya vyavasai samagra samaj se the unko aisa mana jata tha vaah vyavasaya se hain lekin aaj prajatantra me sab ko mauka diya gaya raja banne ka kaisa hoga chahen vaah badhiya hoon chahen vaah kisi aur samaj se ho chahen kisi aur parivar se ho lekin vaah janta ka sevak hona chahiye janta ka pratinidhi vastavik pratinidhi hona chahiye aur janta jis ko pasand karti hai vaah vaah aisa chehra hona chahiye aisa vyakti hona chahiye is naate janta janta kaise chalne wali sarkar kis ko chalane ke liye banti hai sarkar jo banti hai vaah aamjan ko chalane ke liye aamjan ki samasyaon ke nidan ke liye banti hai toh mera yah manana hai vishesagyon ka bhi yahi manana hai ki isi wajah se aap padh likh karke sarkar nahi chala sakte hain aap padh likhkar ke sarkar ke kaamkaaj ko dekh sakte hain is naate jo sarkar jo sarkar chalana hai jisko vaah janta ka pratinidhi hona chahiye aur jisko sarkar chalane ke liye sarkar ka kaam karna hai vaah ek padha likha vyakti hona chahiye usko kahin na kahin arthat samajashastreey aur anya chijon ki jaankari honi chahiye tabhi vaah jo hai vaah sarkar ke kaamkaaj me uska madad kar payega wish you all the best thainkyu jai hind

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